अंबिकापुर। श्रीराम फायनेंस लिमिटेड शाखा के प्रबंधक ने अंबिकापुर शाखा में पदस्थ जूनियर बिजनेस एग्जीक्यूटिव्ह के द्वारा ग्राहकों के फायनेंस के किस्त की राशि 3 लाख 50 हजार रुपये गबन करने और फर्जी रसीद जारी करने का आरोप लगाया है। इसकी लिखित शिकायत कोतवाली थाना में की गई है, जिस पर पुलिस ने आरोपी के विरूद्ध केस दर्ज कर लिया है।
श्रीराम फायनेंस लिमिटेड के स्थानीय शाखा प्रबंधक ने पुलिस को जानकारी दी है कि उनके द्वारा टू-व्हीलर वाहन के फायनेंस का वित्तीय कारोबार किया जाता है। 30.01.2024 को अंबिकापुर निवासी अमित श्रीवास्तव को फायनेंस कंपनी में जूनियर बिजनेस एग्जीक्यूटिव्ह के पद पर नियुक्त किया गया था, जो उनके अधीन काम करता था। अमित श्रीवास्तव का काम फायनेंस कंपनी द्वारा ग्राहकों को दिए गए ऋण की राशि के किस्तों को संग्रहित करके कार्यालय में ग्राहकों के लोन एकाउंट में जमा करना था। वित्तीय वर्ष 2024-2025 की समाप्ति की स्थिति में फायनेंस कार्यालय द्वारा ऋणी ग्राहकों से उनके ऋण खाता में किस्तों की अदायगी में हुए चूक के संबंध में संपर्क करके ऋण खाते को नियमित करने कहा गया और फायनेंस की गई वाहनों की अद्यतन स्थिति के बारे में जानकारी ली गई तो ऋणी ग्राहक जितेन्द्र, प्रितम पैंकरा, अरविन्द कुमार, बसंती राजवाडे, गनेशिया बाई ने बताया कि अमित श्रीवास्तव ने उनके वाहनों को किस्त का भुगतान समय पर नहीं करने के आधार पर जप्त किया, बाद में किस्त की राशि लेकर वाहन को छोड़ा है। अमित के द्वारा किस्त की राशि फोन पे से अपने नाम के बैंक खाता में प्राप्त करने और पावती मांगे जाने पर फायनेंस कंपनी के प्रिंटेड फार्म में किस्त की राशि को हस्तलेख में भरकर देना पाया गया। शिकायत की जांच कार्यालयीन अभिलेख से करने पर जप्त गाड़ी कंपनी के अधिकृत यार्ड में जमा नहीं होना और न ही किस्त की राशि कंपनी के ऋण खाते में अमित श्रीवास्तव द्वारा जमा करना सामने आया। जबकि फायनेंस कंपनी की ओर ऋण राशि जमा होने की पावती ऑनलाइन कम्प्यूटराइज दी जाती है। जांच में प्रारंभिक तौर पर 1 लाख 29 हजार 860 रुपये का गबन करने पर जब उन्होंने अमित श्रीवास्तव से पूछताछ किया तो वह गोल-मोल जवाब देने लगा। इसके बाद 07.05.2025 को विभागीय मेल द्वारा कारण बताओ नोटिस देते हुए उसे निलंबित कर दिया गया था, इस पर उसकी ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया, जिस पर 03.06.2025 को अमित को कंपनी ने सेवा से पृथक कर दिया। फायनेंस कम्पनी के आंतरिक ऑडिटर ने मामले की जांच में प्रारंभिक तौर पर 3 लाख 50 हजार 395 रुपये गबन करना पाया है। इसे ऋणी ग्राहकों से अमित श्रीवास्व ने फोन पे के माध्यम से अपने बैंक खाते में प्राप्त किया है, और कंपनी में जमा नहीं किया। इसके साथ ही उसके द्वारा कुछ ग्राहकों को कूटरचित फर्जी रसीद, पावती फायनेंस कंपनी की ओर से प्रदाय किया गया है। फाइनेंस कम्पनी को वर्तमान में ऐसी भी जानकारी मिल रही है कि अमित श्रीवास्तव के द्वारा ग्राहकों से श्री राम फायनेंस कंपनी के नाम पर नकद डाउन पेमेंट लेकर फर्जी तरीके से डी.ओ. लेटर जारी किया जा रहा है और एजेंसियों से वाहन सीधे ग्राहकों को दिलाया गया है। रिपोर्ट पर पुलिस अग्रिम जांच, कार्रवाई कर रही है।

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