सुखरी सहकारी समिति के अधीनस्थ गांवों को असिंचित घोषित करने और एनपीके की जगह दूसरा उर्वरक देने का विरोध
अंबिकापुर। सुखरी सहकारी समिति के अधीनस्थ गांवों को असिंचित घोषित करने और एनपीके की जगह 20:20:0 उर्वरक देने के विरोध में कांग्रेस ने ग्रामीणों के साथ मिलकर सहकारी समिति का घेराव किया। कांग्रेस के कड़े रुख के बाद प्रशासन ने समिति में 24 घण्टे में एनपीके उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।
घुनघुट्टा परियोजना के सिंचित क्षेत्र अंतर्गत आने वाले सुखरी समिति के गावों को इस बार असिंचित घोषित कर किसान क्रेडिट कार्ड बनाया गया है, जिससे किसानों का ऋण सीमा 50 हजार प्रति एकड़ से घटकर 40 हजार रुपये रह गया। जरूरत पड़ने पर वे फसल बीमा फायदे का समुचित लाभ भी नहीं ले सकेंगे। इधर किसानों के मन में घुनघुट्टा बांध से भविष्य में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिलने का डर सता रहा है। ग्रामीणों की मांग पर जिला कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और किसान नेता राकेश गुप्ता, कोषाध्यक्ष राजेश मलिक, ग्रामीण ब्लॉक अध्यक्ष विनय शर्मा, नुरुल अमीन सिद्दीकी ने सहकारी समिति के प्रबंधक से वस्तुस्थिति की जानकारी ली। प्रबंधक ने बताया पूर्व में यह क्षेत्र सिंचित था, इस बार जिला स्तर पर इसे असिंचित बता प्रकरण तैयार करने का निर्देश मिला था। उन्होंने सरगुजा की फसल के अनुरूप एनपीके 12:32:16 की जगह 20:20:0 उर्वरक मिलने की जानकारी दी। किसान नेता राकेश गुप्ता ने बताया सरकार द्वारा दिया जा रहे 20:20 खाद की कीमत 250 रुपये प्रति बोरी बढ़ा दी गई है। इस खाद को प्रति एकड़ 50 किलो की जगह 70 किलो डालना पडेगा, इसके साथ पोटाश भी खेतों में डालना आवश्यक है। इन सबके बाद भी एनपीके 12:32:16 के उपुयोग की तुलना में फसल 10 से 30 प्रतिशत तक प्रभावित होगी। इस बीच कांग्रेस के घेराव की सूचना पर जिला विपणन कार्यालय से एक ट्रक खाद सुखरी समिति को उपलब्ध कराया गया। डीएमओ के प्रतिनिधि ने कल तक 2 ट्रक 20:20 और एक गाड़ी एनपीके 12:32:16 उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है। इस दौरान शैलेन्द्र सोनी, आशीष वर्मा, नीतीश चौरसिया, फैसल सिद्दीकी, सुरेंद्र गुप्ता, लोलर सिंह सहित कांग्रेस कार्यकर्ता और ग्रामीण मौजूद थे।
सिंचित को असिंचित और जरूरत का खाद नहीं देना किसानों के साथ छल-टीएस
पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंह देव ने किसानी का मौसम शुरू होने से पहले समितियों में एनपीके 12:32:16 की अनुपलब्धता और सिंचित क्षेत्रों को असिंचित बताने पर चिंता जताते हुए इसे किसानों के साथ छल कहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री से तत्काल इस दिशा में पहल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि खरीफ सीजन में सर्वाधिक प्रचलित डीएपी 12:32:26 खाद की अनुपलब्धता एवं उपलब्ध एनपीके 20:20:0 की कीमत में गुपचुप तरीके से 250 रुपये प्रति बोरी की वृद्धि अनुचित है। खाद की उपलब्धता को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों की उदासीनता देख ऐसा लगता है कि किसानों की चिंताएं बढ़ने वाली हैं। केंद्र और राज्य सरकारों के कृषि मंत्री एनपीके खाद उपलब्ध कराने में अपनी असमर्थता जता चुके हैं। किसान भाजपा सरकारों की प्राथमिकता में कभी नही रहे हैं, यही कारण है कि दुनिया की चौथी अर्थव्यवस्था होने जा दावा करने वाली सरकार विदेशों से आयात होने वाले डीएपी के लिए विदेशी मुद्रा खर्च करने से बच रही है, भले ही किसान की पैदावार प्रभावित हो जाए। बड़ी बात यह है कि एनपीके खाद खुले बाजार में मौजूद है, लेकिन सहकारी समितियों में सरकार इसे उपलब्ध ही नहीं करा पा रही है। सरकार इस मामले में उदासीन रवैया अपनाएगी तो निश्चित ही प्रदेश के गरीब किसान खाद की कालाबाजारी के चपेट में आएंंगे जो उनके आर्थिक हितों पर नकारात्मक प्रभाव डालेगी।

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