उदयपुर विकासखंड में कोल परियोजना फेस-2 की शुरूआत के लिए छावनी बना इलाका

अंबिकापुर। सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड अंतर्गत परसा ईस्ट एवं केते बासेन कोल परियोजना फेस-2 के लिए पेड़ों की कटाई का विरोध एक बार फिर शुरू हो गया है। विरोध में लगे ग्रामीणों ने जंगल में रात से ही पहरा देना शुरू कर दिया था, लेकिन पुलिस ने विरोध करने वाले कई लोगों को हिरासत में ले लिया और उन्हें उदयपुर, लखनपुर, दरिमा सहित अन्य थाना में लाकर रखने की जानकारी मिल रही है। यहां लगभग 11 हजार पेड़ों की बलि देने के लिए पहरा लगाया गया है। सैकड़ों की संख्या में पुलिस बल की तैनाती से क्षेत्र में कोई आना-जाना नहीं कर सकता है। आंदोलन के नेता रामलाल और जय सिंह कुसरो सहित कई लोगों को पुलिस जंगल से उठाकर थाना ले गई है।

बता दें कि राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड को कोल ब्लॉक आबंटित किया गया है, अदानी कंपनी इसका संचालन कर रही है। वर्तमान में पेंड्रामार, घाटबर्रा के जंगल में पेड़ों की कटाई की जा रही है, इसके लिए प्रशासन ने पहले से ही तैयारी कर ली थी। ग्रामीणों को गुरुवार को ही पेड़ों की कटाई का अंदेशा हो गया था, जब सैकड़ों की संख्या में पुलिस बल उदयपुर थाना से कोल खदान की ओर रवाना हुए थे। शुक्रवार को सुबह करीब 8 बजे बड़े-बडे आरा से पेड़ों की कटाई शुरू हो गई और विरोध करने वालों को बसों में भरकर थाना के लिए रवाना किया गया। इसके पहले काफी विरोध का स्वर ग्रामीणों ने सामूहिक मुखर किया। पुलिस ने आंदोलन के नेतृत्व कर्ताओं को सबसे पहले अपने कस्टेडी में ले लिया था। गांव के लोगों के बीच पुलिस और प्रशासन के बने रूख को लेकर तनाव की स्थिति भी बन गई है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया गया। ग्रामीणों को प्रशासन की ओर से उन्हें पेड़ों की कटाई के बारे में पहले से नहीं बताया गया था, अब वे जंगल-जमीन और पर्यावरण की रक्षा के लिए लड़ रहे हैं।


शासन-प्रशासन से हटा विश्वास, निरपराधों को भूखे-प्यासे बैठाया थानों में  

सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष डॉ. अमृत सिंह मराबी ने अंबिकापुर में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि सरगुजा की पहचान जंगलों से है, इसका लगातार सफाया राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड को कोल ब्लॉक आबंटित करके किया जा रहा है। वन क्षेत्र में रहने वाले लोगों के हितों का लगातार हनन हो रहा है। वनों का सफाया करने के लिए ग्रामीण महिला-पुरूषों के साथ बच्चों को कैदी की भांति विभिन्न थानों में लाकर रखा गया है। महामहिम, मुख्यमंत्री, मंत्री जैसे पदों पर आदिवासी वर्ग का प्रभुत्व होने के बाद भी आदिवासियों के साथ अत्याचार हो रहा है। ऐसे में प्रतीत होता है कि प्रदेश में आदिवासी मुखिया बन जाने मात्र से आदिवासियों का हित नहीं हो सकता है।

उन्होंने आगे कहा कि उनके द्वारा उदयपुर के परसा ईस्ट एवं केते बासेन कोल परियोजना अंतर्गत फेस-2 में की जा रही वनों की कटाई के परिप्रेक्ष्य में वन विभाग के डीएफओ से आदेश की मांग की गई, लेकिन उन्हें फुर्सत नहीं है। केते बासेन, घाटबर्रा सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के महिला-पुरूष और बच्चों को गाड़ियों में ठूंसकर तारा, मैनपाट, सीतापुर, उदयपुर, लखनपुर, दरिमा सहित अन्य थाना में ले जाया गया है। जब सरगुजा पुलिस अधीक्षक योगेश पटेल से उन्होंने पूछा कि किस अपराध में इन्हें थाने में बैठाया गया है, तो उन्होंने कोई अपराध नहीं बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब इन्होंने कोई अपराध नहीं किया है, तो इन्हें थानों में भूखे-प्यासे क्यों और किसके इशारे पर बैठाकर रखा गया है। उन्होंने कहा कलेक्टर, एसपी, डीएफओ जो प्रशासन तंत्र के अहम अंग हैं, इनसे उम्मीद खत्म होने के बाद एक ही रास्ता शेष रह जाता है, अपने मूल अधिकार का हनन रोकने के लिए हथियार उठाना। डॉ. मराबी ने कहा कि आदिवासी समाज अपने ही जंगल-जमीन से जुड़ी जैव विविधता को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और जिम्मेदार उनके हित में काम करने के बजाए, उन पर जुल्म ढाने में लगे हैं। पत्रकारों से चर्चा के दौरान सर्व आदिवासी समाज के अनुक प्रताप सिंह टेकाम, तरूण भगत, आशीष कुसरो, बाल सिंह आंडिल्य, राम प्रकाश पोर्ते, कुंजबिहारी पैकरा, लखन मराबी, रघुवर सिंह सहित अन्य उपस्थित थे।

कोल ब्लॉक से जुड़े मुद्दों को लेकर पहुंचे ग्रामीणों से कलेक्टर-एसपी ने की मुलाकात

शुक्रवार को परसा केते बासेन कोल ब्लॉक से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर पहुंचे ग्रामीणों से कलेक्टर विलास भोसकर और एसपी योगेश पटेल ने दरिमा में मुलाकात की। अनुभाग उदयपुर के हरिहरपुर, फतेहपुर, साल्ही और घाटबर्रा गांव से आए ग्रामीणों ने परसा केते बासेन कोल ब्लॉक में भू अर्जन और मुआवजा के संबंध में अपनी बात कलेक्टर के समक्ष रखी। कलेक्टर ने उन्हें पूर्व में पुनर्वास एवं पुर्नव्यवस्थापन के संबंध में हुई बैठक की जानकारी दी, जिसमें ग्राम घाटबर्रा के ग्रामीण शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों के जो मुद्दे हैं, उनपर विस्तृत चर्चा की जाएगी। उन्होंने मंगलवार को बैठक करने की बात कही, जिसमें सभी विषयों का समावेश करते हुए समस्त नियमों और प्रावधानों, प्रशासनिक आदेश, ग्राम सभा सहित मुआवजा संबंधी समस्त जानकारी ग्रामीणों को दी जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि ग्रामीणों के हित में ही निर्णय लिए जा रहे हैं। कलेक्टर से मुलाकात और समझाइश के बाद ग्रामीणों ने सहमति जताई, इसके बाद सभी को बस से रवाना किया गया।

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