भारतीय वियरेबल मार्केट तेजी से बढ़ रहा है और 3000 रुपये से कम कीमत वाले सेगमेंट में ढेरों विकल्प मौजूद हैं। देसी कंपनियां तो 1000 रुपये से भी कम कीमत में स्मार्टवॉच खरीदने का विकल्प दे रही हैं लेकिन ज्यादातर स्मार्टवॉच मॉडल्स वाकई स्मार्ट हैं ही नहीं। हम ऐसा क्यों कह रहे हैं और सस्ती स्मार्टवॉच खरीदना आपपर क्यों भारी पड़ सकता है, समझना बेहद जरूरी है।

ज्यादातर स्मार्टवॉच मॉडल्स में बेसिक फीचर्स मिलते हैं और इन फीचर्स में कोई बदलाव नहीं किया जाता। सही मायनों में आप केवल उन्हीं वॉचेज को स्मार्ट कह सकते हैं, जिनमें ऐप्स इंस्टॉल की जा सकें और जिनके फंक्शंस में बदलाव किया जा सके। हालांकि अब कंपनियां कई स्मार्ट फीचर्स को अपने सस्ते वियरेबल्स का हिस्सा बना रही हैं लेकिन इनपर यूजर्स को नियंत्रण नहीं मिलता।

WearOS आधारित स्मार्टवॉच बेहतर
अगर आपका बजट ज्यादा है तो सही मायनों में आपको वही स्मार्टवॉच खरीदनी चाहिए, जो WearOS पर काम करती है। इस स्मार्टवॉच को ना सिर्फ बेहतर सॉफ्टवेयर अपडेट्स और फंक्शंस मिलते हैं, बल्कि इसमें गूगल प्ले स्टोर के जरिए ढेरों ऐप्स डाउनलोड करने का विकल्प मिलता है। इसके अलावा एंड्रॉयड स्मार्टफोन्स के साथ ढेरों स्मार्ट फीचर्स का इंटीग्रेशन देखने को मिल जाता है।

सस्ती स्मार्टवॉच पर ना करें भरोसा
स्टाइल और डिजाइन के चक्कर में अगर आप सस्ती स्मार्टवॉच खरीदने जा रहे हैं या फिर आपने सस्ती स्मार्टवॉच खरीदी है तो उसके हेल्थ फीचर्स पर भरोसा करना भारी पड़ सकता है। हार्ट रेट से लेकर ब्लड ऑक्सीजन लेवल तक यूजर्स को दी जाने वाली जानकारी पर भरोसा नहीं किया जा सकता। कई वॉचेज तो गाजर-मूली जैसी सब्जियों के लिए भी इन हेल्थ पैरामीटर्स की रीडिंग्स दे देती हैं।

दरअसल, ज्यादातर स्मार्टवॉच कंपनियां केवल स्टाइलिश डिजाइन की बदौलत अपनी सस्ती वॉचेज बेच रही हैं। कुछ कंपनियां की वॉच के विज्ञापन, फोटोज और वीडियोज में दिख रहा मॉडल असली प्रोडक्ट से अलग होता है और वे स्क्रीन साइज ज्यादा दिखाती हैं। कंपनियां खुद कहती हैं कि इनके जरिए मिलने वाले मेडिकल डाटा पर भरोसा नहीं किया जाना चाहिए।

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