सेवानिवृत वन विभाग के दरोगा सुबह उठे तो पेड़ का मुख्य हिस्सा था गायब

एसडीओ के हर्बल हाउस के बाद वन परिसर के आवास को बनाया निशाना

अंबिकापुर। कलेक्टर बंगला रोड में स्थित हर्बल हाउस से चंदन का पेड़ काटकर ले जाने के मामले की आंच ठंडी नहीं पड़ी थी, पुन: वन विभाग के एक सेवानिवृत कर्मचारी के शासकीय आवास की बाड़ी में लगे चंदन के पेड़ का तना काटकर चोर ले गए। हैरत की बात यह है कि वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों के आवास, कार्यालय के आसपास तस्कर चंदन का पेड़ बेखौफ काटकर ले जा रहे हैं, इसकी भनक वन अमले को नहीं लग पा रही है, और तस्कर अपने मंसूबे में सफल नहीं हो रहे हैं। ऐसे में जंगलों की सुरक्षा को लेकर वन अमला कितना सजग रहता होगा, इसकी कल्पना की जा सकती है।

जानकारी के मुताबिक 18-19 फरवरी की दरम्यानी रात करीब दो बजे लुण्ड्रा वन परिक्षेत्र में उप वन परिक्षेत्राधिकारी के पद से हाल में सेवानिवृत हुए एन.डी. वर्मा के शासकीय आवास की बाड़ी में लगे चंदन के पेड़ को काटकर तस्कर ले गए। एक दिन के अंतराल में चंदन के पेड़ काटकर ले जाने की दूसरी घटना सामने आई है। तस्करों ने पहले कलेक्टर बंगला रोड में महिला थाना के सामने रहने वाले एसडीओ के हर्बल हाउस को निशाना बनाया, अब इससे लगे वन विभाग के कॉलोनी में रहने वाले सेवानिवृत उप वन परिक्षेत्राधिकारी के शासकीय आवास के बाड़ी में घुसकर चंदन का पेड़ काटकर ले जाने की हिमाकत कर बैठे। एन.डी. वर्मा ने बताया कि दौरे के बीच वे वर्ष 2000 में मनेन्द्र$गढ़ के गेज नर्सरी से बेल और चंदन का पेड़ लाकर अपने शासकीय निवास में स्थित बाड़ी में लगाए थे। बेल का पेड़ तो सूख गया, लेकिन 26 वर्ष में चंदन का पेड़ अच्छा बड़ा और छायादार आकार ले चुका था, इसका 10 मीटर से अधिक मुख्य तना को काटकर तस्कर बीती रात ले गए। बाड़ी और निवास में बीच अधिक फासला होने के कारण इसकी भनक उन्हें नहीं लग पाई। सुबह उठे तो चंदन के पेड़ का कटा हुआ कुछ हिस्सा जमीन में पड़ा था और कीमती हिस्सा गायब था। इसकी सूचना उन्होंने तत्काल वन परिक्षेत्राधिकारी अंबिकापुर को दी थी, इसके बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंचे और चंदन के पेड़ का कटा अवशेष जब्त करके ले गई है।

 

तस्करों की सक्रियता और विभागीय सुस्ती सवालों के घेरे में  

लगातार चंदन के पेड़ों को काटकर ले जाने की घटनाएं सामने आने के बाद भी वन विभाग की सुस्ती समझ से परे है। वन परिसर और आसपास से चोरी की ये तीसरी घटना है। 16-17 फरवरी की दरम्यानी रात को ही हर्बल हाउस से चंदन का विशाल पेड़ काटकर ले जाने का मामला प्रकाश में आया था, जो वन विभाग के एसडीओ का निवास है। एक दिन के अंतराल में पुन: वन परिसर के बीच में स्थित कर्मचारी आवास के बाड़ी से चंदन का पेड़ काटकर ले जाने का मामला न सिर्फ हैरान करने वाला है, बल्कि वन विभाग के आला अफसरों के नाक के नीचे हो रही घटनाओं को सवालों के घेरे में ले रहा है। चोरों के द्वारा चंदन के पेड़ को काटने में आरा मशीन का उपयोग किया जा रहा है। इधर वन विभाग बेशकीमती चंदन के पेड़ों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम उठाने में नाकाम साबित हो रहा है। दिसंबर 2024 में तस्करों ने मुख्य वन संरक्षक कार्यालय के पीछे स्थित नर्सरी से तीन चंदन के पेड़ों को काटकर पार कर दिया था। माखन विहार फॉर्म हाउस से भी ढाई दशक पुराने लाखों के चंदन के चार पेड़ों की चोरी हुई थी। सभी घटनाएं रात्रि पहर में हुईं, लेकिन तस्करों का पता नहीं चला। देखना यह है कि लगातार हो रही इन घटनाओं के बाद अपनी जिम्मेदारियों पर परदा डालने की कोशिश करने वाला वन अमला क्या कदम उठाता है।

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