एसडीएम व अस्पताल प्रबंधन के साथ हुई बैठक के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकलाअंबिकापुर। राजमाता श्रीमती देवेन्द्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय संबद्ध जिला अस्पताल में जीवनदीप समिति के अधीन कार्यरत सफाई कर्मचारी आउटसोर्सिंग का विरोध करते हुए दूसरे दिन भी काम पर वापस नहीं लौटे। अस्पताल की स्वच्छता का ध्यान तो अलग से रखे गए कर्मचारियों ने रखा, लेकिन ओटी काम्पलेक्स की व्यवस्था चरमरा गई है। जहां रोजाना 10 से 12 ऑपरेशन होते थे, वहां सिर्फ इमरजेंसी केस को ही ऑपरेशन के लिए लिया जा रहा है। ऐसे में एक से दो ऑपरेशन ही हो पा रहे हैं।
बता दें कि शासनादेश पर मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में एक वर्ष पूर्व सुरक्षा व्यवस्था ठेका पर देने के बाद, एक अगस्त से स्वच्छता का काम ठेकेदार के अधीन कर दिया गया है। अस्पताल में लम्बे समय से सेवा दे रहे स्वच्छक आउटसोर्सिंग के पक्ष में नहीं हैं। इन कर्मचारियों को एक अगस्त से ठेकेदार के अधीन करने की जानकारी जैसे ही मिली, वे विरोध पर आमादा हो गए और 31 अगस्त को काम से पृथक रहते हुए शहर के मुख्य मार्गों से रैली के शक्ल में अस्पताल परिसर में पहुंचे, और नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। इनके साथ में आए कर्मचारी नेताओं ने मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अविनाश मेश्राम और अस्पताल अधीक्षक डॉ. आरसी आर्या को ज्ञापन सौंपकर आउटसोर्सिंग पर रोक लगाने की मांग की। इनके द्वारा दिए गए एक दिवसीय अल्टीमेटम में बाद अस्पताल प्रबंधन ने स्वच्छकों से चर्चा करके इन्हें समझाइस दी थी, लेकिन आउटसोर्सिंग के तहत काम की शुरूआत के पहले दिन इन कर्मचारियों की काम पर वापसी नहीं हुई, जिससे स्वच्छता तो बरकरार रही, लेकिन वार्डों और ऑपरेशन थिएटर तक योगदान देने वाले कुशल कर्मचारियों की कमी महसूस होने लगी है। इससे जरूरतमंद मरीजों का ऑपरेशन प्रभावित हुआ है। सिर्फ इमरजेंसी केस का ही चिकित्सकों की टीम ने ऑपरेशन किया। वार्डों में सेवा देने वाली नर्सों को आवश्यक दवाओं के लिए चक्कर काटते देखा गया।
एसडीएम व अस्पताल प्रबंधन के साथ हुई बैठक
शुक्रवार को जिला प्रशासन की ओर से एसडीएम पहुंचे, और अस्पताल प्रबंधन के मौजूदगी में स्वच्छकों से चर्चा करके उन्हें शासन के निर्देश पर बनाई सफाई व्यवस्था की जानकारी दी। इन्हें बताया कि शासन के नियम और शर्तों के तहत पुराने कर्मचारियों को प्राथमिकता देते हुए काम पर रखना है। इन्हें पहले भी तत्संबंध में विस्तृत जानकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल प्रबंधन ने दी थी। शुक्रवार को हुई बैठक में इनसे काम पर वापसी की उम्मीद रखी गई थी, लेकिन स्थिति पूर्ववत बनी रही। बैठक के बाद सभी कर्मचारी अपने रास्ते निकल लिए। वहीं अस्पताल में आउटसोर्सिंग की व्यवस्था का विधिवत संचालन हो, इसके लिए बिलासपुर की बुंदेला सिक्यूरिटी नामक कंपनी के जिम्मेदार पहुंचे थे, इनके द्वारा नई भर्तियों के लिए आवेदन लेना शुरू कर दिया गया है।
ईपीएफ व ईएसआईसी के राशि की होगी कटौती
