छत्तीसगढ़ में मंगलवार को सरकार को बड़ी कामयाबी हासिल हुई। राज्य से नक्सली हिंसा खत्म करने की कोशिशों में जुटे प्रशासन के लिए 27 मई का दिन खास रहा। 18 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ हथियार डालते हुए सरेंडर कर दिया। इनमें एक महिला भी शामिल है। इनमें कुछ नक्सली मूवमेंट के बड़े नाम भी हैं। इस सफलता के पीछे स्थानीय प्रशासन, पुलिस और सुरक्षा बलों के अथक प्रयास तो हैं ही। साथ में केंद्र सरकार की एक खास योजना भी है, जिसने नक्सलियों को हथियार छोड़कर घर वापस लौटने को प्रेरित किया। जिन 18 नक्सलियों ने सरेंडर किया है, उनमें से 10 के सिर पर तो कुल 39 लाख रुपये का इनाम था। इन सभी ने कल मंगलवार को सुकमा जिले में आत्मसमर्पण कर दिया। इन नक्सलियों में कुछ बड़े नाम भी हैं। मसलन PLGA बटालियन नंबर एक के मेंबर मड़कम आयता और भास्कर उर्फ भोगाम लक्खा। इन दोनों पर 8-8 लाख का इनाम था। मड़कम कमलू और लक्ष्मण उर्फ मादवी चानू पर 5-5 लाख का इनाम था। जबकि 6 नक्सली ऐसे भी हैं, जिन पर 2-2 लाख रुपये का इनाम है।

सरकार की इस योजना से हुए प्रभावित
इन सभी नक्सलियों के बीच एक बात कॉमन रही है। सभी का कहना है कि छत्तीसगढ़ सरकार की एक योजना से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़ने का फैसला कर लिया। इस योजना का नाम है, ‘नियद नेल्लानार योजना’। हिंदी में इसका मतलब है ‘हमारा स्वच्छ गांव’। इस योजना के अलावा केंद्र सरकार की ओर से लागू सरेंडर पॉलिसी नक्सलियों को वापस से मुख्यधारा से जोड़ने में सफल हो रही है। नियद नेल्लानार योजना के तहत बस्तर में काफी सारे विकास कार्य चल रहे हैं। नियद नेल्ला नार योजना से सुदूर अंचलों तक पहुंची बुनियादी सुविधाएं।

नियद नेल्लानार योजना का अहम रोल
इस योजना का उद्देश्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में गांवों में आधारभूत सुविधाएं और सरकार की करीब 32 कल्याणकारी योजनाओं को पहुंचाना है। इसके तहत बस्तर में 14 नए पुलिस कैंप के 5 किलोमीटर के दायरे में आने वाले गांवों में विकास किया जा रहा है। इस योजना के तहत दंतेवाड़ा, सुकमा, नारायणपुर और बीजापुर जैसे क्षेत्र में विकास पहुंचाया जा रहा है। हालांकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इसे बढ़ाकर 10 किलोमीटर करने की बात कह चुके हैं। सरकार 31 मार्च, 2026 से पहले छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद का पूरी तरह से सफाया करना चाहती है।

योजना में क्या-क्या लाभ

इस योजना के अंतर्गत शिविर के 5 किलोमीटर के दायरे में आने वाले सभी गांवों के लोगों तक विकास पहुंचाना है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के जरिए उन्हें पक्का घर मुहैया कराया जा रहा है। राशन कार्ड और चावल, गुड़, चना, नमक और शक्कर मुफ्त में मुहैया कराया जा रहा है। प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के तहत ग्रामीणों को गैस सिलेंडर मुफ्त दिए जा रहे हैं। इसके अलावा आंगनबाड़ी, हेल्थ सेंटर, सामुदायिक भवन, सिंचाई के लिए उपकरण दिए जा रहे हैं। यही नहीं 500 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने का भी प्रावधान है। युवाओं को रोजगार के लिए कौशल विकास ट्रेनिंग दी जा रही है। मोबाइल टावर लगाए जा रहे हैं।

सरेंडर पॉलिसी भी कारगर
इसके अलावा केंद्रीय गृह मंत्रालय और मध्य प्रदेश सरकार द्वारा तैयार सरेंडर पॉलिसी भी कारगर साबित हो रही है। नक्सलियों को वापस से मुख्यधारा में जोड़ने के लिए पीएम आवास योजना, पीएम उज्जवला योजना, आयुष्मान भारत योजना, पीएम कौशल विकास योजना का लाभ सरेंडर करने वाले नक्सलियों को दिया जा रहा है। इसके अलावा आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को रोजगार के साधन उपलब्ध कराने के साथ-साथ नकद राशि भी दी जाती है। उन्हें जमीन खरीदने के लिए 2 लाख रुपये तक दिए जाते हैं। काम शुरू करने की ट्रेनिंग के लिए 1.5 लाख रुपये मिलते हैं। साल 2024 में बस्तर डिवीजन से 792 नक्सली सरेंडर कर चुके हैं।

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