एसडीएम न्यायालय ने किया गिरफ्तारी वारंट जारी, खेत से उठाकर ले गई पुलिस

कांग्रेस के सख्त तेवर के बाद सीईओ ने बदला सरपंच का नाम, सरपंच ने कहा-जेल भेजो

अंबिकापुर। जनपद पंचायत अंबिकापुर की घोर लापरवाही और गलत रिकार्ड संधारण के कारण सरपंच संघ के जिलाध्यक्ष और ग्राम सरईटिकरा के सरपंच रामसाय मिंज को बेगुनाह होते हुए भी गिरफ्तारी वारंट के आधार पर पुलिस ने गिरफ्तार करके एसडीएम कोर्ट में पेश किया। मामला ग्राम चीताबहार में 2020-21 में हुए 1 लाख 75 हजार 93 के सामुदायिक शौचालय निर्माण कार्य के नाम पर हुए गबन से जुड़ा है।

एसडीएम न्यायालय अंबिकापुर द्वारा 06.04.2026 को जारी ‘कारण बताओ नोटिस’ क्रमांक 1047 में ग्राम चीताबहार के तत्कालीन सरपंच रामसाय और तत्कालीन सचिव देवेन्द्र कुमार को नोटिस जारी किया। नोटिस में कहा गया कि चीताबहार में सामुदायिक शौचालय निर्माण के लिए आहरित 1,75,093 की राशि जमा नहीं की गई है। इसके बाद 20.07.2026 को एसडीएम कार्यालय से रामसाय मिंज और देवेन्द्र कुमार के नाम से अलग-अलग गिरफ्तारी वारंट भी जारी कर दिए गए। वारंट में लिखा है कि दोनों ने 87,546-87,546 रुपये का गबन किया है और उन्हें 24.07.2026 को पेश किया जाए।

जमानत लेने से किया इन्कार

इसी वारंट के आधार पर दरिमा थाना पुलिस ने अलसुबह रामसाय मिंज को उनके खेत से गिरफ्तार कर लिया। उन्हें न ब्रश करने दिया गया न कपड़े बदलने दिए गए। थाने में प्रारंभिक कार्रवाई पूरी करने के बाद इन्हें दोपहर करीब 12.30 बजे एसडीएम कोर्ट में पेश किया गया। यहां मौजूद कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष राकेश गुप्ता ने रामसाय मिंज के समक्ष दस्तावेज को देखा, तो पता चला कि वे घटना के समय चीताबहार के सरपंच ही नहीं थे। इसके बाद उन्होंने जमानत लेने से मना कर दिया और जेल भेजने की मांग की।

जनपद सीईओ ने खुद गलती स्वीकारा

हंगामे के बाद जनपद पंचायत के सीईओ ने 31.07.2026 को एसडीएम को पत्र क्रमांक 3122 भेजकर गलती स्वीकार की। पत्र में सीईओ की ओर से उल्लेख है कि ‘सूचित बैठक में सरपंच/सचिव ग्रुप में आरआरसी वसूली सूची में मैसेज के माध्यम से सूचित किया जाता रहा, जिसमें सरपंच से वसूली हेतु रामसाय का नाम अंकित था, किन्तु इस संबंध में रामसाय सरपंच द्वारा कोई भी जानकारी कार्यालय में नहीं दी गई। फलस्वरूप सरपंच सरईटिकरा के रूप में रामसाय का नाम अंकित रहा।Ó पत्र में आगे लिखा है कि ‘आज स्वयं सरपंच रामसाय ने जानकारी दी एवं सचिव सरईटिकरा से 31.07.2026 को जानकारी प्राप्त हुई कि वर्ष 2020-25 में शिवनाथ राम भगत सरपंच के पद पर कार्यरत थे। रामसाय वर्तमान में ग्राम पंचायत सरईटिकरा के सरपंच पद पर कार्यरत नहीं हैं। अंत में उल्लेख है कि ‘अत: ग्राम पंचायत चीताबहार सरपंच वर्ष 2020-25 रामसाय के स्थान पर शिवनाथ राम भगत पूर्व सरपंच के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित है।Ó’

कांग्रेस का आरोप: साजिश

घटना की जानकारी मिलते ही एसडीएम कार्यालय कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष राकेश गुप्ता, ग्रामीण ब्लॉक अध्यक्ष विनय शर्मा, दरिमा ब्लॉक अध्यक्ष नारद गु प्ता, जनपद अध्यक्ष विक्रम सोनपाकर, उपाध्यक्ष सतीश यादव सहित सैकड़ों कार्यकर्ता पहुंच गए। इन्होंने कहा जिला पंचायत की निरंकुश कार्यप्रणाली का प्रभाव जनपद पर पड़ने लगा है। इधर कांग्रेस के जिलाध्यक्ष बालकृष्ण पाठक ने सीईओ जनपद से फोन पर बात करके गलती सुधारने को कहा। राकेश गुप्ता ने कहा ‘यह त्रुटि नहीं बल्कि कांग्रेस समर्थित जनप्रतिनिधि को अपमानित करने की साजिश है। सीईओ के विरूद्ध कार्रवाई होनी चाहिए।

प्रतिष्ठा पर आई आंच का कौन जवाबदेह

जनपद पंचायत का 06.08.2024 का पत्र क्रमांक 1480 जिसमें वसूली योग्य 1,75,093 में से 87,546 रामसाय/सरपंच के नाम और 87,547 रुपये देवेन्द्र कुमार/सचिव के नाम दर्ज है। कार्यकाल 05/2021 लिखा है। 31.07.2026 के पत्र में सीईओ ने माना कि 2020-25 में चीताबहार के सरपंच शिवनाथ राम भगत थे, रामसाय नहीं। सवाल यह उठता है कि जिस सीईओ को ये नहीं पता कि किस गांव का सरपंच कौन है, वो सरगुजा के 100 से ज्यादा पंचायतों कैसे चलाएगा? गलत रिकार्ड के आधार पर बेगुनाह को गिरफ्तार करके लाने का जिम्मेदार कौन होगा है? वो भी ऐसी स्थिति में जब गिरफ्तार करके लाया सरपंच जनपद क्षेत्र के सरपंचों का अध्यक्ष हो। ऐसे में मान प्रतिष्ठा पर आई आंच की जवाबदेही तय होनी चाहिए।

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