कबीरधाम। मानवता को झकझोर देने वाली एक बेहद मार्मिक घटना जिले में सामने आई है। अपनी बीमार पत्नी के इलाज के लिए नागवही गांव निवासी समलु मरकाम दर-दर भटकने को मजबूर नजर आए। वह अपनी पत्नी को बाइक पर खाट बांधकर अस्पतालों के चक्कर लगाते नजर आए। गुरुवार को वह इसी हालत में कलेक्ट्रेट पहुंचे तब कलेक्टर गोपाल वर्मा ने तुरंत एंबुलेंस बुलाकर महिला को अस्पताल में भर्ती कराया। हालांकि पहले भी उपमुख्यमंत्री की ओर से उनको सहायता दी गई थी।

साल भर से बीमार पत्नी को लेकर लगा रहे हैं अस्पतालों के चक्कर
जानकारी के अनुसार, बोड़ला विकासखंड के नागवही गांव निवासी समलु मरकाम पिछले करीब एक साल से अपनी बीमार पत्नी को लेकर अस्पतालों के चक्कर लगाते रहे। वह खाट को बाइक पर बांधकर उस पर बीमार पत्नी को लिटाते थे और इस जुगाड़ गाड़ी के सहारे अस्पतालों के चक्कर लगाते रहे लेकिन उनको कोई ठोस मदद नहीं मिल रही थी।

कलेक्टर से की आर्थिक मदद की गुहार
समलु मरकाम गुरुवार को खाट बाइक पर बांधकर उस पर अपनी पत्नी को लिटाया और कलेक्ट्रेट पहुंच गए। उन्होंने कलेक्टर साहब से आर्थिक मदद की गुहार लगाई। तेज धूप और कठिन परिस्थितियों के बावजूद वह पत्नी को लेकर कलेक्टर कार्यालय के बाहर सहायता के इंतजार में खड़े नजर आए। कलेक्टर गोपाल वर्मा ने तत्काल संज्ञान लेते हुए एंबुलेंस की व्यवस्था कराई और बीमार महिला को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया। इससे पहले भी समलु मरकाम का अपनी पत्नी को खाट पर बाइक से ले जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।

उपमुख्यमंत्री ने की थी आर्थिक सहायता
प्रदेश के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने 10 हजार रुपये की प्रदान की थी। हालांकि यह राशि इलाज के लिए पर्याप्त नहीं हो सकी थी। लगातार बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति और आर्थिक तंगी के कारण यह परिवार गहरे संकट में है। यह परिवार अब भी सरकार से स्थायी सहायता का इंतजार कर रहा है।

क्यों नहीं मिल रहा योजनाओं का लाभ
यह घटना ऐसे वक्त में सामने आई है जब आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए आयुष्मान कार्ड भी बनाए जा रहे हैं। ऐसे में जब छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और शहीद वीर नारायण सिंह आयुष्मान स्वास्थ्य योजना के तहत बीपीएल परिवारों को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज दिया जाता है। वहीं एपीएल परिवारों को 50 हजार रुपये तक के इलाज की सुविधा दी जा रही है। यही नहीं मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत गंभीर बीमारियों के लिए 25 लाख रुपये तक की मुफ्त मदद दी जा रही है। सवाल यह कि क्या समलु मरकाम जैसे लोगों को इन योजनाओं का उचित लाभ मिल पा रहा है?

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