बिश्रामपुर। पीएमओ कार्यालय दिल्ली से अपनी खूबसूरती पर वाहवाही बटोरने वाले पर्यटन स्थल केनापारा में नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है। उचित देखरेख के अभाव में यहां की खूबसूरती जहां एक ओर दम तोड़ती नजर आ रही है वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक उपेक्षा की वजह से यहां आज वर्षों बाद भी बिजली की स्थायी कनेक्शन तक नहीं ली जा सकी है। केनापारा पर्यटन स्थल को एक बेहतर प्रोजेक्ट मानते हुए गतदिनों प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी अपने ट्विटर पर काफी प्रशंसा कर चुके हैं। गौरतलब है कि राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 43 किनारे एसईसीएल बिश्रामपुर क्षेत्र की अनुपयोगी पोखरी क्रमांक 6 को एसईसीएल प्रबंधन व जिला प्रशासन की पहल पर शासन के मंशानुरूप बेहतर तरीके से पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने करोड़ों रुपए खर्च किए गए हैं। मजे की बात तो यह है कि पर्यटन स्थल केनापारा तेलईकछार को एक प्रोजेक्ट मानते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी गतदिनों अपने ट्विटर एकांउट पर काफी प्रशंसा करते हुए यहां और भी विकास की उम्मीद जताई थी, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता की वजह से पर्यटन स्थल केनापारा इनदिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहाती नजर आ रही है। यहां पर पर्यटकों को बेहतर सुविधा न मिलने से पर्यटक खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। पीएमओ कार्यालय से हुई प्रशंसा केवल कागजी कार्रवाई तक सिमटती नजर आ रही है। यहां सबसे बड़ी समस्या यह है कि वर्षों बाद भी पर्यटन स्थल के जिम्मेदार लोगों ने अब तक स्थायी विद्युत कनेक्शन तक कराया जाना उचित नहीं समझा है, जिससे शासन को लाखों रुपए के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है। नेशनल हाईवे किनारे स्थित पर्यटन स्थल में आएदिन जिले व संभाग के आला अधिकारियों व नेताओं का आगमन होता रहता है बावजूद इसके किसी ने भी यहां व्याप्त समस्याओं की ओर ध्यान देना उचित नहीं समझा है। पर्यटन स्थल केनापारा का शुभारंभ यूं तो वर्ष 2019 से किया गया है लेकिन आज तक स्थायी विद्युत कनेक्शन की प्रक्रिया पूर्ण न करना विद्युत विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली पर भी बड़े सवाल खड़े कर रहे हैं। यहां की अनदेखी से ऐसा महसूस होता है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जिस सपने को अपने मन में रखकर पर्यटन स्थल केनापारा की प्रशंसा करते हुए एक बेहतर प्रोजेक्ट माना था, वह धरातल पर केवल कागजों में ही पूर्णरूप से सफल होती नजर आ रही है।

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