अंबिकापुर प्रवास के दौरान डीजीपी ने पुलिस महकमे की कमियों को दूर करने दी हिदायत

आईजी करेंगे राजपत्रित अधिकारियों के कार्यों का निरंतर पर्यवेक्षण

अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक अरूण देव गौतम ने अंबिकापुर प्रवास दौरान सरगुजा संभाग के सभी पुलिस अधीक्षकों, राजपत्रित अधिकारियों के साथ बैठक लेकर अपराधिक गतिविधियों के पर्यवेक्षण पर विस्तार से चर्चा की, और थाना स्तर पर किसी मामले में बारीकी से पर्यवेक्षण पुलिस अधिकारियों से करने कहा। उन्होंने कहा कि थाना इंचार्ज और अमले को थाना क्षेत्र की पूरी जानकारी होनी चाहिए, कम्युनिटी संवाद ज्यादा से ज्यादा हो, ताकि सूचनाओं का आदान-प्रदान आसानी से हो। उन्होंने रेंज के पुलिस महानिरीक्षक को एसडीओपी के कार्यों की निरंतर समीक्षा और पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी दी है। बैठक के बाद पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा बैठक के दौरान सामने आई कमियों को दूर करने के लिए कहा गया है। उन्होंने अपेक्षा व्यक्त की, कमियों को दूर होने से पुलिस थाना के कार्यप्रणाली में सुधार आएगा। बैठक के बाद पत्रकारों से चर्चा के दौरान उन्होंने विभिन्न विषयों पर संवाद करते हुए किए गए सवालों का जवाब दिया।
पुलिस महानिदेशक ने नशीले पदार्थों के कारोबार को रोकने की दिशा में पुलिस के द्वारा किए जा रहे प्रयासों की कड़ी में कहा कि गांजा, अफीम हो या कोई और ड्रग्स, इसकी मांग बढ़ने के साथ सप्लाई बढ़ती है। इसके लिए समाज को भी जागरूक होना होगा। हर किसी को अपने परिवार और आसपास ध्यान देना होगा, जिससे नशे के कारोबार पर विराम लगे। उन्होंने कहा यह काम सिर्फ पुलिस का नहीं है, समाज के बीच विपरीत प्रभाव न पड़े और आने वाली पीढ़ी को नशा से बचाने के लिए हर परिवार, शिक्षक, एनजीओ, अस्पताल, समाज कल्याण विभाग, खेल एवं युवा कल्याण विभाग सभी को अपनी भूमिका का निर्वहन करना होगा। उन्होंने कहा कि डिपेंड ऑन ड्रग्स के कारण कभी-कभी स्थिति यहां तक बनती है कि किसी को जिंदा रखने के लिए नशीली चीजें देनी पड़ती है। एक समय नक्सल क्षेत्रों में काफी गांजा होता था, और इसका हिस्सा नक्सलियों को भी मिलता था, वर्तमान में ऐसे हालात नहीं है। इस दौरान रेंज के पुलिस महानिरीक्षक दीपक कुमार झा, डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सरगुजा राजेश अग्रवाल सहित रेंज के सभी जिले के एसपी उपस्थित थे।

गलत तरीके से एंट्री पाने वाले आरक्षक नहीं कर सकतेे अच्छा काम
पुलिस विभाग में आरक्षकों की होने वाली भर्तियों में भ्रष्टाचार और योग्य लोगों को दरकिनार करने के परिप्रेक्ष्य में उन्होंने कहा आरक्षक पुलिस विभाग की रीढ़ हैं। अगर इनकी एंट्री ही गलत तरीके से होगी तो वे अच्छा काम नहीं कर पाएंगे। इन भर्तियों में भ्रष्टाचार न हो, पारदर्शिता रहे, आने वाले समय में इस दिशा में कोशिश रहेगी। उन्होंने कहा गलत तरीके से आरक्षक बनने वाला अच्छा काम नहीं कर सकता है। पुलिस को मिलने वाले कम भत्ता के सवाल पर उन्होंने कहा कि जवानों का मनोबल पैसे से नहीं बढ़ता, प्रदेश में पुलिस कर्मियों की तनख्वाह अन्य प्रदेशों के वनिस्पत कम नहीं है। हाईटेक यातायात थाना के सवाल पर उन्होंने कहा सरकार स्तर पर समयानुसार मांग रखी जाती है, मैनपावर के चैलेंज जैसी स्थिति भी बनती है। किसी क्षेत्र की आबादी बढ़ने के साथ सरकार के ध्यान में मांग को लाया जाता है।

अफीम की खेती के मामले में व्यवसायिक उपयोग के साक्ष्य मिले
प्रदेश में चर्चित अफीम की खेती और पुलिस के द्वारा की जा रही कार्रवाई के बीच अब तक सामने आए तथ्य के परिप्रेक्ष्य में उन्होंने कहा कि प्रोफेशनल तौर पर अफीम का क्या उपयोग है, इसे तराशने पर सामने आया है कि राजस्थान, बिहार, झारखंड के ऐसे लोग, जिन्हें अफीम के बारे में पता है, वे छत्तीसगढ़ के कुछ इलाके में ट्रायबल क्षेत्र के लोगों की लीज पर जमीन लेकर खीरा, ककड़ी के आड़ में खेती करने में लगे थे। इसके व्यवसायिक उपयोग के साक्ष्य भी मिले हैं। पुलिस को प्रकार की अवैध नशीला कारोबार हो, इसे लेकर सतर्क रहने कहा गया है।

नई पीढ़ी को एक जिम्मेदार नागरिक बनने का एहसास कराएं
पथभ्रमित होते युवाओं व बढ़ रही दोपहिया राइडिंग की प्रवृत्ति के सवाल पर पुलिस महानिदेशक अरूण देव गौतम ने कहा नई पीढ़ी को संवारने में परिवार और स्कूल की भूमिका महत्वपूर्ण है। हर बच्चे को सही संस्कार और शिक्षा मिले, एक जिम्मेदार नागरिक बनने का एहसास हो, तभी वे सभ्य संस्कृति का हिस्सा बन पाएंगे। उन्होंने कहा पुलिस कम उम्र के बच्चों को वाहन चलाते पाने पर मालिक के विरूद्ध कार्रवाई करती है। वहीं उच्च न्यायालय ने भी बीच सड़क में वाहन खड़ा करके केक काटने सहित अन्य मामलों को संज्ञान में लिया है। पुलिसिया कार्रवाई के बीच नई पीढ़ी सही दिशा में जाएं, इसके लिए हर किसी को जागरूक होने की जरूरत है।

छत्तीसगढ़ में अब हथियारबंद नक्सली नहीं
पुलिस महानिदेशक अरूण देव गौतम ने कहा नक्सल ऑपरेशन अभियान प्रदेश में सफल हुआ है। वर्तमान में इक्का-दुक्का नक्सली हथियार छोड़कर गांव में छिपे हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में हथियारबंद नक्सली नहीं हैं।

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