मामला मरीज के जीवन को संकट में डालने और स्वजन से अपमानजनक व्यवहार का
अंबिकापुर। गांधीनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत सांई मंदिर के पास स्थित महावीर अस्पताल में डेंगू पीड़िता के स्वजन से दुर्व्यवहार करते हुए बेड प्रदान नहीं करने, और इलाज से इन्कार करने के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के निर्देश पर पुलिस ने डॉ. सुधांशु किरण, एमडी मेडिसिन के विरूद्ध अपराध दर्ज कर लिया है। अस्पताल में पुत्री को लाने के बाद इलाज के बजाय उसके जीवन को संकट में डालने और अपमानजनक व्यवहार की जानकारी पुलिस सहित जिले के प्रमुख अधिकारियों को मरीज के पिता ने दी थी, लेकिन किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं किए जाने से क्षुब्ध होकर उन्होंनेे न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया, जिस पर न्यायालय ने 156(3) दं.प्र.सं. के तहत आवेदन को स्वीकृत कर जांच पश्चात अपराध कायम करने निर्देशित किया था।


न्यायालय में दायर किए गए परिवाद में अधिवक्ता नीरज वर्मा पिता स्व. आरआर वर्मा निवासी मेयर कॉलोनी साई मंदिर रोड ने बताया था कि उनकी पुत्री गंभीर रुप से अस्वस्थ थी, जिसका डॉ. टेकाम के नवापारा में स्थित क्लीनिक में 5 सितम्बर 2023 को उन्होंने चेकअप व उपचार के साथ ब्लड जांच कराया। रिपोर्ट आने पर रक्ताल्पता के साथ डेंगू के लक्षण पाए गए। स्वास्थ्य में सुधार नहीं होने पर वे अपनी पुत्री को घर के नजदीक स्थित महावीर अस्पताल 7 सितम्बर 2023 को ले गए। यहां ओपीडी शुल्क 300 रुपये जमा कराने पर उनकी पुत्री को केज्युल्टी रूम में ले गए। ड्यूटीरत डॉक्टर ने जंच उपरांत दवा हेतु पर्ची दी, और अस्पताल के मेडिकल स्टोर से दवा लाने कहा। साथ ही रिसेप्शनिष्ट कांउटर में भर्ती हेतु तीन हजार रुपये तथा पैथालॉजिकल परीक्षण हेतु ब्लड सैंपल लेकर शुल्क जमा कराया गया। केज्युल्टी में ड्यूटीरत डॉक्टर ने जांचोपरांत बताया कि मरीज की स्थिति गंभीर है। मरीज को टायफायड एवं डेंगू है, जिस कारण उसका प्लेटलेट्स एवं रक्त बिल्कुल निम्नतम स्तर पर आ गया है। मरीज को दो यूनिट प्लेटलेट्स एवं 2 यूनिट होल ब्लड देना आवश्यक है। केज्युल्टी कक्ष में ही उनकी पुत्री को इंजेक्शन एवं स्लाइन चढ़ाया गया। यहां मात्र दो बेड थे जो फुल थे, अन्य मरीजों का आना-जाना लगा था। ड्यूटीरत डॉक्टर ने जनरल वार्ड का बेड नम्बर 12 खाली होने पर उसमें मरीज को शिफ्ट करने कहा। अन्य नए मरीजों के आने पर उनकी पुत्री को जनरल वार्ड ले गए और स्लाइन लगे हाल में कुर्सी में बैठा दिया। लगभग 2 घंटे तक बेड की व्यवस्था नहीं होने पर उन्होंने नर्सिंग स्टाफ से मरीज को बेड उपलब्ध कराने का आग्रह किया, साथ ही व्यवस्था नहीं होने पर मरीज के लिए जमीन पर बिस्तर लगवा देने का आग्रह किया, ताकि मरीज को पीड़ा न हो। आरोप है कि यह बात अस्पताल प्रबंधन को नागवार गुजरी और आवेश में आकर दुर्व्यवहार करते हुए इसका इलाज मेरे अस्पताल में नहीं किया जाएगा, कहते हुए नर्सिंग स्टाफ को तत्काल मरीज को हटाने के लिए कहा गया। चिकित्सक के दुर्व्यवहार से अधिवक्ता के साथ गई पत्नी स्मिता वर्मा व शैलेन्द्र वर्मा हतप्रभ रह गए। इलाज के लिए काफी विनय करने के बाद भी इनकी हठधर्मिता दूर नहीं हुई और मरीज के साथ उन्हें भगा दिया गया। यदि चिकित्सालय में मरीज का इलाज संभव नहीं था तो संपूर्ण फाइल एवं रिपोर्ट के साथ मरीज को अन्य सुविधा केन्द्र में रिफर नियमानुसार करना था, लेकिन मरीज के जान की परवाह किए बगैर निर्दयता पूर्वक उसे अस्पताल से निकाल दिया गया। अस्पताल के जिम्मेदार चिकित्सक का यह कृत्य छत्तीसगढ़ राज्य उपचर्यागृह तथा रोगोपचार संबंधी स्थापन अनुज्ञापन नियम 2013 के प्रतिकूल मानते हुए अधिवक्ता ने परिवाद न्यायालय में पेश करके अपनी पीड़ा से अवगत कराया था, जिस पर न्यायालय के निर्देश पर पुलिस ने डॉ. सुधांशु किरण, एमडी मेडिसिन के विरूद्ध धारा 270, 294 के तहत केस पंजीबद्ध किया है।

असहनीय पीड़ा के बाद भी नहीं दिखाई मानवता
अधिवक्ता नीरज वर्मा ने मरीज को भर्ती करने से इन्कार कर देने की स्थिति में जमा की गई राशि, प्रिसक्रिप्सन स्लिप एवं खरीदे गए मेडिसिन की मांग की तो डॉ. सुधांशु किरण चिकित्सीय फाइल को अपने चेम्बर में ले गई और फाइल देने, इलाज के लिए जमा राशि वापस करने व खरीदी गई दवा देने से मना कर दी। उनकी पत्नी स्मिता वर्मा ने अन्य अस्पताल में इलाज करवाने के लिए अब तक किए गए उपचार की फोटो कॉपी की प्रति देने का आग्रह किया तो प्रिसक्रिप्सन स्लिप का मोबाइल से फोटो खींचने कहा गया। हैरत की बात यह है कि मरीज की गंभीर स्थिति बताने व प्लेटलेट्स दो यूनिट उपलब्ध कराने के बाद मरीज का उपचार नहीं किया गया, लगाई गई स्लाइन को निकाल दिया गया। मरीज बगैर इलाज के घंटों असहनीय पीड़ा एवं कष्ट सहती रही।

व्यवसायिक नैतिकता को रखा ताक पर
छत्तीसगढ़ राजपत्र असाधारण दिनांक 20.08.2013 में प्रकाशित चिकित्सीय नियम में वर्णित किया गया है कि भर्ती तथा उपचार दौरान, डिस्चार्ज के पश्चात मरीज के क्लिनिकल रिकार्डों की जानकारी तथा डिस्चार्ज के समय डिस्चार्ज सारांश, जिसमें भर्ती, डिस्चार्ज की तारीख, निदान, किया गया इलाज, ऑपरेशन, परीक्षण और अनुवर्ती कार्रवाई की जानकारी देना वांछनीय है, बाबजूद डॉ. सुधांशु किरण ने मरीज के स्वजन को उपरोक्त जानकारी से संबंधित फाइल एवं रिपोर्ट नहीं दी, जो इनके व्यवसायिक नैतिकता के विरुद्ध है।

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