राजनीतिक विश्लेषक ने कहा-अपमानजनक कृत्य करने वाले कांग्रेसियों को मिले कठोर दंड

अंबिकापुर। आकाशवाणी चौक अंबिकापुर में स्थापित महान क्रांतिकारी चन्द्रशेखर आजाद की प्रतिमा का अनावरण गुरूवार को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के हाथों होना था, वहीं बुधवार की मध्य रात्रि में युवक कांग्रेस के लोगों ने ढंकी हुई प्रतिमा को बेपर्दा करके फूल-माला चढ़ा दिया। इसे लेकर राजनीतिक गर्माहट बढ़ गई है। निगम और भाजपा के द्वारा छपवाए गए आमंत्रण पत्र में देश की आजादी में अपना सर्वस्व बलिदान करने वाले चंद्रशेखर आजाद का नाम दूसरे नम्बर में होना सुर्खियों में है।

इन सबके बीच राजनीतिक विश्लेषक संतोष दास सरल ने क्रांतिकारी चन्द्रशेखर आजाद को अनावरण पूर्व बेपर्दा करने को घोर अपमान करार दिया है और कहा है कि इस घटना की जितनी भी निन्दा या भर्त्सना की जाए कम है। उन्होंने कहा है कि इस आपराधिक घटना में शामिल युवक कांग्रेसियों पर तत्काल स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के अपमान व शासकीय कार्य में बाधा सहित गंभीर धाराओं में अपराध दर्ज कर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। आगे अपने विश्लेषण में उन्होंने लेख किया है कि कांग्रेस का यह कुकृत्य दिल्ली में हुए इंटरनेशनल एआई सम्मिट में चोरी छिपे घुसकर विश्व समुदाय के सामने कपड़े उतारकर निर्लज्ज प्रदर्शन करने जैसा ही है, जिसने पूरे भारत का सिर शर्म से झुका दिया था। कांग्रेस ने इस देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले क्रांतिकारियों का सम्मान कभी नहीं किया। शहीद चंद्रशेखर आजाद की माता जगरानी देवी, कांग्रेस सरकार की उपेक्षा के कारण आजादी के समय 1947 के बाद के शुरुआती वर्षों में घोर गरीबी और अकेलेपन से जूझती रहीं। बेटे की शहादत वर्ष 1931 और पति की मृत्यु वर्ष 1938 के बाद, वह गुमनामी में जी रही थीं और मृत्यु वर्ष 1951 तक गांव में लकड़ियां बेचकर या मेहनत-मजदूरी कर अपना पेट पालती रही। कांग्रेस की देश के क्रान्तिकारियों व उनके परिजनों के प्रति नफरत की सोंच आज भी जीवित है, जिसने यह कुकृत्य उनसे कराया है। उन्होंने कहा है कि अंबिकापुर में महान क्रांतिकारी शहीद चन्द्रशेखर आजाद की प्रतिमा स्थापित करने की मांग आम जनता की ओर से लंबे समय से हो रही थी, लेकिन नगर पालिक निगम अंबिकापुर में लगातार दस वर्षों तक शासन करने के उपरांत भी कांग्रेस ने इसके लिए कभी प्रयास नहीं किया। बस स्टैंड में कांग्रेस नेता एमएस सिंहदेव की प्रतिमा स्थापित करना कांग्रेस के एजेंडे में रहा परंतु क्रांतिकारी चन्द्रशेखर आजाद उन्हें याद नहीं रहे? आज जब भाजपा की निगम सरकार ने शहीद चन्द्रशेखर आजाद की प्रतिमा स्थापित कर उसका अनावरण मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के हाथों कराने का कार्यक्रम रखा, तो ये कांग्रेस पार्टी को बर्दाश्त नहीं हुआ। बहरहाल, शहीद चन्द्रशेखर आजाद की प्रतिमा के साथ अपमानजनक कृत्य करने वाले देश विरोधी व देशभक्त क्रांतिकारी विरोधी कांग्रेसियों को इस संगीन अपराध के लिए कठोर से कठोर दंड दिया जाना चाहिए।

कांग्रेस ने कहा-स्वतंत्रता संग्राम के नायकों के प्रति भाजपाईयों की दुर्भावना सामने आई

जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बालकृष्ण पाठक ने स्वर्गीय पंडित रवि त्रिपाठी को उनके 16वीं पुण्यतिथि पर नमन करते हुए कहा है कि, वे जिस कद के राजनीतिक शख्सियत थे इससे भी बड़े सम्मान के हकदार हैं। आज वे जीवित होते तो वे निश्चित ही यह स्वीकार नहीं करते कि प्रतिमा अनावरण के कार्यक्रम के लिए भाजपा सरकार के द्वारा छपवाए गए आमंत्रण पत्र पर देश की स्वतंत्रता के लिए प्राण की आहुति देने वाले नायक, पंडित चंद्रशेखर आजाद का नाम दूसरे स्थान पर लिखा जाए। पंडित चंद्रशेखर आजाद, सरदार भगत सिंह युवाओं के प्रेरणा स्रोत हैं। भाजपा के द्वारा निर्धारित किया गया आज का कार्यक्रम उनकी गरिमा के विपरीत है, इससे युवाओं में रोष है। निश्चय ही यह कार्यक्रम फिर यह बतलाता है कि संघ परिवार और भाजपा के नजर में स्वतंत्रता आंदोलन के शहीदों और पुरोधाओं की क्या हैसियत है? कोई भी राष्ट्रवादी व्यक्ति कम से कम अमर शहीद पंडित चंद्रशेखर आजाद को इस प्रकार अपमानित नहीं करेगा। भाजपा ने जिस प्रकार पंडित चंद्रशेखर आजाद के प्रतिमा के अनावरण का कार्यक्रम निर्धारित किया है, उससे यह स्पष्ट होता है कि भाजपाई अगर गंगाजल से भी अपने अंत:करण को साफ करेंगे, उसके बावजूद वे स्वतंत्रता संग्राम के नायकों के प्रति अपनी दुर्भावना को नहीं छिपा पाएंगे।

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