रायपुर। सुरक्षाबलों को नक्सलवाद के मोर्चे पर बड़ी सफलता मिली है। छत्तीसगढ़ के आदिवासी इलाकों से निकलकर माओवादियों का बड़ा नेता बनने वाले कुख्यात नक्सली रामधेर मज्जी ने अपने 12 साथियों के साथ हथियार डाल दिया हैं। रामधेर मज्जी को हिडमा के बाद छत्तीसगढ़ के सबसे कुख्यात नक्सली माना जाता है। ये सेंट्रल कमेटी मेंबर भी है।

12 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण
उत्तर बस्तर डिवीजन में सक्रिय रहे रामधेर मज्जी ने खैरागढ़ के कुम्ही गांव, बकरकट्टा थाने में पुलिस के सामने हथियार डाले। उसके साथ डिविजनल कमेटी मेंबर (डीवीसीएम) रैंक के चंदू उसेंडी, ललिता, जानकी और प्रेम भी थे। इनमें से दो नक्सलियों के पास एके-47 और इंसास राइफल थीं। इसके अलावा, एरिया कमेटी मेंबर (एसीएम) स्तर के रामसिंह दादा और सुकेश पोट्टम ने भी हथियार सौंपे। पार्टी मेंबर (पीएम) स्तर के लक्ष्मी, शीला, योगिता, कविता और सागर ने भी आत्मसमर्पण करने वालों में शामिल थे। इन सभी 12 नक्सलियों से पुलिस पूछताछ कर रही है ताकि उनके नेटवर्क और गतिविधियों के बारे में और जानकारी जुटाई जा सके।

एमएमसी जोन कमांडर था रामधेर
वहीं, हिडमा के बाद बस्तर इलाके में रामधेर का दबदबा था। इसके ऊपर करीब एक करोड़ रुपए का इनाम है। साथ ही अपने साथ एके-47 लेकर चलता था। यह एमएमसी जोन का कमांडर था। यह कई बड़ी वारदातों का मास्टरमाइंड रहा है। बताया जाता है कि एमएमसी जोन का रामधेर सबसे बड़ा लीडर था। रामधेर की सुरक्षा तीन लेयर की होती थी।

गौरतलब है कि हिडमा के एनकाउंटर के बाद नक्सलियों में खौफ है। नक्सलियों ने मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के सीएम को पत्र लिखकर 15 फरवरी तक का वक्त मांगा था। साथ ही सरेंडर करने की इच्छा जाहिर की थी। अब तीनों राज्यों में बड़े-बड़े नक्सली सरेंडर करने लगे हैं। रामधेर मज्जी जैसे बड़े नक्सली नेताओं का आत्मसमर्पण संगठन के लिए एक बड़ा झटका माना जाता है। सेंट्रल कमेटी मेंबर का पद नक्सली संगठन में बहुत महत्वपूर्ण होता है और ऐसे नेताओं के आत्मसमर्पण से संगठन की कार्यप्रणाली और मनोबल पर गहरा असर पड़ता है। यह दर्शाता है कि नक्सली आंदोलन अब पहले जैसा मजबूत नहीं रहा और सुरक्षाबल उन्हें लगातार कमजोर कर रहे हैं।

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