कहा-सम्मान की लड़ाई लड़ रहे, राजस्व संबंधित कामों पर पड़ा प्रभाव

अंबिकापुर। राजस्व पटवारी संघ, छत्तीसगढ़ के आव्हान पर लंबित मांगों को लेकर सरगुजा जिले के पटवारियों ने एक दिवसीय सांकेतिक धरना दिया। पटवारियों का कहना है कि वे वर्षों से वेतन विसंगति, पदोन्नति और सम्मान की लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन शासन द्वारा अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई। पटवारियों की हड़ताल से जिले भर में राजस्व से संबंधित कई काम प्रभावित हुए। इन्होंने कहा जहां एक ओर राजस्व निरीक्षकों से कमी पर सीमांकन का कार्य प्रभावित हो रहा है, वहीं शासन स्तर से पटवारियों को पदोन्नति का लाभ नहीं दिया जा रहा है।

पटवारियों की मुख्य मांगों में पदोन्नति और वेतन विसंगति दूर करना है। पटवारी संघ सरगुजा के जिला अध्यक्ष संतोष अग्रवाल ने बताया कि 2010 बैच के पटवारियों को 01-07-2025 की स्थिति में आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही कोष एवं लेखा सत्यापन में समस्या के साथ रिकवरी जैसे हालातों से जूझना पड़ रहा है। मांग की है कि वेतन संरचना के मूल सिद्धांत के अनुरूप ग्रेड पे में वृद्धि के अनुरूप बेसिक वेतन में बढ़ोतरी होनी चाहिए। पटवारियों के पदोन्नति की कोई समय सीमा निर्धारित नहीं है। संघ ने मांग की है कि राजस्व निरीक्षक के रिक्त पदों पर पदोन्नति वरिष्ठता के आधार पर दी जाए। राजस्व निरीक्षक के पद पर सीधी भर्ती बंद हो। इससे पटवारियों का भविष्य सुरक्षित होगा और उनके अनुभव का सही उपयोग हो सकेगा। पदोन्नति प्रक्रिया शुरू होने से कार्य प्रणाली में पारदर्शिता आएगी और मेहनत व लगन को सम्मान मिलेगा। संघ के जिला अध्यक्ष ने कहा कि, पटवारियों के पदोन्नति का एक समयसीमा निर्धारित किया जाना चाहिए। अगर शासन उनकी मांगों के प्रति गंभीर नहीं होती है तो, आगामी रूपरेखा के अनुरूप क्रमिक व अनिश्चितकालीन आंदोलन की राह पर वे जा सकते हैं।

आरआई की परीक्षा पास करने के बाद नहीं मिली पदोन्नति

हड़ताल में पहुंचे सेवानिवृत पटवारी दयाराम सिंह ने बताया कि, 1988 में उनकी नियुक्ति पटवारी के पद हुई थी, और पे पटवारी के पद पर सेवा देते सेवानिवृत हो गए, जबकि उन्हें कम से कम नायब तहसीलदार बनकर सेवानिवृत होना था। उन्होंने बताया कि वर्ष 1999 में उन्होंने राजस्व निरीक्षक के लिए होने वाली परीक्षा भी उत्तीर्ण कर ली थी, लेकिन उन्हें पदोन्नति का लाभ शासन स्तर पर नहीं मिल पाया।

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