सीपेज से बनी खतरे की स्थिति, परेशानियों के बीच काम कर रहे चिकित्सक व कर्मचारी

गिरिजा ठाकुर

अंबिकापुर। सरगुजा संभाग के सबसे बड़े राजमाता श्रीमति देवेन्द्र कुमारी सिंहदेव चिकित्सा महाविद्यालय संबद्ध जिला अस्पताल में लगातार हो रही बारिश के बीच गैलरी में चारों ओर टपकते पानी की तस्वीर सामने आई है। दीवारों में सीपेज से बिजली के करंट का खतरा बना हुआ है। नर्सिंग कक्ष तक सुरक्षित नहीं है। पानी के रिसाव से कई जगह की फॉल्स सीलिंग गिर गई है। ऐसे में वार्डों में भर्ती मरीजों के स्वजन व अस्पताल के कर्मचारियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बरसात से पहले अस्पताल के मरम्मत कार्य के लिए प्रबंधन ने प्रस्ताव भेजा था, लेकिन राशि की स्वीकृति नहीं मिलने से अस्पताल की छत से लगातार बारिश का पानी टपक रहा है, जिससे खतरे की स्थिति बनी हुई है। कई वार्डों को पानी से बचाने के लिए तिरपाल से ढका गया है।


अंबिकापुर में हो रही लगातार बारिश से जहां एक ओर जनजीवन प्रभावित हो रहा है, वहीं राजमाता श्रीमति देवेन्द्र कुमारी सिंह देव चिकित्सा महाविद्यालय संबद्ध जिला अस्पताल में सर्जिकल पुरूष वार्ड सहित अन्य वार्डों की ओर जाने वाले मार्ग की गैलरी पानी से लबालब नजर आ रही है। छत से लगातार टपक रहे पानी के कारण मरीजों के स्वजन परेशान हैं। इनके बैठने के लिए जगह शेष नहीं है। अस्पताल के कर्मचारियों और चिकित्सकों को भी ऐसे हालातों के बीच परेशानी का सामना करते देखा जा रहा है। चिकित्सकों की मानें तो अस्पताल के वार्डों से लगे गैलरी में बारिश का पानी टपकने से नमी बनी हुई है, जिससे मरीजों में इंफेक्शन का खतरा बना हुआ है। अस्पताल प्रबंधन बरसात के पानी से वार्डों में भर्ती मरीजों को बचाने के लिए अधिकांश भवन को तिरपाल से ढंक दिया है।


टाइल्स में फिसलन से बनी खतरे की स्थिति
जिला अस्पताल करीब 10 वर्षों से शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध अस्पताल के रूप में संचालित हो रहा है. भवन काफी पुराना होने के कारण जर्जर हो चुका है। भवन के मेंटनेंस के लिए प्रति वर्ष लिाखों रुपये खर्च किया जाता है, लेकिन बरसात शुरू होते ही अधिकांश वार्डों के छत से पानी टपकने लगता है। कोविडकाल के दौरान चकाचक किए गए वार्डों से लगे गैलरी व वार्ड के फाल्स सीलिंग भी गिरने लगते हैं। अस्पताल में टपकते पानी के कारण नमी और बदबू का आलम बना हुआ है। टपकते पानी को निकालने के लिए अस्पताल के कर्मचारी ताकत झोंक रहे हैं। अत्यधिक पानी गिरने वाले स्थल पर कचरादान रख दिया गया है। पानी का नियमित रिसाव होने के कारण टाइल्स में फिसलन की स्थिति बन गई है। अस्पताल के चिकित्सक, नर्स सहित अन्य कर्मचारियों व मरीजों के स्वजन इस खतरे को रोजाना झेल रहे हैं।

भर्ती मरीजों को राहत देने लगाया तिरपाल
अस्पताल भवन काफी पुराना है, इसके रख-रखाव का जिम्मा लोक निर्माण विभाग का है। छत पर पैबंद लगाने से छत की मोटाई ज्यादा हो गई है। ऐसे में इस पर और वजन डालने से खतरे की स्थिति बन सकती है। इसलिए अस्पताल के पूरे भवन में शेड निर्माण कराने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, लेकिन इसे स्वीकृति नहीं मिल पाई। हर वर्ष मेंटनेंस के नाम पर खानापूर्ति करने के कारण बरसात के मौसम में यहां की दुर्गति देखने लायक रहती है। हालिया बरसात के मौसम में पानी से भवन और दवाइयों को बचाने के लिए अस्पताल प्रबंधन लाखों रुपये खर्च करके अस्पताल के अधिकांश हिस्से को रंग-बिरंगे तिरपाल से ढक दिया है। तिरपाल लगे रहने से कुछ हद तक वार्ड में भर्ती मरीजों को राहत मिली है, लेकिन पूरे भवन को तिरपाल से ढककर सुरक्षित कर पाना मुश्किल है, जिस कारण गैलरियों की स्थिति बदतर हो गई है। प्रबंधन के साथ ही चिकित्सक व स्टाफ अस्पताल के पुराने भवन से टपकते पानी के बाद बनने वाली नमी की स्थिति को लेकर चिंतित हैं।

Categorized in: