अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर मेंड्राकला में स्थित सैनिक स्कूल में ऐतिहासिक टी-55 टैंक को स्थापित किया गया है, जिसने लगभग साढ़े चार दशकों तक सेवा दी। मुख्य अतिथि विधायक राजेश अग्रवाल ने सैनिक स्कूल के उप प्राचार्य लेफ्टिनेंट कर्नल (डॉ) पी श्रीनिवास तथा स्कूल स्टाफ की उपस्थिति में इसका उद्घाटन किया। मुख्य अतिथि के आगमन पर 2 घुड़सवार कैडेटों ने उनकी अगवानी की। मुख्य अतिथि ने विद्यालय के मुख्य द्वार पर स्थापित सेना के युद्धक टैंक टी-55 का उद्घाटन किया। इसके बाद विधायक ‘मनोज कुमार पाण्डेय’ प्रशासनिक भवन पहुंचे। यहां उन्होंने परम वीर चक्र विजेता कैप्टन मनोज कुमार पाण्डेय की प्रतिमा का अनावरण किया। शैक्षणिक भवन में उन्होंने परम वीर चक्र विजेता कैप्टन विक्रम बत्रा की प्रतिमा का भी अनावरण किया। 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान असाधारण शौर्य और वीरता का प्रदर्शन करने के कारण दोनों युवा सेनाधिकारियों को मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च सैन्य पुरस्कार परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था। मेण्ड्राकला स्थित सैनिक स्कूल भवन के प्रशासनिक एवं शैक्षणिक भवन का नाम इन्हीं अमर शहीदों के नाम पर कैप्टन मनोज पाण्डेय ब्लॉक तथा कैप्टन विक्रम बत्रा ब्लॉक रखा गया है।
विधायक राजेश अग्रवाल ने स्कूल की किसी भी समस्या के लिए हरसंभव सहयोग एवं सहायता की बात कही। उन्होंने कहा कि टी-55 युद्धक टैंक तथा शहीद सेनाधिकारियों की प्रतिमाएं स्कूल के कैडेटों को सेना में अधिकारी बनने तथा आम जनता को देशभक्ति के लिए सदैव प्रेरित करती रहेगी।
उन्होंने स्कूल के उप एवं प्रभारी प्राचार्य लेफ्टिनेंट कर्नल (डॉ) पी श्रीनिवास, सभी अध्यापकों एवं समस्त कर्मचारी तथा अभिभावकों को बधाई दी। कार्यक्रम का संपूर्ण प्रभार स्कूल के शिक्षक शिवेश राय, घुड़सवार दस्ते का निर्देशन मनोज कुमार त्रिपाठी, गार्ड ऑफ ऑनर का संचालन हवलदार हरदीप सिंह और एनसीसी स्टाफ तथा मंच संचालन का उत्तरदायित्व रविंद्र तिवारी ने संभाला। कार्यक्रम में विधायक द्वारा पिछले वर्ष के केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड मेें 10वीं कक्षा के प्रदर्शन के आधार पर 3 कैडेटों हर्ष कुमार, मिथिलेश कुमार और देवांशु साहू को पुरस्कृत किया। पिछले वर्ष की शैक्षिक उपलब्धियों और कार्यकुशलता के आधार पर सर्वश्रेष्ठ शिक्षक का पुरस्कार स्कूल के पुस्तकालय अध्यक्ष आनंद कुमार त्रिपाठी को तथा छात्रावास में समर्पित सेवाओं के लिए सोहन सामान्य कर्मचारी को भी पुरस्कृत किया गया।
ऐतिहासिक युद्धक टैंकों में एक टी-55
टी-55 युद्धक टैंक भारतीय सेना की गौरवशाली सैन्य परंपरा और वीरता का प्रतीक है। यह टैंक भारतीय सेना के सबसे भरोसेमंद और ऐतिहासिक युद्धक टैंकों में से एक है। इसे पहली बार 1958 में सोवियत संघ द्वारा विकसित किया गया। यह टैंक अपनी मजबूती, युद्ध की क्षमता और तकनीकी विशेषताओं के कारण दुनिया भर में मशहूर है। भारतीय सेना में टी-55 टैंक ने इसके बाद इसे नए और आधुनिक टैंकों से बदल दिया गया। इसका सैनिक स्कूल में स्थापित होना छत्तीसगढ़ और अंबिकापुर के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
छात्रों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत होगा टैंक
टी-55 टैंक ने 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्धों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में टी-55 टैंक ने भारतीय सेना को विजय दिलाने में अहम योगदान दिया। इस टैंक ने दुश्मन की पंक्तियों को तोड़ते हुए अपनी ताकत और तकनीकी श्रेष्ठता को साबित किया। सैनिक स्कूल अंबिकापुर में टैंक की स्थापना का मुख्य उद्देश्य छात्रों को भारतीय सेना की गौरवशाली परंपराओं से परिचित कराना और भारतीय सेना के प्रति गर्व का अनुभव कराना है। छात्रों और स्थानीय युवाओं में देशभक्ति और सैन्य सेवाओं के प्रति आकर्षण बढ़ेगा। टैंक के माध्यम से छात्रों को सैन्य तकनीक, युद्ध रणनीति और इतिहास की जानकारी मिलेगी। यह टैंक छात्रों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत साबित होगा, जो भविष्य में भारतीय सेना में शामिल होकर देश की सेवा करना चाहते हैं।

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