सरगुजा बचाओ संघर्ष समिति ने बाहरी लोगों को मकान आबंटित करने का लगाया आरोप

प्रदर्शनकारियों को रोकने पुलिस ने बैरीकेड लगाया, रिंग रोड में घंटों लगा रहा जाम

अंबिकापुर। नगर पालिक निगम अंबिकापुर के द्वारा सुभाषनगर में प्रधानमंत्री आवास योजना शहर के एएचपी घटक, मोर मकान-मोर चिन्हारी अंतर्गत 493 आवासों का निर्माण किया गया है। इन आवासों का उद्देश्य सरगुजांचल के गरीब एवं मूल निवासियों को लाभान्वित करना है। सरगुजा बचाओ संघर्ष समिति ने इन आवासों के आबंटन को लेकर नगर पालिक निगम पर नियमों की अवहेलना करने आरोप लगाते हुए सोमवार को जमकर हल्ला बोला। इनका कहना है कि बाहरी राज्यों के लोगों से आवेदन प्राप्त करके उन्हें नगर निगम के द्वारा लाभान्वित किया जा रहा है, जबकि सरगुजा संभाग पांचवी अनुसूची क्षेत्र के अंतर्गत आता है। नगर निगम के घेराव की सूचना को लेकर पुलिस पहले से अलर्ट रही। एएसपी अमोलक सिंह ढिल्लो के नेतृत्व में नगर पालिक निगम कार्यालय के दोनों और लगभग सौ-डेढ़ सौ मीटर के फासले तक बैरीकेड लगाए गए थे, जिससे रिंग रोड से आवागमन घंटों अवरूद्ध रहा, और लोगों को आने-जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। दोपहर करीब 12 बजे से अवरूद्ध मार्ग से 4 बजे के बाद आवागमन सुचारू हो पाया। समिति के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने काफी देर तक शोर-शराबा के बाद निगम के आयुक्त के नाम ज्ञापन जिला प्रशासन की ओर से उपस्थिति तहसीलदार को सौंपा।

सरगुजा बचाओ संघर्ष समिति के डॉ. अमृत मरावी, सुभाष सिंह सहित अन्य ने कहा कि पांचवी अनुसूची क्षेत्र में बाहरी राज्य के व्यक्तियों को मूल निवासी मानकर बसाना संविधान की भावना के विपरीत और गंभीर चिंता का विषय है। संगठन द्वारा इस विषय में निरंतर आवेदन प्रस्तुत किए गया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। आरोप है कि बीते 07 जनवरी को निगम प्रशासन द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना एवं प्रचार-प्रसार के निर्माणाधीन स्थल पर कथित रूप से लॉटरी पद्धति से 67 हितग्राहियों को आवास आबंटित किया गया। वास्तविकता यह है कि उस दिन किसी प्रकार की पारदर्शी लॉटरी प्रक्रिया नहीं अपनाई गई, इसका कोई फोटो या वीडियो सार्वजनिक नहीं किया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया संदिग्ध प्रतीत होती है। ज्ञापन में उल्लेख है कि आवासों के आबंटन में निगम के कुछ अधिकारी-कर्मचारियों द्वारा अवैध रूप से धनराशि लेकर अनियमितता की गई है, जो जांच का विषय है। योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार, लक्षित हितग्राही समूह तक योजना की जानकारी पहुंचाने हेतु व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाना अनिवार्य था, किंतु ऐसा कोई प्रयास नहीं किया गया। इस कारण सरगुजांचल के वास्तविक मूलनिवासी इस योजना से वंचित रह गए। साथ ही, योजना में पात्रता हेतु 31.08.2015 से पूर्व निवासरत होना आवश्यक बताया गया है, जबकि पांचवी अनुसूची क्षेत्र में परंपरागत रूप से 2005 से पूर्व तीन पीढ़ियों से निवासरत मूल निवासियों को प्राथमिकता मिलनी थी। भारत के संविधान के अनुसार, अनुसूचित क्षेत्रों में किसी प्रकार की प्रशासनिक व्यवस्था लागू करते समय यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा एवं रीति-रिवाज प्रभावित न हों। वर्तमान में बाहरी बसाहट के माध्यम से इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है। इस दौरान काफी संख्या में समिति से जुड़े लोगों की उपस्थिति रही।

आवास आवंटन को निरस्त करने की मांग
सरगुजा बचाओ संघर्ष समिति ने मांग की है कि 07 जनवरी को 67 हितग्राहियों को किए गए आवास आवंटन को तत्काल निरस्त किया जाए। पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारी-कर्मचारियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की अनियमितताओं की पुनरावृत्ति न हो। योजना का प्रचार-प्रसार कर वास्तविक लक्षित हितग्राहियों से आवेदन आमंत्रित किया जाए। पांचवी अनुसूची क्षेत्र के मूल निवासी हितग्राहियों को पारदर्शी, लॉटरी प्रक्रिया से आवास आबंटित किया जाए। उक्त मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं होने पर सरगुजांचल के समस्त मूल निवासी उग्र आंदोलन करने बाध्य होंगे, इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

दुकानों के आवंटन में भी अनियमितता का आरोप
सरगुजा बचाओ संघर्ष समिति ने प्रतिक्षा बस स्टैंड परिसर में निर्मित दुकानों के आवंटन में भी अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए जांच एवं वैधानिक कार्रवाई हेतु आयुक्त के नाम ज्ञापन सौंपा है, इसमें उल्लेख है कि नगर पालिक निगम अंबिकापुर द्वारा दुकान आवंटन में गंभीर अनियमितता बरती गई है। आवंटन प्रक्रिया में निर्धारित नियमों, पात्रता, मानदंडों एवं शासन द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों का समुचित पालन नहीं करने का आरोप लगाते हुए अपात्र व्यक्तियों को अनुचित लाभ प्रदान करने की आशंका जताई गई है। मांग की गई है कि आवंटन प्रक्रिया की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच हेतु एक स्वतंत्र एवं सक्षम जांच समिति का गठन किया जाए। समस्त आवंटनों की नियमावली, पात्रता मानदंड एवं निर्देशिका की विस्तृत समीक्षा कराई जाए। जिन मामलों में नियमों का उल्लंघन पाया जाए, संबंधित आवंटनों को निरस्त करते हुए दोषियों के विरूद्ध वैधानिक एवं अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए स्थानीय निवासियों को शासन के प्रावधानों के अनुरूप प्राथमिकता दिया जाए।

निगम के कर्मचारी पर भी दोषारोपण
सरगुजा बचाओ संघर्ष समिति ने निगम में कार्यरत एक कर्मचारी पर शासकीय आवास योजनाओं का दुरुपयोग करने का गंभीर आरोप लगाया है। आरोप है कि उक्त कर्मचारी एवं उनके परिवार के सदस्यों द्वारा राजीव गांधी आश्रय योजना अंतर्गत अपात्र होते हुए भी लाभ प्राप्त किया गया है। एक ही परिवार द्वारा नियमों के विरुद्ध बहु-लाभ प्राप्त करना योजना के प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है। यह भी आरोप है कि सुभाषनगर स्थित प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत मोर मकान-मोर चिन्हारी योजना में भी संबंधित कर्मचारी द्वारा आम नागरिकों से आवंटन के नाम पर अवैध धन की मांग करते हुए वसूली की जा रही है। मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है।

 

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