अंबिकापुर। शिक्षा स्थायी समिति की बैठक जिला पंचायत उपाध्यक्ष आदित्येश्वर शरण सिंह देव एवं जिला शिक्षा अधिकारी की उपस्थिति में हुई, जिसमें युक्तिकरण के विषयों पर सदस्यों ने चर्चा करते हुए कलेक्टर सरगुजा को सुझाव दिया है कि दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों के कम संख्या वाले स्कूलों को बंद न किया जाए, उन्हें युक्तिकरण की प्रक्रिया से बाहर रखा जाए। साथ ही जहां पर कम दूरी पर हाई एवं हायर सेकेण्ड्री स्कूल बालक एवं बालिका अलग-अलग संचालित हैं और संख्या अच्छी है, उन्हें भी युक्तियुक्तिकरण की प्रक्रिया से बाहर रखा जाए।

साथ ही राज्य सरकार को भी शिक्षा स्थायी समिति के सभापति एवं सदस्यों ने सुझाव प्रेषित किया है जिसमें कहा गया है कि पहले प्राथमिक विद्यालयों में 60 बच्चों पर 1-2 का सेटअप था, जिसे अब 1-1 कर दिया गया है। सुझाव दिया गया है कि 40 बच्चों से नीचे की संख्या में सेटअप 1-1 रखा जाए, जबकि 40 बच्चों से ऊपर संख्या वाले स्कूलों में सेटअप 1-2 का रखें। कई बार ऐसा होता है एक शिक्षक के छुट्टी पर चले जाने, बैठकों में चले जाने अथवा किसी अन्य परिस्थिति मेंअनुपस्थित रहने की स्थिति में एक शिक्षक द्वारा इतने बच्चों को संभाल पाना मुश्किल होता है। इस पर विचार करके शिक्षा की गुणवत्ता को बनाए रखने शिक्षकों के सेटअप में सुझाव अनुसार सुधार करेंगे।

जिला पंचायत उपाध्यक्ष आदित्येश्वर शरण सिंह देव ने कहा कि मिडिल का सेटअप जो पूर्व में 105 बच्चों पर 1-4 का था उसे अब 1-3 करने को लेकर भी अपना सुझाव देते हुए कहा है कि मिडिल स्कूल में 6 विषय होते हैं, ऐसी परिस्थिति में देखा जाए तो विषयवार 6 शिक्षक होने चाहिए, तभी शिक्षा के गुणवत्ता की बात हम कर सकेंगे। ऐसा नहीं करने की स्थिति में पुराने सेटअप को वैसा ही रखा जाऐ। कम से कम मिडिल में 1-4 का सेटअप हो। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि पिछले बार सरकार जब युक्तिकरण की नीति लाई थी तो कई दूरस्थ क्षेत्र के स्कूल बंद कर दिए गए थे, जहां आज भी काफी समस्या है। दूसरे स्कूलों में बच्चों को भेजने को लेकर सरकार उन स्कूलों पर भी ध्यान दे। जो स्कूल खोले जा सकते हैं वहां पर फिर से खोला जाए। साथ ही नए मुहल्ले एवं पारों में भी आवश्यकता अनुसार नए प्राथमिक विद्यालय खोले जाने चाहिए।

 
नालंदा परिसर स्थापना को लेकर हुई चर्चा
इस दौरान अंबिकापुर में नालंदा परिसर स्थापना को लेकर भी चर्चा हुई। पूर्ववर्ती कांग्रेस के शासनकाल में तत्कालिन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव के मांग व पहल पर अंबिकापुर में रायपुर के तर्ज पर नालंदा परिसर खोलने की घोषणा की थी। वर्तमान सरकार ने इसके लिए नगर पालिक निगम अंबिकापुर को अधिकृत किया है। इस पर महापौर डॉ. अजय तिर्की ने अपना सुझाव देते हुए कहा था कि पीजी कॉलेज के समीप अधिकतर कोचिंग एवं अन्य शैक्षणिक संस्थान हैं, ऐसी स्थिति में पीजी कॉलेज के समीप अथवा उस कैम्पस में ही इसेे खोला जाना उचित रहेगा। इसका शिक्षा स्थायी समिति ने समर्थन किया है और जिले के युवाओं के हित में पीजी कॉलेज कैम्पस में नालंदा परिसर के स्थापना हेतु सहमति प्रदान की है।

 
बच्चों में डिप्रेशन एवं मानसिक असंतुलन पर चर्चा
बच्चों में बढ़ रहे डिप्रेशन एवं मानसिक असंतुलन जैसे समस्याओं को लेकर भी सदस्यों ने चर्चा की और कहा कि नई शिक्षा नीति में उम्मीद कार्यक्रम रखा गया है। इसके लिए विद्यालयों में एक समिति का गठन किया जाएगा। वहां पर बच्चे एवं शिक्षक अपनी समस्या रख सकेंगे। नई शिक्षा नीति के गाइडलाईन के तहत उम्मीद समिति का गठन कर सभी को इसकी नियमावली प्रदान करें तथा प्रत्येक प्राइवेट एवं सरकारी स्कूलों में इस समिति का गठन कर सुचारू रूप से क्रियान्वयन हो इसका शिक्षा विभाग पालन कराए। शिक्षा स्थायी समिति की बैठक में कई अन्य मुद्दों पर सदस्यों ने चर्चा की।

 
जिला प्रशासन के इस पहल की सराहना, दिए सुझाव
सरगुजा-30 के माध्यम से जिले के प्रतिभावान चयनित छात्र-छात्राओं को सप्ताह में दो दिन कराए जा रहे जिला प्रशासन द्वारा नीट एवं जेईई की तैयारी की शिक्षा स्थायी समिति के सदस्यों से सराहना की और सुझाव दिया है कि आदिवासी अंचल में कई प्रतिभाशाली छात्र-छात्राएंं हैं, जो नीट एवं जेईई की तैयारी करना चाहते हैं। जिला प्रशासन द्वारा जो कोचिंग कराई जा रही है, उसे ऑनलाइन करा दिया जाए, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों में बैठे वे छात्र जो सरगुजा-30 हेतु परीक्षा में बैठे थे लेकिन अंतिम 30 में उनका चयन नहीं हो पाया वे भी इसका लाभ ले सकें। कोरोना काल में ऑनलाइन माध्यम से बड़े विद्यालयों में पढ़ाने की व्यवस्था शिक्षा विभाग ने पूर्व में ही कर रखी है। इस सुविधा द्वारा इन बच्चों को इसका लाभ मिलेगा। साथ ही शिक्षा स्थायी समिति के द्वारा यह सुझाव भी दिया गया है कि पिछले दो-तीन वर्षों से जिला पंचायत के सदस्यों एवं शिक्षा विभाग के पहल पर बोर्ड की परीक्षा सम्पन्न होने के बाद जिले के प्रतिभावान छात्र-छात्राएंं जो नीट एवं जेईई की परीक्षा देना चाहते हैं उन्हें अंबिकापुर में दो महीने का नि:शुल्क कोचिंग शिक्षा विभाग के माध्यम से दिया जाता है। इसमें कोचिंग लिए कई बच्चों का इंजीनियरिंग एवं नीट दोनों के लिए चयन हुआ है, उसे इस वर्ष भी जारी रखा जाए। इसके लिए अभी से कार्ययोजना बना लिया जाए।

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