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि जीवनदीप समिति में कार्यरत कर्मचारियों को वर्तमान में कलेक्टर दर पर प्रतिमाह 10,916 रुपये भुगतान किया जाता है। इनके वेतन में से कुल 16.25 प्रतिशत राशि 1774 रुपये की कटौती कंपनी के द्वारा की जाएगी, जिसमें से 13 प्रतिशत ईपीएफ का 1419 रुपये, और कर्मचारी या उनके स्वजन के बीमार पड़ने की स्थिति में नि:शुल्क इलाज की सुविधा के लिए 3.25 प्रतिशत राशि, 355 रुपये ईएसआईसी के नाम पर कटेगा। ईपीएफ की राशि कर्मचारियों के खाते में जमा रहेगी, जिस पर सरकार की ओर से नियमानुसार ब्याज दिया जाएगा। डिजिटल पेमेंट होने के कारण किसी को कम वेतन देने जैसी नौबत नहीं बनेगी। इन बातों का ठेका प्रथा का विरोध करने वाले कर्मचारियों पर कितना असर पड़ा, यह तो फिलहाल सामने नहीं आया है।
सुपरवाइजर सहित 164 पदों का अनुमोदन
शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध अस्पताल के प्रबंधन की ओर से 4 सुपरवाइजर और 160 स्वच्छकों के लिए अनुमोदन किया गया है। देखा जाए तो जीवनदीप समिति के अंतर्गत कुल 289 कर्मचारी कार्यरत हैं, इनमें से 96 स्वच्छक हैं। इसके अलावा डाटा एंट्री सहित अन्य पदों पर कर्मचारी सेवा दे रहे हैं। प्रबंधन का कहना है कि इन कर्मचारियों के द्वारा काम बंद करने की सूचना नहीं दी गई थी। ज्ञापन सौंपने के बाद इनकी काम पर वापसी नहीं हुई, जो शासकीय नियम के विरूद्ध है। इसकी जानकारी वे कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर दे रहे हैं। शासन की नीति के तहत पहले से काम करने वाले कर्मचारियों को प्राथमिकता देना है। अगर नई भर्तियों की प्रक्रिया में तेजी आई तो इन कर्मचारियों का क्या होगा, यह यक्ष प्रश्न बना हुआ है।
इसलिए पेंडिंग रह गया था टेंडर
अस्पताल प्रबंधन की मानें तो अस्पताल की स्वच्छता के लिए टेंडर वर्ष 2023 में किया गया था, जो आपत्ति और लीगल कारणों से प्रभावित हुआ। इन प्रक्रियाओं की पूर्ति के बाद चुनावी आचार संहिता के कारण स्वच्छकों का आउटसोर्सिंग नहीं हो पाया था। इस वित्तीय वर्ष अनुमति के लिए किए गए पत्राचार के बाद जून माह में अस्पताल की स्वच्छता को ठेके पर देने की अनुमति मिली है। कम्पनी से एक साल के लिए अनुबंध किया गया है, 31 जुलाई 2026 के पूर्व ठेके का नवीनीकरण या नए ठेके की प्रक्रिया शासन स्तर पर शुरू होगी। बताया जा रहा है कि अस्पताल में सेवा दे रहे निजी कम्पनी के सुरक्षा गार्ड का आउटसोर्सिंग चालू माह, अगस्त 2025 में खत्म हो जाएगा। इसके एक्सटेंशन के लिए भी अस्पताल प्रबंधन की ओर से पत्राचार करने के निर्देश दिए गए हैं।
बयान
स्वच्छकों के हड़ताल से व्यवस्था प्रभावित हुई है। शुक्रवार को एसडीएम के मौजूदगी में हुई बैठक में इन्हें शासन के द्वारा सुनिश्चित की गई व्यवस्था से अक्षरश: अवगत करा दिया गया है। इमरजेंसी की स्थिति में दिक्कत जैसी स्थिति बनने का मामला मेरे संज्ञान में आया था। ऐसे हालात नहीं बनें, इसे देखते हुए ओटी, आईसीयू में दक्ष नियमित कर्मचारियों को जिम्मेदारी बांटी गई है। शुक्रवार को ऑपरेशन में किसी प्रकार का अवरोध होने जैसी स्थिति नहीं है।
डॉ. आरसी आर्या, अस्पताल अधीक्षक

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