गिरिजा ठाकुर

मूसलाधार बारिश से नदी-नाले ऊफान पर, खेतों में लबालब भरा पानी

अंबिकापुर। सरगुजा संभाग में गुरुवार की शाम से हो रही मूसलाधार बारिश के कारण नदी-नाले ऊफान पर आ गए हैं। खेतों में पानी लबालब देखने को मिल रहा है। बलरामपुर जिले में मौसम कुछ ज्यादा ही प्रभावी है। मौसम विभाग के अनुसार गांगेय पश्चिम बंगाल एवं नजदीकी झारखंड के ऊपर निचले क्षोभमंडल में कम दबाव का एक ताकतवर चक्रवाती परिसंचरण बना है, इसका असर उत्तरी छत्तीसगढ़ में भी देखने को मिल रहा है।
मौसम वैज्ञानिक एसके मंडल ने बताया कि सरगुजा संभाग में पिछले दो दिनों तक मौसम प्रभावी रहेगा। बलरामपुर, सरगुजा व सूरजपुर जिले में रेड अलर्ट जारी किया गया है। उत्तरी छत्तीसगढ़ में काफी इंतजार के बाद हुए झमाझम बारिश हो रही है। गांगेय पश्चिम बंगाल व झारखंड में बने चक्रवती परिसंचरण के कारण गुरुवार की शाम से ही सरगुजा संभाग में झमाझम बारिश हो रही है। बलरामपुर जिले में चक्रवर्ती परिसंचरण का प्रभाव ज्यादा देखा जा रहा है। यहां गुरुवार को 154 मिमी बारिश दर्ज की गई है। अंबिकापुर में 54.5 मिमी वर्षा हुई है, जबकि शुक्रवार को 11.4 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। झमाझम बारिश के कारण औसत बारिश से पिछड़ा सरगुजा अब सामान्य स्थिति में पहुंच गया है। लंबे इंतजार के बाद मूसलाधार बारिश से किसानों के चेहरे पर मुस्कान लौट आई है। धान रोपाई का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। अगस्त के तीसरे सप्ताह तक रोपाई का कार्य पूर्ण होने की संभावना है।  
रामानुजगंज मार्ग में विशाल पेड़ के साथ तरंगित तार टूटकर गिरा


शुक्रवार की रात से हो रही झमाझम बारिश के बीच सरगुजा संभाग में कई जगह पेड़ों के गिरने से यातायात बाधित होने की स्थिति बनी, वहीं पेड़ों की चपेट में आने से बिजली के तरंगित तार टूट गए और खंभा क्षतिग्रस्त हो गया। अंबिकापुर-रामानुजगंज मार्ग में शनिवार की दोपहर रवि फ्यूल्स के सामने पेड़ गिरने से यातायात ठप हो गया। पेड़ की चपेट में आने से तरंगित तार टूटकर जमीन पर गिर गए। इससे पूरे क्षेत्र में बिजली बाधा की स्थिति बन गई। पेड़ को हटाने के लिए जेसीबी मंगाने की नौबत बन गई। दो घंटे से अधिक चली मशक्कत के बाद मौके से पेड़ के एक बड़े हिस्से को हटाने में सफलता मिल पाई, इसके बाद एक ओर से आवागमन शुरू हुआ। विद्युत व्यवस्था बहाल करने देर शाम तक कर्मचारी ताकत झोंके, इसके बाद विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित हो पाई।

रेलिंग विहीन बूढ़ा नदी का पुल जलमग्न हुआ, बाइक पार कर रहे युवक पड़े खतरे में  
घुटना से ऊपर बह रहे पानी के बीच खतरा झेलते शिविर स्थल तक पहुंचा स्वास्थ्य अमला

