रामानुजगंज। छत्तीसगढ़ की विशेष पिछड़ी जनजाति पण्डो समाज ने रामचंद्रपुर तहसील कार्यालय के सामने जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष उदय कुमार पण्डो के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामीणों ने तहसीलदार के माध्यम से राज्यपाल,मुख्यमंत्री और राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि तहसील कार्यालय के रीडर और कुछ अधिकारियों ने भूमाफियाओं के साथ मिलकर राजस्व अभिलेखों में फर्जी प्रविष्टियाँ की हैं। इसका उद्देश्य पण्डो समाज की ज़मीन पर अवैध कब्ज़ा करना और उन्हें उनके ही अधिकार से वंचित करना है।
संगठन ने बताया कि निखिल गुप्ता और राजेन्द्र गुप्ता नामक व्यक्तियों के साथ मिली भगत कर तहसील कार्यालय ने पण्डो जनजाति के सदस्यों को परहिया जाति बताकर दस्तावेज़ों में झूठी प्रविष्टियाँ दर्ज की हैं। यह न केवल सामाजिक न्याय का अपमान है,बल्कि कमिश्नर सरगुजा संभाग के उस आदेश की भी खुली अवहेलना है जिसमें पण्डो समाज की भूमि की बिक्री,रजिस्ट्री या गैर-आदिवासियों के नाम स्थानांतरण पर रोक लगाई गई थी। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि राजस्व अभिलेखों में की जा रही इस की हेराफेरी से भूमाफियाओं को सीधा लाभ पहुँचाया जा रहा है।
प्रदेश अध्यक्ष उदय पण्डो ने कहा कि यह सिर्फ़ ज़मीन की ही नहीं,अस्तित्व की लड़ाई है। सरकार और प्रशासन की मौन सहमति से गरीब,अ-शिक्षित और अनभिज्ञ पण्डो परिवारों की ज़मीन छीनी जा रही है। कमिश्नर के आदेशों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं और राजस्व तंत्र जनजातीय संरक्षण कानूनों का मखौल बना रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई नहीं की, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप लेगा राजभवन और मुख्यमंत्री निवास तक पदयात्रा की जाएगी।
संगठन ने आठ सूत्रीय मांगपत्र भी सौंपा है जिसमें दोषी भूमाफियाओं और तहसील कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज करने,पण्डो जाति को परहिया दर्शाने वाले सभी दस्तावेज़ निरस्त करने,सरकारी विभागों में भेदभाव करने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करने तथा पण्डो व अन्य विशेष पिछड़ी जनजातियों को काबिज कास्त भूमि का पट्टा देने की माँग शामिल है। साथ ही वन विभाग द्वारा गरीब जनजातीय परिवारों को जबरन घरों से बेदखल न करने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई।
प्रदेश सचिव देवचंद राम पण्डो ने कहा कि शासन–प्रशासन का यह व्यवहार केवल अन्याय नहीं,बल्कि सामाजिक अपराध है। उन्होंने कहा कि “हमारी जाति को मिटाने की साजिश चल रही है,पर अब हम चुप नहीं रहेंगे। हर गाँव से आवाज़ उठेगी और यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक न्याय नहीं मिलता।”
रामचंद्रपुर का यह आंदोलन अब जनाक्रोश का प्रतीक बन गया है। नारे लगाते ग्रामीणों की भीड़ में महिलाएं और युवा बड़ी संख्या में शामिल थे। “भूमाफिया–प्रशासन मुर्दाबाद” और “पण्डो की ज़मीन वापस करो” जैसे नारे पूरे इलाके में गूंजते रहे। अंत में,ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा गया और स्पष्ट चेतावनी दी गई कि अगर जल्द न्याय नहीं मिला,तो यह जनआंदोलन प्रशासन की नींव तक हिला देगा।

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