*युवक से इतना काम कराया कि आईसीयू में कराना पड़ा भर्ती*
*दो दर्जन से अधिक मजदूर बेहतर पगार के लोभ में गए थे, तमिलनाडु, भागकर लौटे घर*
अंबिकापुर। मजदूरों के लिए बनी सरकारी योजनाएं कितनी सफल हैं और मानव तस्करों की ग्रामीणों पर लगी गिद्ध नजर के कारण होने वाले पलायन व शोषण को रोकने के प्रयास कितने कारगर हो रहे हैं, इसका आंकलन सरगुजा जिले के मैनपाट ब्लॉक अंतर्गत ग्राम बंदना बांसापारा के ग्रामीणों की तमिलनाडु में हो रही दुर्दशा से किया जा सकता है। आलम यह है कि बिना मजदूरी लिए ग्रामीण चोरी छिपे भागने विवश हैं। इन्हें बंधक बनाए गए अपने बच्चों को वापस लाने कर्ज में रुपये लेना पड़ रहा है। ग्रामीणों को अधिक मजदूरी दिलाने का झांसा देकर मानव तस्कर तमिलनाडु ले गए थे। तमिलनाडु पहुंचने के बाद इनकी स्थिति बंधक जैसी हो गई।  किसी तरह भागकर कुछ मजदूर घर वापस पहुंचे गए। ग्रामीण अपनी मर्जी, खुशी से काम करने तमिलनाडु नहीं गए। सरगुजा संभाग में सक्रिय मानव तस्कर इनके बीच पैठ बनाने के बाद ऐसी भट्ठी में झोंक दिए, जहां शकुन से दो रोटी इन्हें नसीब नहीं हो रही थी। सरगुजा जिले के मैनपाट ब्लॉक अंतर्गत के ग्राम बंदना, बांसापारा निवासी 20 वर्षीय युवक व उसकी नाबालिक बहन अधिक मजदूरी के लालच में तमिलनाडु चले गए थे। तमिलनाडु में अधिक मजदूरी तो नहीं मिली लेकिन अब उसके जान पर बन आई है। युवक मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर के आईसीयू में भर्ती है। मजदूरी करने गए युवक से इतनी मजदूरी कराई गई कि वह बीमार हो गया। जानकारी लगने पर किसी तरह युवक का पिता अपनी पुस्तैनी जमीन गिरवी रख कर अपने बेटे-बेटी को वापस तो ले आया लेकिन बुजुर्ग अब बुढ़ापे की लाठी, बीमार मजदूर बेटे के इलाज के लिए अस्पताल का चक्कर काट रहा है।
*दो दर्जन से अधिक गए काम करने*
मैनपाट ब्लॉक के ग्राम बंदना से सिर्फ एक भाई-बहन मानव तस्कर के झांसे में आकर तमिलनाडु नहीं गए, बल्कि टारगेट बनाए गए मांझी आदिवासी परिवार के दो दर्जन से  अधिक मजदूरों को अधिक मजदूरी का लालच देकर तमिलनाडु ले जाया गया था, जो किसी तरह भाग कर अपने घर पहुंचे है।
*काम के बदले मिलता था सिर्फ खाना*
मजदूर रामलखन, हिरमोहन, सोनू ने बताया कि उन्हें झूठ बोलकर तमिलनाडु ले जाया गया था, जहां सिर्फ मजदूरी कराया जाता था। उनके सारे दस्तावेज छीन लिए गए। घर वापस आने नहीं दिया जा रहा था। मौका देखकर मजदूर धीरे-धीरे वहां से भागकर घर वापस पहुंचे है। वहां मजदूरी के बदले सिर्फ खाना दिया जाता था।
*गांव के ही व्यक्ति का लिया सहयोग*
मजदूरों को ले जाने व तस्कर का सहयोग करने वाले ग्रामीण सोनु ने बताया कि उसे तमिलनाडु में अच्छा काम मिलेगा, बताया गया था, जिसके चलते एक मोहल्ले से 25 से अधिक मजदूरों को  तमिलनाडु भेजने में वह मानव तस्कर का सहयोग किया था। पुलिस जांच, कार्रवाई में और भी बड़े तथ्य सामने आ सकते हैं।
*मानव तस्करों पर कार्रवाई जरूरी*
मजदूर भागकर तमिलनाडु से अपने घर जरूर पहुंच गए हैं, लेकिन सरगुजा के कई मजदूर आज भी अन्य राज्यों में परिवार के बेहतर परवरिश के लिए अधिक मजदूरी का लालच में फंसे हुए हैं। जानकारी मिलने पर व स्वजनों की फरियाद पर भले ही प्रशासन और पुलिस मिलकर मजदूरों को घर वापस लाती है, लेकिन सक्रिय मानव तस्करों पर कार्रवाई नही कर पाती, जिससे उनके हौसले बुलंद हैं। इसका  खामियाजा सरगुजा के भोले-भाले मजदूरों को उठाना पड़ रहा है। *चुनावी वर्ष में पलायन बड़ी समस्या*
चुनावी साल में काम की तलाश में अन्य राज्य में बड़ी संख्या में मजदूरों का पलायन बड़ी समस्या है। ऐसे समय में ग्रामीण अपने मताधिकार से भी वंचित होंगे। दिलेश्वर नामक ग्रामीण माझी परिवार के सदस्यों को फैक्ट्रियों में काम कराने के नाम पर तमिलनाडु ले जाता है, यह जानकारी ग्रामीण देते हैं। इनका कहना है कि उन्हें यह कहकर ले जाया गया कि दोना पत्तल, नारियल बुच रस्सी, बिस्कुट फैक्ट्री में काम करना होगा। वेतन 10 हजार रुपये प्रति माह सहित अन्य सुविधा देने की बात कही गई थी। जब वे काम करने के लिए गए तो उन्हें अलग-अलग ग्रुप में कहां-कहां भेजा गया नहीं मालूम। काम करने के बाद रुपये लेने की बात बारी आई तो उनके साथ बंधक जैसा बर्ताव होने लगा।
*बॉक्स*
*पुलिस कप्तान की अपील*
फोटो सुनील शर्मा
सरगुजा पुलिस अधीक्षक सुनील शर्मा ने पलायन कर रहे मजदूरों से अपील की है कि वे किसी के झांसे में ना आएं। कहीं जाने से पहले उस जगह की सत्यता को परख लें, जहां उन्हें काम के लिए ले जाया जा रहा है। इस कार्य में वे पुलिस व प्रशासन का भी सहयोग ले सकते हैं। पुलिस अधीक्षक ने मानव तस्कर गिरोह पर कार्रवाई की बात कही है।

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