बलरामपुर जिले के शंकरगढ़ विकासखंड अंतर्गत कई गांव के लोग बारिश के मौसम में खतरे से भरा सफर करने विवश हैं। आलम यह है कि इन दिनों हो रही झमाझम बारिश के बाद बूढ़ा नदी से आवागमन की सुविधा के लिए बना पुल पूरी तरह से जलमग्न हो गया है। इस पुल से विकासखंड के ग्राम गम्हारडीह, भरतपुर, जोकापाट, बाड़ी चलगली, सीतारामपुर होते गांव के लोग बलरामपुर आना-जाना करते हैं। वर्तमान में हो रही झमाझम बारिश के बीच पुल के ऊपर से घुटना से ऊपर पानी का बहाव हो रहा है, ऐसे में इस पुल को पार करना खतरे से कम नहीं है। पुलिया के दोनों ओर रेलिंग भी नहीं बना है, जिससे लोग पुल के दायरे का अंदाजा लगा सकें। पानी का बहाव इतना तेज रहता है कि हाल में बाइक सवार दो युवक बमुश्किल नदी की सीमा को पार कर पाए। पैदल मोटरसाइकिल पार करते वक्त इन्हें अनियंत्रित होते देख गांव के लोग इनकी मदद के लिए दौड़े, जिससे बड़ा हादसा टल गया। क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि पुल से ऊपर से पानी का बहाव कमर तक पहुंच जाता है। इन परिस्थितियों के बीच जलमग्न पुल से होते बीते दिनों स्वास्थ्य विभाग शंकरगढ़ की टीम ग्राम भरतपुर में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पहुंची। नदी पार करने के बाद यहां के स्वास्थ्य केन्द्र की दूरी लगभग 4 किलोमीटर है, यहां तक इन्होंने पैदल सफर तय किया।    

जानकारी के मुताबिक राष्ट्रीय अंधत्व निवारण कार्यक्रम के अंतर्गत बलरामपुर जिला के आकांक्षी विकासखंड शंकरगढ़ में मोतियाबिंद मुक्त कार्यक्रम और संपूर्णता अभियान के अंतर्गत एक अगस्त को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भरतपुर में नेत्र एवं स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया था। गांव की ओर जाने वाले पुल के ऊपर से घुटना भर पानी के बहाव को देखते हुए इन्हें चारपहिया वाहनों को नदी के मुहाने पर ही छोड़ना पड़ा। इसके बाद ग्रामीणों के द्वारा बताए गए जलमग्न पुल के रास्ते से वे जैसे-तैसे भरतपुर गांव में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र तक पहुंचे। पुल के दोनों ओर रेलिंग नहीं होने और पानी के तेज बहाव के कारण नदी की गहराई में जाने का खतरा भी बना हुआ था। क्षेत्र के ग्रामीणों ने बताया कि बरसात के मौसम में अगर रात-बिरात किसी काम से बलरामपुर या शंकरगढ़ जाना हो तो उन्हें काफी दिक्कतों से जूझना पड़ता है। पुल के ऊपर पानी का तेज बहाव होने पर जान जोखिम में पड़ने की स्थिति बन सकती है। पानी के निरंतर बहाव के बीच कहीं पुल क्षतिग्रस्त हो जाए, तो इसका पता भी चल पाना मुश्किल है। पुल में रेलिंग के नहीं रहने से इसकी चैड़ाई का भी पता नहीं चल पाता है। वहीं पानी का तेज बहाव कब किस ओर उन्हें धकेल कर ले जाएगा, कह पाना मुश्किल है। ग्रामीणों ने बताया कि लगातार हो रही बारिश के बीच अभी पुल के ऊपर दो से ढाई फिट तक पानी का बहाव हो रहा है।  


आकाशीय बिजली गिरने से ग्रामीण का मकान क्षतिग्रस्त

बादलों की तेज गड़गड़ाहट के बीच हो रही मूसलाधार बारिश के दौरान बलरामपुर जिले के ग्राम मकरो निवासी संतोष नायक पिता बालकेश्वर के घर में वज्रपात हुआ, जिससे उसका मिट्टी से बना खपरैल मकान बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। बिजली गिरने से जन हानि तो नहीं हुई पर मकान की दीवारें टूट कर धराशाई हो गईं। मकान में रखा सारा सामान नष्ट हो गया। आकाशीय बिजली की मार से पीड़ित संतोष नायक को लाखों रुपये की क्षति हुई है। पीड़ित ने प्रशासन से मुआवजा राशि प्रदान करने की गुहार लगाई है।

