मां के कं्रदन से गूंजा मरच्यूरी, पिता का रो-रोकर था बुरा हाल

स्कूल प्रबंधन कह रहा दो दिन से था बीमार, स्वजनों को नहीं मिली जानकारी समाचार कव्हरेज से खफा प्राचार्य ने मीडियाकर्मी का कैमरा छीना

अंबिकापुर। सैनिक स्कूल अंबिकापुर में कक्षा छठवींं में अध्ययनरत एक कैडेट की बुधवार की सुबह मौत हो गई। स्वजनों ने 12 वर्षीय बच्चे का छह दिन पहले ही यहां दाखिला कराया था। बुधवार को सैनिक स्कूल प्रबंधन कैडेट को मेडिकल कॉलेज अस्पताल लेकर पहुंचा, यहां जांच के बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस दौरान उहापोह की स्थिति उस समय बन गई, जब बिलासपुर के बालक की मौत का समाचार कव्हरेज कर रहे इलेक्ट्रॉनिक मीडियाकर्मी का कैमरा सैनिक स्कूल की प्राचार्य कर्नल मिताली मधुमिता ने अपने कब्जे में ले लिया। इसकी खबर मिलने पर मणिपुर पुलिस थाना के प्रभारी प्रमोद पांडेय भी मेडिकल कॉलेज के मरच्यूरी में पहुंचे, इस दौरान उन्हें भी अपना परिचय प्राचार्य को देना पड़ा। स्कूल प्रबंधन से मिली सूचना पर स्वजन पहुंचे। छह दिन पूर्व सही सलामत छोड़कर गए बच्चे की मौत की खबर ने स्वजनों को द्रवित कर दिया, उनका रो-रोकर बुरा हाल था। बच्चे की मां नेहा डहरिया का कहना था यदि बेटे की तबीयत दो दिन से खराब थी तो उन्हें क्यों नहीं बताया गया। बच्चे को वे सैनिक स्कूल में छोड़कर आए थे, अस्पताल के मरच्यूरी में उन्हें क्यों लाया गया है। शव परीक्षण कक्ष के जिस कमरे में फ्रीजर में शव को रखा गया था, उसमें ताला बंद होने के कारण बाहर कुर्सी में बैठी बच्चे की मां को सांत्वना देने में लोग लगे थे, लेकिन बेटे को देखने के लिए लालायित मां के जेहन से एक ही आवाज निकल रही थी, मेरा बेटा रिशु कहां है। वह बार-बार चिल्लाते अपने बेटे को आवाज लगा रही थी। एक ही क्रंदन सुनने को मिल रहा था, रिशु…रिशु। जैसे ही मच्र्युरी का कक्ष खुला, अंदर पहुंची मां की चित्कार सुनने को मिली। इधर बच्चे के पिता भूतपूर्व सैनिक बलदेव डहरिया का भी रो-रोकर बुरा हाल था। नाश्ते के बाद तबीयत बिगडऩे की जानकारी दे रहा प्रबंधन अंबिकापुर में संचालित सैनिक स्कूल में देशभर के छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। छह दिन पहले ही यहां कक्षा छठवीं में दाखिला लिए मंदिर चौक जरहाभाटा बिलासपुर निवासी 12 वर्षीय छात्र ऋषभ डहरिया को स्वजन अनुशासनबद्ध शिक्षा लेने की उम्मीद में छोड़कर गए थे। सैनिक स्कूल प्रबंधन के द्वारा जारी एक नोट में बुधवार की सुबह नाश्ते के बाद उसकी तबियत बिगडऩे की जानकारी दी गई है। इसके बाद स्कूल प्रशासन उसे एंबुलेंस से मेडिकल कॉलेज अस्पताल लेकर पहुंचा, इसी बीच रास्ते में वह अचेत हो गया। मेडिकल कॉलेज अस्पताल के डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। छात्र की मौत की सूचना पर प्राचार्य, उप प्राचार्य सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी अस्पताल पहुंचे और मामले की सूचना छात्र के स्वजनों को दी। मीडियाकर्मी से कैमरा छीनने से बिगड़ा माहौल सैनिक स्कूल में छह दिन पूर्व दाखिल हुए कक्षा छठवीं के छात्र की संदिग्ध मौत की सूचना पर मीडिया कर्मी मामले का कवरेज करने मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचे थे। मृत छात्र का शव मरच्यूरी में रखा गया था। यहां कव्हरेज के दौरान सैनिक स्कूल की प्राचार्य कर्नल मिताली ने आपत्ति करते हुए कैमरा छीन लिया, जिससे माहौल गर्मा गया। किसी सवाल पर चुप्पी साधी सैनिक स्कूल की प्राचार्या के इस रूख के बनी स्थिति को देखते हुए मणिपुर थाना प्रभारी प्रमोद पांडेय भी मौके पर पहुंचे। उनकी मौजूदगी में कैमरे के फुटेज को हटाने दबाव बनाया गया। छात्र के स्वजनों सहित अन्य ने उठाया सवाल सैनिक स्कूल में छात्र के मौत की सूचना मिलने के बाद यहां पढऩे वाले कई बच्चों के स्वजन अस्पताल पहुंच गए। सभी का एक ही सवाल था, बच्चे की मौत किन परिस्थितियों में हुई लेकिन प्रबंधन की ओर से स्पष्ट जवाब देने वाला कोई नहीं था। प्राचार्य ने स्वयं को बयान देने के लिए अधिकृत नहीं होने की जानकारी अपने अधीनस्थों से दिलवाकर सैनिक स्कूल के पीआरओ से संपर्क करने कहा। इनके द्वारा उपलब्ध कराए गए मोबाइल नंबर को पीआरओ ने भी उठाने की जरूरत महसूस नहीं की। इधर बेटे का शव देख मां-पिता का रो-रोकर बुरा हाल था। छात्र की मां बार-बार कह रही थी कि जब उनके बेटे की तबीयत खराब थी, तो स्कूल प्रबंधन ने उन्हें सूचना क्यों नहीं दी। मौत के बाद उन्हें खबर दी जा रही है।

