कमजोरी की शिकायत पर बेटी को लेकर सीरप लेने पिता गया था दवाखाना, नीम-हकीम ने लगाया इंजेक्शन
दवाखाना के संचालक पर विधिसम्मत कार्रवाई की मांग, स्वजनों में शोक का माहौल

अंबिकापुर। सरगुजा संभाग में नीम-हकीमों की सक्रियता कई कार्रवाईयों के बाद भी बरकरार है। ऐसे ही एक तथाकथित दवाखाना संचालक के चक्कर में एक परिवार के घर की खुशियां जवान बेटी की मौत के बाद बिखर गई। इस घटना के बाद स्वजनों में मातम का माहौल है। स्वजनों का आरोप है कि झोलाछाप चिकित्सक के गलत इंजेक्शन लगाने से मौत हुई है। इनके द्वारा दोषी नीम-हकीम पर कार्रवाई की मांग की जा रही है।

मामला जशपुर जिले के बगीचा ब्लॉक का है। ग्राम सुलेसापाठ की 18 वर्षीय छात्रा पूर्णिमा यादव को कमजोरी की शिकायत थी। स्वजनों का कहना है वे कमजोरी की दवाई लेने बगीचा थाना के पास संचालित एक दवाखाना में गए थे, यहां मौजूद चिकित्सक ने इंजेक्शन लगाने की बात कही। जैसे ही छात्रा को इंजेक्शन लगाया, वैसे ही चक्कर आने लगा और वह मूर्छित अवस्था में पहुंच गई। इसके बाद दवाखाना का संचालक घबरा गया। आनन-फानन में रुपये व वाहन की व्यवस्था करके इलाज के लिए उसे अंबिकापुर भेज दिया, इधर रास्ते में ही छात्रा दम तोड़ दी। अंबिकापुर पहुंचने के बाद स्वजन उसे एक निजी अस्पताल में ले गए, यहां जांच के बाद डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसकी सूचना अस्पताल प्रबंधन ने मिशन अस्पताल चौकी पुलिस को दी, जिस पर मर्ग कायम कर लिया गया है। पुलिस ने छात्रा के शव का मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पोस्टमार्टम करवाया है। स्वजनों ने दवाखाना के संचालक पर विधिसम्मत कार्रवाई करने की मांग की है। बता दें कि दवाखाना खोलकर नीम-हकीमों की तर्ज पर इलाज करने वाले तथाकथित चिकित्सकों के यहां इलाज दौरान मौत का यह कोई पहला मामला नहीं है। आए दिन ऐसे लोगों के गलत इलाज की वजह से मौत की खबरें सुर्खियां बनती हैं, जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति करते हैं, जिससे इनकी दुकानदारी धड़ल्ले से चलते रहती है।

गाड़ी की व्यवस्था कर इलाज के लिए दिए पांच हजार रुपये
मृतिका पूर्णिमा यादव के पिता ललित यादव ने बताया कि बैंक के काम से वे अपनी लड़की के साथ गए थे। बैंक का काम निपटाने के बाद वापस आते समय पूर्णिमा ने सर्दी-खांसी व कमजोरी लगने की बात कही। इसके बाद वे बगीचा थाना के आगे दवाखाना में पहुंचे और डॉक्टर से कोई सीरप लिख देने के लिए कहा। कथित डॉक्टर ने कहा इंजेक्शन लगाना पड़ेगा। इसके बाद इंजेक्शन लगाते ही पूर्णिमा ने चक्कर आने की बात कही, कुछ देर में वह बेहोश हो गई। डॉक्टर ने इसके बाद आनन-फानन में गाड़ी की व्यवस्था करके स्वयं पूर्णिमा को गाड़ी में बैठाया और अंबिकापुर ले जाने के लिए कहा। इलाज के लिए पांच हजार रुपये भी दिए, लेकिन उसकी रास्ते में ही मौत हो गई।

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