मंगलवार की रात से ही रुक-रुक कर हो रही बारिश हो रही थी गुरुवार की शाम से मूसलाधार में परिवर्तित हो गई, जो बादलों की गड़गड़ाहट के साथ 24 घंटे से भी अधिक समय से जारी है। इस बारिश ने शुक्रवार को ओड़गी विकासखंड के चिकनी गांव में स्थित वेनिका हाइड्रो पावर प्लांट को अपनी चपेट में ले लिया। लगातार हो रही बारिश का पानी पावर प्लांट के पास स्थित महान नदी के ऊपर बिजली उत्पादन के लिए बनाए गए बांध का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है। इसके बाद प्लांट के कर्मचारियों ने बांध में 10 की संख्या में लगे हाइड्रोलिक गेटों को खोलने के लिए ऑटोमेटिक स्विच ऑन किया। बताया जा रहा है कि तकनीकी खराबी के कारण केवल एक गेट ही खुल सका है, नौ गेट अभी भी बंद हैं। इस कारण पानी ओवरफ्लो होकर बांध के ऊपर से बहते हुए प्लांट में भर गया है। गेट नहीं खुलने के कारण बांध के क्षतिग्रस्त होने का भी खतरा मंडराने लगा है। इससे संबंधित एक वीडियो भी इंटरनेट मीडिया में वायरल हो रहा है, जिसमें तेज गति के साथ बांध के ऊपर से निकल रहा पानी पॉवर प्लांट के अंदर जाते नजर आ रहा है। हालांकि अभी तक बांध से निकल रहे पानी के कारण बांध या पावर प्लांट को कोई नुकसान पहुंचने की खबर नहीं है। बता दें कि चिकनी गांव में मौजूद बांध के दूसरी तरफ बलहीपानी गांव की बसाहट है, जो चारों ओर से पहाड़ियों से घिरा हुआ है। इस गांव में दर्जनों परिवार निवास करते हैं। यहां के ग्रामीणों को मुख्यालय तक पहुंचने के लिए बांध के ऊपर बने मार्ग का ही उपयोग करना पड़ता है। इसके अलावा ग्रामीणों को मुख्यालय से जोड़ने के लिए अन्य कोई मार्ग नहीं है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण बांध के ऊपर से गुजर रहे पानी के तेज बहाव ने बलहीपानी के ग्रामीणों का मुख्यालय से संपर्क काट दिया है। इधर बारिश के पानी से बिगड़ी बांध की स्थिति को देखते हुए मौके पर पहुंची जिला प्रशासन व पुलिस की संयुक्त टीम ने बांध के डुबान क्षेत्र के आसपास मौजूद गांवों को खाली करा वहां के ग्रामीणों को ऊंचे स्थानों पर भेजने का काम शुरू कर दिया है, पर बलहीपानी के ग्रामीणों को अब तक डुबान क्षेत्र से बाहर नहीं निकाला जा सका है। क्योंकि बलहीपानी गांव तक पहुंचने के लिए एक मात्र रास्ता बांध के ऊपर से होकर गुजरता है और ओवरफ्लो होने के कारण बांध के ऊपर से लगातार तेज गति के साथ पानी का बहना जारी है। ऐसे में वहां के ग्रामीणों को डुबान क्षेत्र से निकालने में टीम को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। संभावित खतरे को देखते हुए मुनादी के माध्यम से भी ग्रामीणों या अन्य किसी को भी बांध की ओर न जाने की समझाइश दी जा रही है।्र बता दें कि ओड़गी विकासखंड के चिकनी स्थित पावर प्लांट से प्रतापपुर के खजूरी गांव में स्थित 33 केवी की क्षमता वाले सब स्टेशन को बिजली की सप्लाई दी जाती है। इसके अलावा जब पावर प्लांट में बिजली का उत्पादन ज्यादा होने लगता है तो बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर तक भी बिजली की सप्लाई दी जाती है। हालांकि अभी तक पावर प्लांट से प्रतापपुर को दी जा रही विद्युत सप्लाई बाधित नहीं हुई है। पॉवर प्लांट सही तरीके से काम कर रहा है।

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