केंद्र सरकार की कूटनीतिक विफलता और आर्थिक कुप्रबंधन पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने किया जमकर प्रहार

अंबिकापुर। मोदी सरकार की कूटनीतिक विफलता और उद्योगपति मित्रों के लिए अपनाई गई सुनियोजित आर्थिक कुप्रबंधन के फलस्वरूप देश में बढ़ती महंगाई और पेट्रोलियम पदार्थों की किल्लत को लेकर गुरूवार को जिला कांग्रेस कमेटी सरगुजा ने जिलाध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में प्रेसवार्ता का आयोजन किया। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में कांग्रेस कमेटियों द्वारा प्रेस से चर्चा का आयोजित किया गया।

कांग्रेस जिला अध्यक्ष बालकृष्ण पाठक ने इस मौके पर कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध प्रारंभ होने के पूर्व मोदी सरकार ने रूस सहित पूरे विश्व से सस्ती दरों पर कच्चे तेल की खरीदारी की, लेकिन उसका फायदा देश की आम जनता को नहीं मिला। एक ओर देश की जनता सैकड़ा की कीमत में पेट्रोल-डीजल खरीदने को मजबूर थी, वहीं प्रधानमंत्री मोदीजी के उद्योगपति मित्र मोटा मुनाफा कमा रहे थे। युद्ध के हालातों में तेल की कीमतों में हुई वृद्धि का बोझ जनता के सर पर डाला जा रहा है। सरकार ने सुनियोजित रूप से इस आर्थिक कुप्रबंधन को अपनाया। लाभ की स्थिति में फायदा उद्योगपति मित्रों को हुआ, नुकसान देश की गरीब जनता झेलेगी। इसके कारण हाल ही में रसोई गैस, डीजल, प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। इसके परिणाम स्वरूप देश में खाद्य पदार्थों की कीमत में भी अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है।

कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने आगे कहा कि देश को संकट में फंसाकर मोदी सरकार का पूरा तंत्र चुनाव जीतने के प्रयास में लगा हुआ है। देश के गृहमंत्री बोलते हैं कि वो बंगाल चुनाव जीतने के लिए 15 दिन बंगाल में ही बैठेंगे, लेकिन उन्होंने एक बार भी यह नहीं कहा कि गैस की कालाबाजारी को रोकने के लिए वो और उनका मंत्रालय 15 दिन कमर कस के काम करेगा। उन्होंने कहा मामला सिर्फ महंगाई बढ़ने तक ही सीमित नहीं है, अब देश में पेट्रोलियम पदार्थों की भारी किल्लत भी प्रारंभ हो गई है। इसकी वजह मोदी सरकार की अमेरिका के सामने सरेंडर नीति है, जिसके परिणाम स्वरूप युद्ध के पहले ही हम अपने हितैषी तेल आपूर्तिकर्ता देशों जैसे रूस, ईरान से अपने संबंधों को समाप्त कर चुके थे। युद्ध के दौरान अमेरिका और इजरायल के द्वारा ईरान के सुप्रीम लीडर की हत्या और दूसरे परिस्थितियों पर सरकार की खामोशी ने भी स्थितियों को और बिगड़ा। इन परिस्थितियों ने देश को गंभीर आर्थिक संकट में फंसा दिया है। फैक्टरियों के बंद होने से बेरोजगारी बढ़ी है। गैस की किल्लत ने कालाबाजारी को जन्म दिया है।

प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष डॉ. जे.पी. श्रीवास्तव ने कहा कि भारत को प्रतिदिन 2 एलपीजी, 1 एलएनजी और 1 पीएनजी भरे जहाज की दरकार है। इस प्रकार से देश को महीने भर में 126 जहाज में विभिन्न गैस चाहिए, जबकि हमें पूरे महीने भर में मात्र 6 जहाज ही मिल पाए हैं, जबकि पाकिस्तान ने खाड़ी देशों से 30 जहाज में गैस प्राप्त किया है। यह बतलाता है कि हम वैश्विक मंच पर किस कदर विफल हो चुके हैं। प्रदेश महामंत्री द्वितेंद्र मिश्रा ने कहा कि मोदी सरकार की आर्थिक विफलता के कारण आज रुपया दुनिया की सबसे कमजोर मुद्रा में बदल चुका है। ईरान युद्ध के पहले ही एक डॉलर 92 रुपये के बराबर था, जो अब बढ़कर 95 पर हो गया है। मोदी सरकार के कार्यकाल के 11 वर्ष में रुपये में 37 रुपये की भारी गिरावट हुई है, जबकि मनमोहन सरकार के पूरे कार्यकाल में मात्र 13 रुपये की गिरावट को मोदीजी ने प्रधानमंत्री और देश की प्रतिष्ठा में गिरावट से जोड़ दिया था। प्रेसवार्ता में मो. इस्लाम, संजय विश्वकर्मा, इंद्रजीत सिंह धंजल, विनीत विशाल जायसवाल, दुर्गेश गुप्ता, अनूप मेहता, आलोक सिंह, नरेंद्र विश्वकर्मा, विकल झा, आशीष जायसवाल, अविनाश कुमार, अमित सिंह भी उपस्थित थे।

 

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