इंश्योरेंस लेने जाओ तो कई बार ग्राहकों को बीमा के साथ गारंटी रिटर्न वाला प्लान बेचने की कोशिश की जाती है. कई ग्राहक तो बहकावे में आकर ये प्लान खरीद भी लेते हैं. बहकावा, लालच जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने का मतलब ये नहीं है कि वादा करने के बाद बीमा कंपनियां पैसा नहीं देती हैं. पैसा भी मिल रहा है और बीमा कवर भी. लेकिन जब आप महंगाई के हिसाब से रिटर्न देखेंगे तब आपको समझ आएगा कि आपको खास फायदा हुआ नहीं. गारंटी के बावजूद फायदा कैसे कम पड़ जाता है? इस गुत्थी को समझें, उससे पहले गारंटी रिटर्न प्लान को समझ लेते हैं.

गारंटी रिटर्न बीमा प्लान में ग्राहकों को एक निश्चित समय तक निवेश करने के बाद तय रिटर्न मिलता है. पैसा बढ़कर मिलेगा, यही गारंटी है. ग्राहक एक फिक्स प्रीमियम देता रहता है. तय समय पूरा होते ही, आपके खाते में रिटर्न का पैसा आने लगता है. ये पैसा महीने-महीने भी मिल सकता है और एकमुस्त भी या फिर जैसे पॉलिसी में बताया हो, या आपने चाहा हो.

फिर नुकसान की बात कहां से आई?

गारंटी प्लान के नुकसान समझने के लिए हमने ‘पैज़केयर’ में फाउंडिंग प्रिंसिपल ऑफिसर अभिषेक महतो से बात की. पैज़केयर कॉर्पोरेट एंप्लॉइज़ के लिए इंश्योरेंस का काम करती है. अभिषेक ने दी लल्लनटॉप को बताया कि गारंटी प्लान मार्केट में आजकल बहुत से एनडॉउमेंट प्लान बिक रहे हैं. ये प्लान अक्सर ‘25 सालों में पैसा डबल’, ‘10 साल तक एक लाख रुपये देने पर 100% या 50% रिटर्न’ जैसे वादों के साथ आते हैं. ग्राहक को लगता है कि 10 लाख रुपये देकर 20 लाख रुपये मिल रहे हैं तो इसमें बुराई क्या है. दरअसल कस्टमर को बस रिटर्न की रकम सुनाई देती है. उन्हें ये नहीं दिखाई देता कि 10 लाख रुपये से 20 लाख होने में समय कितना लगा.

निवेश की दुनिया में एक टर्म चलता है IRR यानी इंटरनल रेट ऑफ रिटर्न, जो बताता है कि आपको असल में कितना फायदा हुआ है. अगर दस साल बाद आपका निवेश 10 लाख बढ़कर 20 लाख रुपये हो गया है. आपको लगेगा कि आपने 10 लाख रुपये कमाए. लेकिन, महंगाई के हिसाब से फायदा निकाला जाए तो असल रिटर्न 4-5 लाख रुपये ही होगा. कई ऑनलाइन प्लैटफॉर्म IRR कैलकुलेट करने की सुविधा देते हैं.

 

घाटा ही है तो लोग खरीदते क्यों हैं?

दरअसल इन प्लान्स की पॉपुलैरिटी की दो बड़ी वजहें हैं. पहला है- टैक्स बचत. अगर आपने कहीं और निवेश नहीं किया है और बीमा प्लान ले लिया है तो 80सी के तहत अकेले डेढ़ लाख रुपये बचा सकते हैं. दूसरी वजह है- मैच्योरिटी पर गारंटी रिटर्न के नाम पर जो फायदा मिलता है उस पर भी कोई टैक्स नहीं लगता है. जबकि, शेयर या म्यूचुअल फंड में प्रॉफिट पर पैसे देने पड़ते हैं.

दिक्कत सिर्फ इतनी ही नहीं है

सभी गारंटी प्लान, लाइफ या हेल्थ इंश्योरेंस के साथ आते हैं. आप जो भी प्रीमियम देते हैं उसी का एक हिस्सा लाइफ कवर के लिए जाता है और एक हिस्सा निवेश के लिए. मान लेते हैं अगर आप 10,000 रुपये प्रीमियम के लिए दे रहे हैं तो करीबन 10 फीसदी यानी सिर्फ 1,000 रुपये लाइफ कवर के लिए होगा. बाकी 9,000 रुपये निवेश के लिए. सबसे बड़ी दिक्कत तो यही है कि लाइफ कवर के लिए रकम बेहद कम है और प्रीमियम काफी महंगा.

अभिषेक ने आगे कहा,

‘’दरअसल लोगों को अंदाजा ही नहीं होता कि कितने का लाइफ इंश्योरेंस प्लान लेना चाहिए. आमतौर पर सैलरी का दस गुना रकम का बीमा लेना चाहिए. एन्डॉवमेंट प्लान लेकर लोग सोचते हैं कि एक ही पैसे में बढ़िया रिटर्न भी मिल रहा है और लाइफ कवर भी. जबकि, हकीकत ये है कि एन्डॉवमेंट प्लान में मिलने वाला बीमा कवर बेहद कम होता है और महंगा भी.”

इसे उदाहरण से समझते हैं. मान लेते हैं एक शख्स की सैलरी 10 लाख है तो उसे 1 करोड़ रुपये का प्लान लेना चाहिए. अगर ये शख्स बीमा कवर के साथ एक करोड़ रुपये का एन्डॉवमेंट प्लान ले रहा है तो उसे हर साल प्रीमियम पर 6-7 लाख रुपये देना पड़ सकता है. अब आप सोच सकते हैं जिसकी कमाई ही साल में 10 लाख रुपये है वो 6-7 लाख रुपये बीमा प्लान पर दे देगा तो उसके पास बचेगा क्या? दूसरी चीज – जैसा कि ऊपर भी बताया है, इन प्लान में 90 फीसदी पैसा इनवेस्टमेंट में जाता है और 10 फीसदी लाइफ कवर के लिए. इसलिए बीमा कवर के नाम पर बेहद कम रकम मिलती है.

