रायपुर : सार्वजनिक परिवहन को अधिक सुविधाजनक और उपयोगी बनाने के लिए प्रधानमंत्री ई-बस योजना की समीक्षा की गई। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने अधिकारियों को ऐसा रूट प्लान तैयार करने के निर्देश दिए, जिसमें प्रमुख पर्यटन स्थलों के साथ स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और अन्य महत्वपूर्ण स्थान शामिल हों।उन्होंने बस रूट तय करने से पहले यात्रियों की आवाजाही, कनेक्टिविटी और व्यवहारिकता का विस्तृत सर्वे कराने को कहा। यात्रियों की जरूरत के अनुसार बस स्टॉप चिन्हित करने और इनके संचालन में पीपीपी मॉडल की संभावनाएं तलाशने के निर्देश भी दिए गए।किराया तय करते समय आम नागरिकों की भुगतान क्षमता को ध्यान में रखने पर जोर दिया गया। साथ ही रूट, बस स्टॉप, बसों की उपलब्धता और यात्री सुविधाओं को तकनीक से जोड़कर सार्वजनिक परिवहन को अधिक सुरक्षित, सुगम और नागरिक केंद्रित बनाने की बात कही गई।

प्रधानमंत्री आवास योजना के अधूरे घरों पर फोकस

प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 1.0 के निर्माणाधीन मकानों को 30 सितंबर 2026 तक पूरा कराने का लक्ष्य रखा गया है। प्रमुख सचिव ने नगरीय निकायों को शेष आवासों की संख्या के आधार पर साप्ताहिक लक्ष्य तय कर विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए।जिला कलेक्टरों को भी लंबित आवासों की लगातार निगरानी करने और निर्माण में आने वाली तकनीकी या प्रशासनिक अड़चनों को समय पर दूर कराने को कहा गया। हितग्राहियों के निर्माण कार्य की वास्तविक प्रगति के आधार पर पात्र किस्तों का भुगतान समय पर करने पर भी जोर दिया गया, ताकि पैसों की कमी के कारण निर्माण प्रभावित न हो।

कचरे से ऊर्जा बनाने की योजना में वित्तीय व्यवहार्यता अहम

स्वच्छ भारत मिशन शहरी 2.0 के तहत प्रस्तावित वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजनाओं को लेकर भी बैठक में विस्तृत चर्चा हुई। चिन्हित क्लस्टरों की तकनीकी व्यवहार्यता के साथ परियोजनाओं की वित्तीय स्थिरता का आकलन करने के निर्देश दिए गए।बोरा ने स्पष्ट किया कि ऐसी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने से पहले राज्य सरकार और नगरीय निकायों पर पड़ने वाले संभावित वित्तीय भार का वास्तविक अनुमान जरूरी है। भविष्य में संचालन और अन्य आवश्यक खर्चों के लिए संसाधनों की उपलब्धता भी पहले से सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

निजी क्षेत्र की भागीदारी को लेकर भी तैयारी

वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजनाओं में पीपीपी मॉडल के तहत निजी क्षेत्र की संभावित भूमिका पर भी विचार किया गया। अधिकारियों को सक्षम और अनुभवी निजी भागीदारों की उपलब्धता, निवेश में उनकी रुचि और अपेक्षाओं का आकलन करने के निर्देश दिए गए।सरकार, नगरीय निकाय और निजी भागीदारों के बीच जिम्मेदारियों तथा वित्तीय हिस्सेदारी का संतुलन तय करने पर जोर दिया गया, ताकि परियोजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें और लंबे समय तक आर्थिक रूप से व्यवहारिक बनी रहें।

15वें वित्त आयोग की राशि से जरूरत के हिसाब से होगा विकास

बैठक में 15वें वित्त आयोग से मिलने वाली राशि के बेहतर इस्तेमाल पर भी चर्चा हुई। प्रमुख सचिव ने नगरीय निकायों को स्थानीय जरूरतों और उपलब्ध संसाधनों का आकलन करके प्राथमिकता तय करने के निर्देश दिए।

सड़कों के निर्माण और उन्नयन को अलग-अलग छोटे कार्यों में बांटने के बजाय शहर की मौजूदा अधोसंरचना और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए समग्र योजना बनाने पर जोर दिया गया। यातायात दबाव, कनेक्टिविटी और स्थानीय आवश्यकता के आधार पर सड़कों की प्राथमिकता तय करने को कहा गया।

गैप एनालिसिस से तय होगी विकास की प्राथमिकता

बैठक में सैचुरेशन आधारित शहरी विकास की अवधारणा पर भी जोर दिया गया। इसके तहत प्रत्येक क्षेत्र में उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं की स्थिति का आकलन कर कमियों की पहचान करने को कहा गया।सड़क, नाली, पेयजल, स्ट्रीट लाइट और दूसरी जरूरी नागरिक सुविधाओं से जुड़े गैप एनालिसिस के आधार पर कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इससे सीमित संसाधनों को उन क्षेत्रों में लगाया जा सकेगा, जहां उनकी सबसे अधिक जरूरत है।बैठक में सूडा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुमित अग्रवाल सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। प्रमुख सचिव ने सभी योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग और तय लक्ष्यों को समय-सीमा में पूरा करने को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।