डाल्टेनगंज से मिली खबर और पहुंचे अस्पताल मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचे अन्य बच्चों के अभिभावक इस घटना को लेकर काफी क्षुब्ध थे। इनका कहना था कि इतने बड़े सैनिक स्कूल में इलाज के लिए कंपाउंडर है, जिसके व्यवहार को लेकर भी मौखिक उंगलियां उठ रही थी। एक अभिभावक ने बताया डाल्टेनगंज से एक रिश्तेदार ने फोन करके सैनिक स्कूल अंबिकापुर में बच्चे के मौत की जानकारी उन्हें दी, इसके बाद वे भागे-भागे अस्पताल आए। उन्होंने बताया उनका बच्चा कक्षा नवमीं में अध्ययनरत है। छह दिन पहले दाखिल बच्चे की मौत की खबर सुनने के बाद वे खुद को रोक नहीं पाए। जबकि यहां प्रवेश के पूर्व संपूर्ण स्वास्थ्य जांच कराया जाता है। न्यायिक मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में शव परीक्षण बच्चे के शव का परीक्षण न्यायिक मजिस्ट्रेट, नायब तहसीलदार संजीत पांडेय की मौजूदगी में किया गया। पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी पुलिस कराई है। डॉक्टरों की टीम ने बच्चे के शव का पोस्टमार्टम किया है। नायब तहसीलदार संजीत पांडेय ने बताया कि स्कूल प्रबंधन के अनुसार छात्र को दो दिन से बुखार था। बुधवार की सुबह नाश्ते के बाद उसके हाथ-पैर में दर्द शुरु हुआ और वह अचेत हो गया था। छात्र को मेडिकल कॉलेज अस्पताल लाया गया, यहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। उन्होंने कहा मौत का कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद ही सामने आ पाएगा।

 

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