आमतौर पर एक करोड़ रुपये के गारंटी प्लान में पॉलिसी धारक के मरने पर 30-40 लाख रुपये ही कवर के लिए मिलेंगे. इसके लिए उन्हें हर साल 3-4 लाख का प्रीमियम देना पड़ता है. इतना ही प्रीमियम अगर टर्म इंश्योरेंस प्लान में दिया तो आपको 20 करोड़ रुपये का कवर मिल सकता है.

अब बात करते हैं रिटर्न पर

इतने सालों में पैसा डबल, ये लाइन कानों को जितनी मधुर लगती है आपकी वित्तीय सेहत के लिए उतनी ही खराब होती है. दरअसल शेयर से लेकर गोल्ड, बॉन्ड सभी सिक्योरिटीज दो अंकों में रिटर्न का वादा करते हैं, लेकिन इनका असल रिटर्न उससे काफी कम होता है. उदाहरण के तौर पर मान लेते हैं कि आपने 10 फीसदी सालाना रिटर्न वाले किसी प्लान में निवेश किया. 10 लाख X 10% रिटर्न= एक लाख. निवेशक को लगेगा उसके दस लाख बढ़कर ग्यारह लाख हो गए.

इसी साल महंगाई 6% भी रही. यानी सामानों के दाम भी 6 फीसदी बढ़ गए. अब असल रिटर्न 10 फीसदी नहीं बल्कि 4 फीसदी (10-6) होगा. यानी आपको एक लाख नहीं 40 हजार का फायदा हुआ. इसी तरह आप समझ सकते हैं कि 10 साल बाद आपको भले ही दस के बीस लाख मिलें लेकिन असल में आपका फायदा इससे कहीं कम होगा. दूसरा फैक्टर होता है पैसे की परचेजिंग पावर को समझना. मतलब कि आज 500 रुपये में जितनी चीजें मिल सकती हैं 10 साल बाद उतनी चीजें नहीं मिलेंगी. जो फ्लैट आज 50 लाख रुपये में मिल रहा है, दस साल बाद उसी फ्लैट के लिए आपको 80 लाख या हो सकता है उससे भी ज्यादा खर्च करने पड़ेंगे. अगर आपका पैसा उसी रफ्तार से नहीं बढ़ा तो गारंटी रिटर्न प्लान लेकर भी कोई फायदा नहीं होने वाला.

बीमा कवर से समझौता न करें

सबसे जरूरी है मन में स्पष्टता होना. आपको पता होना चाहिए कि आपकी प्राथमिकता क्या है बीमा प्लान या निवेश. अगर असमय मौत की स्थिति में अपने परिवार को वित्तीय सुरक्षा चाहते हैं तो फिर बीमा. अगर मकसद पैसे बढ़ाना है तो फिर मकसद सिर्फ निवेश और बढ़िया रिटर्न होना चाहिए. बढ़िया रिटर्न से मतलब है आपका पैसा महंगाई की दर से ज्यादा तेजी से बढ़े. अगर मकसद बीमा कवर है तो कभी भी गारंटी रिटर्न वाले बीमा प्लान नहीं लेना चाहिए. तो सवाल आएगा कि समाधान क्या है?

इसका जवाब है- टर्म इंश्योरेंस प्लान. टर्म प्लान सैलरी का 10 से 15 गुना होना चाहिए. क्रिटिकल इलनेस और एक्सिडेंटल खर्च जरूर कवर होना चाहिए. अगर 30 से 35 साल की उम्र का कोई शख्स 1 करोड़ रुपये का प्लान लेता है तो उसका सालाना प्रीमियम 15,000 रुपये से ज्यादा नहीं होगा. इसके साथ एक्सिडेंटल और क्रिटिकल इलनेस राइडर जरूर ले लें. मान लेते हैं आपका एक्सिडेंट हो गया और शरीर का एक हिस्सा काम करना बंद कर दिया. अब आप नौकरी नहीं कर सकते हैं. ऐसी स्थिति में एक्सिडेंटल कवर काम आता है. वहीं, क्रिटिकल इलनेस आपको किसी बड़ी बीमारी की स्थिति में वित्तीय सुरक्षा देगा.

रिटर्न चाहिए तो दूसरे तरीके आजमाएं

सबसे पहले अपना सेविंग गोल तय कर लीजिए. मान लेते हैं आप 10 साल में 20 लाख रुपये बचाना चाहते हैं. अब ये तय करना होगा कि ये पैसा किन-किन चीजों में लगाना चाहते हैं. गोल्ड, इक्विटी, बॉन्ड, म्यूचुअल फंड में निवेश बांटने के बाद अगर आपको लगता है कि आपके पास कुछ और रकम है जिसे निवेश कर सकते हैं. तब आप गारंटी रिटर्न प्लान खरीद सकते हैं.

अभिषेक ने कहा कि अगर इस पूरे मसले को कम शब्दों में समझाऊं, तो मेरी राय यही है कि बीमा और निवेश दोनों को कभी एक में नहीं मिलाना चाहिए. बीमा से सुरक्षा चाहते हैं तो सिर्फ बीमा की सुविधा पर फोकस होना चाहिए और रिटर्न कमाना मकसद है तो सिर्फ और सिर्फ बढ़िया रिटर्न पर फोकस होना चाहिए.

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