कई युवाओं का भविष्य लग रहा दांव पर, पीड़ितों का जबड़ा कई भागों में टूटकर बिखरा
अंबिकापुर। सरगुजा के राजमाता श्रीमति देवेन्द्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय संबद्ध जिला रघुनाथ अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में सामान्य सा चल रहे ऑपरेशन के बीच मुंह के कैंसर से पीड़ित एक महिला की शल्यक्रिया की गई। सर्जन उस समय चौंक गए, जब उन्होंने महिला के जबड़े की हड्डियों को छूते ही देखा कि वे इतनी भंगुर थीं कि बिना जोर लगाए टूट रही थीं। कैंसर की शल्यक्रिया में यह असामान्यता दुर्लभ थी। जब मरीज के आदत के बारे में जानकारी ली गई, तो पता चला कि वह 15 वर्षों से तम्बाकू का नियमित सेवन कर रही थी।
सड़क हादसे में घायलों के सिर में चोट नहीं आने के बाद भी जबड़े की हड्डी कई भागों में टूटने और टुकड़ों में झड़ने को लेकर शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध अस्पताल का ईएनटी विभाग गंभीर है, इसका मुख्य कारण गुटखा, तम्बाकू जैसे निकोटिन युक्त पदार्थ को माना जा रहा है। विशषज्ञ चिकित्सकों का कहना है कि तम्बाकू युक्त पदार्थों के रेपर में वैधानिक चेतावनी, स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होने का उल्लेख होने के बाद भी लोग इसका सेवन बड़े चाव से करते हैं। चिकित्सक कहते हैं, ऐसे पदार्थों का सेवन करने वालों को ऑपरेशन के लिए बेहोश करने दवा का भी ज्यादा डोज देना पड़ता है। अस्पताल के नाक, कान, गला विभाग में यह कोई पहला मामला सामने नहीं आया है। जनवरी से जुलाई 2025 तक 63 जबड़े के फ्रैक्चर वाले मामलों का इलाज किया गया, इनमें से 48 मरीज ऐसे थे, जिनकी उम्र 15 से 40 वर्ष के बीच है। सभी में तम्बाकू, गुटखा सेवन की आदत मिली। अधिकतर मरीज मामूली सी दुर्घटना में बाइक से गिरकर या हल्का सा मुक्का लगने की बात बता रहे हैं, लेकिन फ्रैक्चर की गंभीरता इतनी अधिक है, जैसे किसी ऊंचाई से गिरकर जबड़ा टूटा हो। ऐसे केसों का अध्ययन करने पर नाक, कान व गला विभाग के वरिष्ठ चिकित्सकों ने पाया कि दुर्घटना में घायल को सिर में किसी प्रकार की चोट नहीं आई, लेकिन 48 घायलों के जबड़े की हड्डी 3-4 जगह टुकड़ों में न सिर्फ बंट गई है, बल्कि जबड़े के मजबूत हिस्से की हड्डी तक टुकड़ों में विभक्त हो गई है। इनका मानना है कि आमतौर पर जबड़े की हड्डी सड़क हादसे या अन्य परिस्थितियों में एक-दो जगह से विभक्त होती है, बड़े हादसे में ही ऐसे हालात बनते हैं। किशोर और युवावस्था में जबड़े की हड्डियों का ऐसा स्वरूप लेना गंभीर मसला है। इसेे चिकित्सक असामान्य मान रहे हैं। विभाग के चिकित्सकों का मानना है कि गुटका, तम्बाकू युक्त पदार्थों के सेवन जैसे 40 प्रतिशत केस में कैल्सियम का अभाव और खून का संचार अवरूद्ध होना सामने आता है। हड्डी को कमजोर करने का यह बड़ा कारक है, और मामूली चोट की स्थिति में जबड़े की हड्डी टूट जाती है।
बयान
तम्बाकू और गुटखा शरीर में हड्डियों की संरचना को धीरे-धीरे नष्ट करते हैं। जबड़े की हड्डी पर इसका असर सबसे पहले दिखाई देता है, क्योंकि वहीं यह पदार्थ चबाया और रखा जाता है। तम्बाकू का उपभोग करने वालों में हड्डी के टूटने की संभावना 2-3 गुना अधिक होती है।
डॉ. अरुणेश सिंह, प्रोफेसर
विभागाध्यक्ष हड्डी रोग विभाग
बयान
उपचारित 63 में से 48 मरीजों में जबड़े की हड्डी में दो से अधिक फ्रैक्चर पाए गए। सरगुजा जिले में 40 प्रतिशत से अधिक आबादी किसी न किसी रूप में तम्बाकू या गुटखा का सेवन करती है। तंबाकू या गुटखा वैधानिक रूप से प्रतिबंधित वस्तुएं हैं, जिसका सेवन करने वाले की पीड़ा दायक मौत होती है। बिना चेतावनी के तंबाकू युक्त पदार्थ बेचने पर 5 वर्ष जेल की सजा की सजा व एक लाख जुर्माना का प्रावधान कोटपा एक्ट 2003 व जूविनाइल प्रोडक्शन एक्ट 2005 के तहत भारतीय न्याय अधिनियम में किया गया है।
डॉ. शैलेन्द्र गुप्ता, नोडल अधिकारी
राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम, सरगुजा

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