अंबिकापुर। विवाह के मौके पर आमंत्रण पत्र हर कोई छपवाता है, लेकिन ये आमंत्रण पत्र अधिकतर प्रिंटिंग प्रेस में बने बनाए फार्मेट पर वर-वधु, संबंधियों का नाम-पता बदलकर परोस दिए जाते हैं। कुछ ही लोग होंगे जो आमंत्रण पत्र छपवाते समय बने-बनाए फॅार्मेट से दूर बदलाव की सोच रखते होंगे, लेकिन सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज ने अपनी बिटिया शारदा सिंह की शादी के लिए संस्कृत व स्थानीय सरगुजिहा बोली में आमंत्रण पत्र छपवाया है। पहली बार विवाह का ऐसा कार्ड लोगों को देखने को मिल रहा है। सरगुजा व जशपुर अंचल की बोली विशेष के साथ छपवाया गया यह आमंत्रण पत्र इन दिनों इंटरनेट मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
ईस्ट, मित्रों को जिस तरह सरगुजिहा शैली में विवाह के संबंध में जानकारी दी गई है, उससे आमंत्रण पत्र आकर्षक लग रहा है। सांसद चिंतामणि महाराज का मानना है कि सरगुजिहा संस्कृति और परंपरा को जीवित रखने बिटिया के विवाह का आमंत्रण पत्र सरगुजिहा बोली में ही उन्होंने छपवाया है, ताकि नहीं पीढ़ी के लोग सरगुजिहा शब्दों को भी जान सकें और बोली की परंपरा को जीवित रख सकंे। सरगुजिहा बोली में छपे आमंत्रण पत्र में कुछ शब्दों ने लोगों को बेहद आकर्षित किया है, जो सरगुजिहा बोली में रचे-बसे हैं। दिन दुवार, विहा संस्कार, ताक तिहा, देक ताक, नेवथार जैसे शब्द लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहे हंै। 16 अप्रैल को विवाह का मंडप है, जिसे मड़वा, 17 अप्रैल को हल्दी है इसे हरदी, 18 अप्रैल को देव पूजा, मातृका पूजा की तिथि निर्धारित है, इसे बरात आही आउ बिहा लगन जैसे शब्द लिखे गए हैं। आमतौर पर विवाह के कार्यक्रम अंकित करने से पहले आमंत्रण पत्रों में संस्कृत में मंत्र लिखे जाते हैं किंतु सरगुजिहा आमंत्रण पत्र में संत गहिरा गुरु को नमन करते हुए लिखा गया है कि मड़वा गाड़े हों मोर अंगने, हे..गनेश देवता आए। कारज मोर सुफल होए, बिपेत ले मोला बचाए।

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