स्वजनों ने लापरवाही का लगाया आरोप, गांधीनगर थाने में की शिकायत

गिरजा ठाकुर

अंबिकापुर। शहर में धड़ल्ले से निजी अस्पताल खुल रहे हैं, पर यहां स्वास्थ्य सेवा के मानकों का कितना ध्यान रखा जा रहा है, इसकी पड़ताल करने वाला कोई नहीं है। ऐसे में निजी अस्पतालों में हो रही गंभीर लापरवाही का खामियाजा लोगों को जान देकर भुगतना पड़ रहा है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां निजी अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप स्वजन लगा रहे हैं, इनका कहना है कि महिला की मौत की वजह सिर्फ लापरवाही है।
ममता अग्रवाल नामक महिला को पित्त की तैली में पथरी होने पर शहर के बनारस रोड स्थित आशीर्वाद अस्पताल लेकर स्वजन पहुंचे थे। स्वजनों का कहना है यहां प्रबंधन ने लेजर ऑपरेशन करने कहा, जिस पर वे राजी हो गए। भर्ती करने के बाद महिला का लेजर आपरेशन नहीं किया गया, डॉक्टरों ने ओपन सर्जरी कर दी। सर्जरी के कुछ देर बाद महिला की तबियत बिगड़ने लगी। अस्पताल में आईसीयू की सुविधा नहीं होने के कारण तत्काल बेहतर उपचार की सुविधा नहीं मिल पाई। गंभीर हालत में उन्हें गायत्री अस्पताल लाया गया, यहां डॉक्टरों ने बताया कि महिला का पल्स नहीं चल रहा है और ब्रेन डेड हो चुका है। इसके बाद डॉक्टरों ने महिला को आईसीयू में भर्ती कर दिया, कुछ घंटे उपचार के बाद महिला को मृत घोषित कर दिया गया।

स्वजनों ने थाने में की शिकायत
चिकित्सकों की बड़ी लापरवाही की वजह से महिला की मौत का आरोप स्वजनों ने लगाया है। उन्होंने निजी अस्पताल प्रबंधन पर सवाल खड़े किए हैं कि जब अस्पताल में आईसीयू की सुविधा नहीं थी तो किस आधार पर महिला का ओपन सर्जरी किया गया। महिला की मौत के बाद स्वजनों ने इसकी शिकायत गांधीनगर थाने में की है और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है।

कंडीशन बताने के बाद की गई ओपन सर्जरी
आशीर्वाद अस्पताल के संचालक डॉ.आदित्य सिंह का कहना है कि ममता अग्रवाल को नौ जुलाई को भर्ती किया गया था। ओपन सर्जरी उनके स्वजनों की सहमति से पूरी कंडीशन बताकर 10 जुलाई की शाम को किया गया। उन्हें बताया गया था पेशेंट फैटी है, इसलिए लेजर ऑपरेशन संभव नहीं है। ऑपरेशन के पहले सभी जरूरी टेस्ट किए गए थे। ऑपरेशन के बाद उन्हें वार्ड में शिफ्ट किया गया। देर रात आईसीयू की जरूरत महसूस होने पर उन्हें नजदीकी अस्पताल में अपने वाहन से ले जाकर मैंने स्वयं भर्ती कराया। कहना है उनके अस्पताल में इमरजेंसी की सारी सुविधाएं हैं। ऑपरेशन के अपने पैरामीटर हैं, इसके लिए अस्पताल में आईसीयू हो, जरूरी नहीं है। सर्जिकल अस्पताल के मानक में आईसीयू का प्रावधान नहीं है।

रिकवर की स्थिति बनने पर रखा आईसीयू में
गायत्री अस्पताल के एडमिनिस्ट्रेटर नवीन द्विवेदी ने कहा कि रात डेढ़ बजे के बीच ऑपरेशन की गई महिला को एक निजी नर्सिंग होम से लाया गया था। महिला का पल्स और बीपी सामान्य नहीं था। इमरजेंसी में उसे सीपीआर दिया गया, जिससे हार्ट कुछ रिकवर हुआ। प्रोटोकॉल को फालो करते हुए उन्हें आईसीयू में भर्ती किया गया था, क्योंकि जब उन्हें लाया गया था तो स्थिति खतरे में थी। 24 घंटे बाद उनकी मौत हो गई।

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