सीएमडीसी ने माइनिंग प्लान में मैनपाट के बौद्ध मंदिर, पर्यटन स्थलों को छिपाया

पर्यावरणीय जनसुनवाई में नई बाक्साइट खदानों का जमकर हुआ विरोध 

अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के शिमला मैनपाट के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों के पास नए बाक्साइट खदान खोलने का जमकर विरोध हो रहा है। पर्यावरणीय जनसुनवाई में लोगों ने बाक्साइट खदानों का विरोध करते हुए बुधवार को जमकर हंगामा किया। इधर रोपाखार और कमलेश्वरपुर में नई बाक्साइट खदान खोलने के लिए पर्यावरण की जनसुनवाई में पहुंचे सीतापुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक रामकुमार टोप्पो ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में ये खदानें स्वीकृत की गई हैं। सीएमडीसी ने मंदिरों और पर्यटन स्थलों की जानकारी दस्तावेजों में छिपाई है, इसे सदन में उठाया जाएगा, किसी को नहीं बख्शा जाएगा।

बता दें कि, मैनपाट में चार नई बाक्साइट खदानें खोली जानी हैं, इनमें रोपाखार और कमलेश्वरपुर में नई बाक्साइट खदानें खोलने के लिए पर्यावरणीय जनसुनवाई बुधवार को कमलेश्वरपुर में आयोजित की गई। जनसुनवाई में नई खदानों का जमकर विरोध किया गया। पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने भी जनसुनवाई में पहुंचकर ग्रामीणों के साथ नई खदानों का विरोध किया और कहा कि बाक्साइट की खदानों से सिर्फ मैनपाट की बर्बादी हुई है। हाल में मां कुदरगढ़ी एलुमिना प्लांट द्वारा सीएमडीसी के खदानों से बाक्साइट उत्खनन किया जा रहा है। पर्यावरणीय जनसुवाई में इनके कुछ लोग खदानों के समर्थन में आगे आये, लेकिन हंगामे और विरोध के बीच इनकी आवाज दबी रह गई।

भूपेश सरकार के कार्यकाल में स्वीकृत हुई खदाने

जनसुनवाई में सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो भी पहुंचे, तब तक पूर्व मंत्री अमरजीत भगत वापस जा चुके थे। उन्होंने मैनपाट में बाक्साइट खदानें खुलने पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जिन चार खदानों के लिए वर्तमान में पर्यावरणीय जनसुनवाई हो रही है, वे भूपेश सरकार में वर्ष 2021-22 में स्वीकृत हुई थीं, तब अमरजीत भगत यहां के विधायक व सरकार में मंत्री थे। रामकुमार टोप्पो ने तंज कसा कि अमरजीत भगत थोड़ा पहले गरजे होते तो अब बारिश अच्छी होती।

बिना पंचायतों की सहमति के कैसे मिली स्वीकृति

रोपाखार के उप सरपंच रजनीश पांडेय ने कहा कि पंचायत को रोपाखार और कमलेश्वरपुर में नई खदानों के स्वीकृति की जानकारी तक नहीं है। इन खदानों की स्वीकृति के लिए बौद्ध मंदिर, प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों और रिजर्व फारेस्ट की जानकारी तक छिपा दी गई है। उन्होंने कहा कि मैनपाट में रोज हजारों की संख्या में पर्यटक आते हैं। इनसे सैकड़ों लोगों का रोजगार जुड़ा हुआ है। सीएमडीसी द्वारा फर्जी तरीके से बताया गया है कि इसमें 50-60 स्थानीय लोगों को रोजगार दिया जाएगा। पहले से मैनपाट में सात खदानें स्वीकृत हैं, जिनमें सीएमडीसी के अधिकारी और निजी कंपनियों के मालिकों द्वारा मिलीभगत करके नियमों को ताक में रखकर माइनिंग की जा रही है। मजदूरों का शोषण हो रहा है। इन खदानों की स्वीकृति किसी भी हाल में नहीं हो पाएगी और न ही सीएमडीसी को माइनिंग करने दिया जाएगा। गलत जानकारी देकर स्वीकृति का विरोध किया जाएगा।

विधायक ने कहा-सदन में उठेगा मामला

विधायक सीतापुर रामकुमार टोप्पो ने कहा कि सीएमडीसी ने जानकारी छिपाकर बाक्साइट खदान के लिए स्वीकृति प्राप्त की है। मैनपाट के कमलेश्वरपुर और रोपाखार में बौद्ध मंदिर, पर्यटन स्थलों की जानकारी सीएमडीसी के माइनिंग प्लान में छिपाई गई है। गलत जानकारी देकर खदान की स्वीकृति प्राप्त की गई है। वे इस मामले को सदन तक उठाएंगे। विधायक ने कहा वे ग्राम सभाओं की सहमति और आम सहमति के साथ हैं। यदि ग्रामसभा और स्थानीय ग्रामीण चाहेंगे तो ही खदानें खुलेंगी।

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