आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका संघ ने ारना, सभा करके हल्ला बोला, कहा-मानदेय 18 हजार दे डबल इंजन की सरकार
अंबिकापुर। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका संघ के संयुक्त मंच ने शहर के कलेक्टोरेट ब्रांच, स्टेट बैंक के सामने आमसभा, धरना करके मैदानी स्तर पर काम के दौरान आने वाली विभागीय दिक्कतों की ओर ध्यानाकर्षण के साथ नौ सूत्रीय मांगों से आगाह कराया है और इसे बजट सत्र में पूरा करने का आग्रह किया गया है। इनके द्वारा 5 हजार रुपये की जगह 18 हजार रुपये मानदेय देने की गुहार लगाई गई है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संघ की जिलाध्यक्ष अनुपा कुशवाहा ने कहा कि कहा है कि देशभर में 27 लाख और छत्तीसगढ़ की 01 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाएं, आईसीडीएस का संचालन 50 वर्ष से होने के बाद भी मौलिक और बुनियादी सुविधाओं से वंचित हंै। भारतीय जनता पार्टी की डबल इंजन सरकार बनने के बाद इन्होंने उम्मीद जताई है कि मार्च 2025 के बजट में प्रावधान करते हुए उनकी समस्याओं के निराकरण की पहल की जाएगी। महिला एवं बाल विकास विभाग की केन्द्रीय मंत्री व छत्तीसगढ़ प्रदेश की मंत्री के नाम सरगुजा कलेक्टर के माध्यम से सौंपे गए ज्ञापन में उल्लेख है कि टीएचआर की वर्तमान विभागीय व्यवस्था के अनुसार हितग्राही का आधार और मोबाइल में ओटीपी लेने के लिए कहा गया है। ओटीपी लेने के बाद ही टीएचआर प्रदान किया जाना है, इसमें कई प्रकाश की व्यवहारिक दिक्कतों से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को जूझना पड़ रहा है। उक्त व्यवस्था के अनुसार हर माह एक ही आदमी टीएचआर लेने आ सकता है, घर का दूसरे सदस्य को टीएचआर नहीं मिलेगा। कई हितग्राही इन दिनों चल रहे साइबर अपराधों की बढ़ते अपराध के कारण ओटीपी बताने से साफ इन्कार कर दे रहे हैं, इससे हितग्राहियों की संख्या कम होना लाजिमी है। कई ऐसे भी हितग्राही हैं जिनके पास या तो मोबाइल नहीं है या फिर उनके घर में एक ही मोबाइल फोन है, जिसे उनके पति या बच्चे ले जाते हैं, ऐसी स्थिति में टीएचआर वितरण प्रभावित हो रहा है। कई स्थानों में सर्वर, नेट की समस्या भी आड़े आ रही है। कार्यकर्ताओं को जो मोबाइल प्रदान किया गया है, उसमें यह कार्य संभव नहीं है, इसके लिए कम से पांच जीबी के मोबाइल की आवश्यकता है। सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को अभी भी मोबाइल प्राप्त नहीं हुआ है। आदिवासी वनांचल क्षेत्र में अधिकांश विशेष पिछड़ी जनजाति, पहाड़ी कोरवा परिवारों के पास मोबाइल ही नहीं है, ऐसे में विभाग के द्वारा दी जाने वाली सेवा, सुविधा प्रभावित हो रही है। पोषण ट्रैकर पर एफआरएस फोटो कैप्चर से पोषण आहार वितरण में भी कई परेशानी आ रही है, मैदानी क्षेत्र में यह संभव नहीं है, ऐसे में टीएचआर का वितरण कार्य पूर्व की भांति ऑफलाइन कराने का सुझाव दिया गया है, वहीं मोबाइल रिचार्ज के लिए प्रति माह 500 रुपये स्वीकृत करने का आग्रह किया गया है। संघ की ओर से यह भी सुझाव दिया गया है कि टीएचआर वितरण का कार्य किसी अन्य संस्था, एजेंसी अथवा जहां से सामान उठाया जाता है, उसके माध्यम से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के सहयोग से कराया जाना चाहिए। सभा में सैकड़ों की संख्या में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका शामिल हुई।
मानदेय में कटौती अनुचित
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका संघ की जिलाध्यक्ष अनुपा कुशवाहा ने बताया कि पोषण ट्रैकर उनके लिए गले की हड्डी बन गया है। तमाम व्यवहारिक समस्याएं मैदानी स्तर में आने के कारण टीएचआर का वितरण सही समय और सही मात्रा में नहीं हो पाने का हवाला देकर मानदेय कटौती की बात भी संघ के संज्ञान में आ रही है। अल्प मानसेवी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को हो रही दिक्कतों की परवाह किए बिना छोटी-छोटी बातों पर मानदेय की कटौती को संघ की जिलाध्यक्ष ने अव्यवहारिक और न्यायसंगत नहीं बताया है।

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