पीड़ित बोले-बिना समय बताए लिफाफा खोल दिया, दस्तावेज नहीं दिखाया

अंबिकापुर। शहर के जिला न्यायालय परिसर में वाहन स्टैंड और फोटोकॉपी दुकान के आवंटन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक कर्मचारी संघ जिला शाखा द्वारा जारी निविदा प्रक्रिया को लोग सवालों के घेरे में ले रहे हैं। आरोप है कि निविदा में निर्धारित नियमों की अनदेखी करके, सबसे अधिक बोली लगाने वाले पात्र आवेदकों को दरकिनार कर दुकानें अन्य लोगों को आवंटित कर दी गई हैं।

बता दें कि, संघ द्वारा 13.07.2026 से 23.07.2026 तक वाहन स्टैंड और फोटोकॉपी दुकान संचालन के लिए निविदाएं आमंत्रित की गई थीं। निविदा 24.07.2026 को खोली जानी थी। निविदा दस्तावेज के अनुसार नियम-2 में स्पष्ट लिखा है कि सभी आवेदन पत्रों को खोलने के पश्चात जिस आवेदक ने सबसे अधिक बोली लगाई होगी, उसे समिति के अध्यक्ष या प्राधिकृत अधिकारी द्वारा सफल बोलीदाता घोषित किया जाएगा। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि सबसे अधिक बोली लगाने के बावजूद उन्हें दुकान नहीं दी गई। नियमों के विपरीत किसी अन्य व्यक्ति के नाम आवंटन कर दिया गया। कहना है कि उन्हें इस प्रक्रिया के दौरान भ्रमित किया गया, पारदर्शिता नहीं बरती गई। जब इस मामले में समिति के सदस्यों से सवाल पूछा गया तो उन्होंने किसी भी प्रकार की जानकारी देने या बताने से इंकार कर दिया। इससे आवेदकों का शक और गहरा गया है। पीड़ितों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और नियमों के अनुसार पात्र आवेदकों को ही आवंटन दिया जाए। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और न्यायिक विभाग इस विवाद पर क्या कदम उठाता है। फिलहाल आवंटन प्रक्रिया पर उठे सवालों से असंतोष का माहौल बना हुआ है।

निविदा की प्रमुख शर्तें  

जारी निविदा सूचना के अनुसार बोली राशि का 25 प्रतिशत डिमांड ड्राफ्ट/बैंकर्स चेक के रूप में जमा करना था। आवंटन अवधि वर्ष है, जिसे प्रधान जिला न्यायाधीश की अनुमति से 5 प्रतिशत वृद्धि के साथ बढ़ाया जा सकता है। किराया हर माह की 10 तारीख तक संघ के बैंक खाते में जमा करना अनिवार्य है। शुल्क दर साइकिल 5 रुपये, मोटरसाइकिल 10 रुपये, चारपहिया 20 रुपये प्रतिदिन निर्धारित है।

आवेदकों ने जताया संदेह

आवेदकों में से एक मोहम्मद इमरान ने मीडिया के सामने पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाए और कहा कि एक हफ्ते पहले जिला न्यायालय अंबिकापुर में फोटोकॉपी और साइकिल स्टैंड के लिए निविदा निकली गई थी, जिसमें उन्होंने फॉर्म भरा। निविदा खुलने की तारीख शुक्रवार तय थी। सुबह 10 बजे ऑफिस जाकर उन्होंने पूछा कि कितने टाइम निविदा खुलेगा, क्योंकि समय निर्धारित नहीं था। उन्हें लंच के बाद बताया गया, फिर 1 बजे, डेढ़-दो बजे गया तो कहा गया कि निविदा हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि निविदा की प्राप्ति हाई एमाउंट को होनी थी, उन्होंने पूछा सर कितना हाईएस्ट में निविदा खुला है, तो उन्होंने 51 हजार 100 रुपये बताया, और उसने भी 51 हजार का ही निविदा फार्म भरा था। ऐसे में उन्होंने निविदा प्रक्रिया पर संदेह व्यक्त किया है, क्योंकि अभी तक कोई डाक्यूमेंट उन्हें नहीं दिखाया गया है। वरुण विश्वकर्मा सहित एक अन्य ने कहा कि, बिना आवेदक के आए हुए निविदा का लिफाफा खोल दिया गया। टेंडर किसको दिया, कुछ पता नहीं। नाम बताने से भी गुरेज किया जा रहा है। समिति के सदस्य भी टालमटोल कर रहे हैं। आवेदकों ने प्रधान जिला न्यायाधीश से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और पारदर्शी प्रक्रिया से दोबारा आवंटन कराने की मांग की है।

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