झारखंड पुलिस सादे ड्रेस में पहुंची तो बनी विवाद की स्थिति, मौके का फायदा उठाकर हुआ रफूचक्कर

अंबिकापुर। झारखंड के धनबाद, वासेपुर के चर्चित दोहरे हत्याकांड का मुख्य आरोपी सब्बीर आलम न्यायालय से आजीवन कारावास की सजा सुनाने के बाद करीब डेढ़ दशक से छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर के एक मोहल्ले में अपनी पहचान छिपाकर सामान्य लोगों की तरह रह रहा था। इसकी भनक स्थानीय पुलिस को भी नहीं थी। मामले में निचली अदालत के द्वारा सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को उच्च न्यायालय के द्वारा बरकरार रखने के बाद सजायाफ्ता गैंगस्टर फरार हो गया।

बता दें कि गैंगस्टर सब्बीर आलम, उसके भाई शाहीद आलम और साथियों ने 18 अक्टूबर 2001 को डॉन फहीम खान की मां नाजमा खातून और चाची शाहनाज खातून की धनबाद के डायमंड क्रासिंग के पास गोली मारकर हत्या कर दी थी, वे दोनों बाजार से लौट रही थीं। गैंगस्टर सब्बीर आलम और डॉन फहीम खान के बीच दुश्मनी के कारण यह घटना हुई थी। इस हत्याकांड में साबीर आलम मुख्य साजिशकर्ता और आरोपी था। पुलिस ने मामले में गैंगस्टर सब्बीर आलम, शाहीद आलम सहित सात आरोपियों को गिरफ्तार किया था। झारखंड हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान सब्बीर आलम भाग गया था, तब से वह पकड़ा नहीं गया है। इधर वर्ष 2018 में धनबाद की अदालत ने शाहीद आलम सहित अन्य आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। सब्बीर आलम के छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में रहने की पुष्ट खबर मिलने पर झारखंड पुलिस की एक टीम वारंटी को गिरफ्तार करने पहुंची और रिंगरोड स्थित एक होटल की गली में छापामार कार्रवाई, लेकिन सरगुजा पुलिस को इसकी कोई पूर्व सूचना नहीं दी थी। झारखंड पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में थी, स्थानीय लोगों के विरोध के बीच मौका पाकर सब्बीर आलम भाग गया। घटना ने झारखंड पुलिस की कार्यप्रणाली को सवालों के घेरे में लिया है। मुजरिम के हाथ से निकल जाने के बाद धनबाद पुलिस ने काफी हाथ-पैर मारा और आनन-फानन में सरगुजा पुलिस को इसकी सूचना दी, जिससे पूरे मामले का पर्दाफास हुआ। शहर में दुर्दांत घटनाक्रम के सजायाफ्ता मुजरिम के करीब 15 वर्षों से सामान्य जीवन व्यतीत करने की खबर ने लोगों को सशंकित कर दिया है। बता दें कि, वासेपुर के गैंगस्टरों पर फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर भी बनी है।

झारखंड पुलिस को मिली नाकामी के बाद हुआ पर्दाफास

सरगुजा पुलिस जब सब्बीर आलम का रिकॉर्ड खंगाली, तो करीब डेढ़ दशक से अंबिकापुर में इसके द्वारा ठिकाना बनाकर रहना सामने आया है। इस अवधि में उसने सरगुजा में कोई नया आपराधिक कृत्य नहीं किया है। दोहरे हत्याकांड में सजा के बाद इलाके से भागा सब्बीर आलम स्थानीय लोगों के बीच घुल-मिल गया था, जिससे कभी संदेह की स्थिति नहीं बनी और ना ही सरगुजा पुलिस को कभी इसके रिकार्ड को खंगालने की जरूरत महसूस हुई। झारखंड पुलिस की गुपचुप दबिश और दोहरे हत्याकांड के ‘मोस्ट वांटेडÓ मुजरिम के हाथ से निकल जाने की खबर जब सामने आई तो हर कोई दंग रह गया।

संवेदनशील इलाकों तक सरगुजा पुलिस की नजर

आरोपी के फरार होने के बाद सरगुजा पुलिस सक्रिय है। पुलिस की विभिन्न टीमें सब्बीर आलम की तलाश में लगी है। चूंकि आरोपी को शहर की भौगोलिक स्थिति और गलियों का गहरा ज्ञान 15 वर्ष के अंतराल में हो चुका है, इसलिए उसे पकड़ना पुलिस के लिये चुनौती से कम नहीं है। पुलिस शहर के संवेदनशील इलाकों और संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है, ताकि मोस्ट वांटेड मुजरिम पकड़ में आ सके। मामला सामने आने के बाद न केवल वासेपुर का खौफनाक अतीत ताजा हुआ है, बल्कि पुलिसिया समन्वय के अभाव और अंतर्राज्यीय अपराध नियंत्रण की कमजोर कड़ियां भी उजागर हुई हैं।

अंबिकापुर पुलिस को पकड़ में नहीं आने पर दी सूचना

डीआईजी सह एसएसपी सरगुजा राजेश अग्रवाल ने कहा कि, धनबाद की पुलिस टीम अंबिकापुर आई थी, उन्हें किसी वारंटी को गिरफ्तार करना था। टीम के सदस्य सरगुजा पुलिस को बगैर सूचना दिए वारंटी को पकड़ने गए थे। जब वारंटी पकड़ में नहीं आया तो पुलिस को सूचना दी गई। सरगुजा और धनबाद पुलिस टीम संयुक्त रूप से वारंटी को तलाशने का प्रयास की, लेकिन वह नहीं मिल पाया है।

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