नेशनल लोक अदालत में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय व सीतापुर न्यायालय के 3700 से अधिक व राजस्व न्यायालयों के 4200 से अधिक लंबित प्रकरणों का निपटारा

अंबिकापुर। राष्ट्र विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली तथा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर छत्तीसगढ़ के निर्देशानुसार प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सरगुजा अंबिकापुर के मार्गदर्शन में 14 मार्च को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय अंबिकापुर अंतर्गत के सभी न्यायालयों में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस दौरान प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय एवं सीतापुर न्यायालय में 3700 से अधिक लंबित प्रकरणों का निराकरण किया गया। इसी प्रकार राजस्व न्यायालयों में 4200 से अधिक प्रकरणों, किशोर न्याय बोर्ड के 39 तथा परिवार न्यायालय के 12 प्रकरणों का आपसी राजीनामा के आधार पर निराकरण किया गया एवं लाखों की संख्या में प्री-लिटिगेशन मामलों का निराकरण किया गया।

नेशनल लोक अदालत में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के.एल. चरयाणी के खण्डपीठ क्रमांक 01 के समक्ष निराकृत प्रकरणों में 01 प्रकरण मोटर दुर्घटना से संबंधित रहा। आवेदकगण के पति, पिता एवं पुत्र की मृत्यु हो जाने पर इनके द्वारा मोटर यान अधिनियम 1988 की धारा 166 के तहत 74 लाख 10 हजार रुपये क्षतिपूर्ति दिलाने का दावा प्रकरण अनावेदक रामधनी कौशिक, प्रह्लाद सिंह एवं मण्डल प्रबंधक, नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के विरुद्ध प्रस्तुत किया था। लोक अदालत में आवेदक ने अनावेदक क्रमांक 3 बीमा कंपनी से खण्डपीठ क्रमांक-1 के पीठासीन अधिकारी के.एल. चरयाणी, विनोद शर्मा एवं बलराम सोनी के समक्ष स्वेच्छा से 23 लाख रुपये में राजीनामा किया, जिस कारण प्रकरण का निराकरण मात्र 04 माह 11 दिवस के भीतर संभव हो गया। मामले में मृतक की 2 वर्षीय अवयस्क पुत्री एवं वृद्ध माता-पिता शामिल हैं। मामले का कम समय में निपटारा होने से आवेदकगण संतुष्ट नजर आए। अनावेदक बीमा कंपनी को एकमुश्त 23 लाख रुपये अधिनिर्णय दिनांक से 45 दिन के भीतर जमा करने हेतु निर्देशित किया गया है।

पांच से 8 वर्ष के लंबित प्रकरणों का निराकरण
द्वितीय जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश मुकेश तिवारी जी के खण्ड पीठ क्रमांक 04 के समक्ष निराकृत प्रकरणों में भी 01 मोटर यान दुर्घटना से संबंधित प्रकरण लगभग पांच वर्ष से लंबित था, इसका आपसी राजीनामा के आधार पर निराकरण किया गया। इसी प्रकार पल्लव रघुवंशी मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी के खण्ड पीठ क्रमांक 06 के द्वारा पांच वर्ष से अधिक एवं न्यायिक दण्डाधिकारी कल्पना भगत के खण्ड पीठ क्रमांक 09 के द्वारा 08 वर्ष से अधिक समयावधि से लंबित चेक अनादरण प्रकरणों का सफलता पूर्वक निराकरण किया गया।

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