रायपुर। राज्य के करीब ढाई करोड़ मतदाताओं में 1322 अपने पते पर नहीं मिले हैं। हालांकि अभी गणना पत्र जमा करने में अभी दो दिन बाकी है। बीएलओ के माध्यम से फार्म अभी भी घरों घर पहुंचाए जा रहे हैं। इस दौरान कई ऐसे फार्म हैं, जिनमें अधूरी जानकारी है या उनका क्रमांक गलत लिखकर जमा किया गया है। ऐसे फार्म लौटाए जा रहे हैं। जांच में पता चला है कि बेहद सामान्य गलतियां मतदाता कर रहे हैं, जैसे किसी का क्रमांक 194 है तो उन्होंने 154 लिख दिया है। इससे ऑनलाइन मतदाता सूची का मिलान नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे फार्म मतदाताओं को वापस किए जा रहे हैं। अफसरों के अनुसार 11 नवंबर तक सभी तक की त्रुटियों को ठीक कर लिया जाएगा।

राज्य में 2 करोड़ बारह लाख 30 हजार मतदाता हैं। इनमें से अब तक दो करोड़ बारह लाख उन्तीस हजार गणना पत्र बांटे जा चुके हैं। केवल 1322 फार्म बंटना बाकी हैं। हालांकि बीएलओ इन मतदाताओं के पते ठिकाने पता कर रहे हैं। पुरानी मतदाता सूची में उनके जो पते हैं अभी वे उसमें नहीं रह रहे हैं। कुछ मतदाताओं के मोबाइल नंबर मिले हैं लेकिन वे भी लगातार स्विच ऑफ आ रहे हैं। इस बीच बाकी जमा हो चुके फार्म की प्रारंभिक जांच शुरू कर दी गई है। परीक्षण के दौरान बेहद छोटी छोटी गलतियां सामने आ रही हैं। सबसे ज्यादा गलती पुरानी मतदाता सूची का क्रमांक लिखने में की जा रही है। पुरानी मतदाता सूची में कई अंक अस्पष्ट होने के कारण समझ नहीं आ रहे हैं। इस वजह से मतदाता अंकों में एक-दो नंबर गलत लिख रहे हैं। ऐसे फार्म की छंटाई कर उन्हें बीएलओ के माध्यम से लौटाया जा रहा है। ज्यादातर बीएलओ तो ऑन स्पॉट ही मतदाता को बुलाकर उनका फार्म दुरुस्त करवा रहे हैं।

कुल मतदाता – 2,12,30,737
प्रपत्र बांटे – 2,12,29,415 – 99.99%
डिजिटलाइज – 2,12,07785 – 99.89%

गणना प्रपत्र बांटने छत्तीसगढ़ पांचवे नंबर पर
गणना प्रपत्र बांटने और उसके डिजिटलाइजेशन के मामले में छत्तीसगढ़ 12 राज्यों में पांचवे नंबर पर पहुंच चुका है। छत्तीसगढ के ऊपर पुंडुचेरी, अंडमान एंड निकोबार, मध्यप्रदेश और लक्ष्यद्वीप हैं। इनमें लक्ष्यद्वीप, पुंडुचेरी और अंडमान तथा निकोबार तीनों राज्य जनसंख्या की दृष्टि से काफी छोटे हैं। पुंडुचेरी में 10 लाख, अंडमान में तीन लाख और लक्ष्यद्वीप में महज 57 हजार मतदाता हैं। छत्तीसगढ़ समेत बाकी राज्य 2 करोड़ से ज्यादा मतदाता संख्या वाले हैं। अधिक जनसंख्या वाले राज्यों में सिर्फ मध्यप्रदेश प्रपत्रो के डिजिटलाइजेशन के मामले में दूसरे नंबर पर है।

16 दिसंबर से शुरू होगी नाम काटने वालों की सुनवाई
11 दिसंबर तक प्रपत्रों को जमा करने के साथ उसके डिजिटलाइजेशन का काम पूरा कर लिया जाएगा। एक-दो दिन बाद सभी प्रपत्रों का सत्यापन कर 16 दिसंबर को मतदाता सूची का प्रारूप प्रकाशन होगा। ये सूची कलेक्टोरेट और तहसील कार्यालय में चस्पा की जाएगी। सूची से स्पष्ट हो जाएगा कि किनके नाम काटे गए और क्यों? जिन वोटरों के नाम काटे जाएंगे उनकी आपत्ति पर 16 दिसंबर से सुनवाई शुरू होगी। उन्हें 15 जनवरी 2026 तक का समय दिया जाएगा। यानी पूरे एक माह दावा-आपत्ति मंगाई जाएगी। इस बीच सुनवाई भी चलती रहेगी। 16 दिसंबर 2025 से 7 फरवरी 2026 तक आपत्तियों पर सुनवाई करने के साथ कमियां पूरी की जाएंगी। ऐसे मतदाता जो अपने फार्म की कमियों को पूरा करेंगे उनका नाम मतदाता सूची में जोड़ा जाएगा। 14 फरवरी को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन होगा। इस अंतिम प्रकाशन के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि वास्तव में कितने लोगों के नाम मतदाता सूची में हैं और कितने लोगों के नाम कटे हैं।

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