अम्बिकापुर। पर्यटन और संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल का NHM कर्मियों की हड़ताल को लेकर बयान सामने आया है। जिसमे उन्होंने कहा कि अनिश्चितकालीन हड़ताल कर रहे NHM कर्मियों की अधिकांश जायज मांगें सरकार ने मान ली है। 10 में से 6 मांगें मानी गई है। हड़ताली NHM कर्मियों को काम पर लौटने का अल्टीमेटम दिया गया है। स्वास्थ्य मंत्री ने भी कहा है कि यदि वे काम पर नहीं लौटते हैं तो दूसरी भर्ती की जाएगी।

इधर हड़ताली NHM कर्मियों ने बुधवार को जल सत्याग्रह किया। नियमितीकरण समेत 10 सूत्रीय मांगों को लेकर NHM कर्मी 23 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। बुधवार को NHM कर्मियों ने शंकरघाट में जल सत्याग्रह किया और अपनी मांगों को पूरा करने की अपील की। मंगलवार को NHM कर्मियों ने चुनरी यात्रा निकाल महामाया मंदिर में पूजा अर्चना की और सरकार की सद्बुद्धि के लिए पूजा-अर्चना करते हुए दीप जलाए।

मंत्री बोले- नहीं लौटे तो नई भर्ती
सरगुजा प्रवास पर आए वित्तमंत्री ओपी चौधरी ने NHM कर्मियों के आंदोलन को लेकर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। वहीं पर्यटन और संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि NHM कर्मियों की 10 मांगों में से 5-6 मांगें पूरी करने की स्थिति है। दो से तीन ऐसी मांगें हैं जो टेक्निकल रूप से पूरा कर पाना संभव नहीं है, लेकिन वे सरकार का पक्ष नहीं मान रहे हैं।

राजेश अग्रवाल ने कहा कि उन्हें काम पर लौटने के लिए कहा गया है। सरकार ने अल्टीमेट दे दिया है। NHM कर्मियों का कार्य आम जनता से जुड़ा है। स्वास्थ्य मंत्री ने भी स्पष्ट कहा है कि सभी कर्मी काम पर लौटें, अन्यथा सरकार नई भर्ती कर नए लोगों को मौका देगी।

NHM कर्मियों ने किया जल सत्याग्रह


23 दिनों से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे NHM कर्मियों ने बुधवार को शंकरघाट में जल सत्याग्रह किया और अपनी मांगें पूरी करने की मांग की। सरगुजा जिले के 500 से अधिक कर्मियों ने सामूहिक इस्तीफा सीएमएचओ को सौंप दिया है।

NHM कर्मचारी संघ की अध्यक्ष शिल्पी राय ने कहा कि सभी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। सरकार उनकी प्रमुख मांगों को मानने तैयार नहीं है। जिन मांगों को मानना बताया जा रहा है, लेकिन लिखित में कोई भी आश्वासन देने सरकार तैयार नहीं है।

इधर NHM कर्मियों के हड़ताल के कारण सरगुजा में मेडिकल कॉलेज सहित सीएचसी और पीएचसी में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से ध्वस्त हो गई हैं। NHM के डॉक्टर, नर्स और टेक्नीशियनों के हड़ताल पर रहने का सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है।

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