महिला थाना अंबिकापुर में हुई काउंसलिंग में नहीं पहुंचे आरोपी, पति सहित 4 के विरूद्ध केस दर्ज

 

अंबिकापुर। विवाह में 25 लाख रुपये नकद, लाखों का जेवरात सहित अन्य कीमती सामान देने के बाद भी दहेज लोभियों ने अपने सपूत को कमाऊ बताकर 10 लाख रुपये मायके से लेकर आने के लिए न सिर्फ प्रताड़ित किया बल्कि गर्भावस्था के दौरान उसे लावारिस हाल में छोड़ दिया। यही नहीं बेटी के जन्म लेने की खबर पर काफी भला-बुरा कहकर मां-बेटी को अपमानित करने लगे। महिला थाना अंबिकापुर की पुलिस दोनों पक्षों को बुलाकर काउंसलिंग की। पहली बार विवाहिता के पति उपस्थित हुए, लेकिन पत्नी को साथ लेकर जाने के लिए तैयार नहीं थे। पुलिस ने विवाहिता का दाम्पत्य जीवन सुरक्षित रहे, इस सोच को लेकर दोबारा काउंसलिंग की, लेकिन ससुराल पक्ष से कोई भी नहीं आया। अंतत: पुलिस ने पति, सास, ननद व ननदोई के विरूद्ध केस दर्ज कर लिया है।

जानकारी के मुताबिक पीजी कॉलेज के सामने दत्ता कॉलोनी में रहने वाली साक्षी सिंह पुत्री मनोज कुमार सिंह का विवाह 5 फरवरी 2022 को सौरव कुमार सिंह पुत्र स्व. सुनील सिंह, निवासी मोहल्ला हरिहरपुर नीलमथा लखनऊ उत्तर प्रदेश के साथ मनेन्द्रगढ़ रोड में स्थित एक मैरिज लॉन में हुआ था। विवाह के दौरान दहेज में नगद 25 लाख रुपये लेने के बाद भी पति सौरव कुमार सिंह, सास निर्मला सिंह, ननद श्वेता सिंह, ननदोई शशिकांत सिंह खुश नहीं थे, जबकि नकद रकम के अलावा साक्षी के पिता ने स्त्री धन के रूप में सोने-चांदी का 10 लाख रुपये का जेवरात दिया था, वहीं बारातियों के स्वागत के लिए की गई व्यवस्था में लाखों रुपये फूंका था। विवाह के बाद जब वह ससुराल गई तो जेवरात घर में रखने पर चोरी होने का भय दिखाकर उसकी सास के बैंक लॉकर में रखवा दिया गया। इसके बाद पति, सास, ननद व ननदोई कम दहेज लाने की बात कहते हुए नवविवाहिता पर पिता से नगद 10 लाख रुपये और मांगने के लिए दबाव बनाने लगे। विवाह में भरपूर खर्च करने के बाद भी बनी स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त दहेज देने से मायका पक्ष इन्कार कर दिया। इसके बाद पति, सास, ननद, ननदोई उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित करते हुए बार-बार कम दहेज के लिए उलाहना देने लगे। ननदोई शशिकांत द्वारा 10 लाख रुपये नहीं देने पर सौरव को कमाऊ लड़का बताते हुए दूसरी शादी कर देने की धमकी दी गई। विवाहिता जब इनकी बातों का विरोध की तो सास व ननद गाली-गलौज करते हुए मारपीट करके मायके वालों की तरफदारी करने की बात कहते हुए जान से मार देने की धमकी देने लगे। कहा गया कि किचन में आग लगने से खाना बनाते समय तुम्हारे जैसी लड़कियां मर जाती हैं, बात नहीं मानने पर तुम्हारे साथ भी ऐसा हो सकता है। इन सबके बीच जब मायके पक्ष के लोग उसे विदा कराकर मायके ला रहे थे, तब भी पति सहित सभी 10 लाख रुपये मिलने के बाद ही उसे विदा कराकर लाने की चेतावनी दिए। काफी समझाइस और अनुनय-विनय काम नहीं आया और उसके पति ने लड़ाई-झगड़ा के लिए आमादा होते हुए विदाई करने से इंकार कर दिया। काफी समझाने एवं हाथ जोड़ने पर विदाई हुई।

गर्भपात के लिए सीढ़ी से धक्का देकर गिराया
साक्षी के पुन: ससुराल पहुंचने पर रुपये लेकर नहीं आने कस उलाहना देकर मारपीट करते हुए जान से मारने की धमकी दी गई। गर्भवती होने पर सीढ़ी से धक्का दे दिया गया, ताकि गर्भपात हो जाए। इसकी जानकारी मिलने पर मायके से माता-पिता पहुंचे और पुलिस को बुलाया। उसकी हालत व ससुराल में हुई घटना को देखते हुए प्रसव होने तक उसे ससुराल से अलग पति के साथ रहने कहा गया, परन्तु आवेदिका का पति गर्भावस्था के दौरान देखभाल नहीं किया, जिस कारण विवाहिता की मां को रूकना पड़ा। 15.10.2024 को आवेदिका ने पुत्री को लखनऊ के अस्पताल में जन्म दिया। पुत्री के जन्म की खबर से ससुराल पक्ष के लोग और नाराज हो गए।

लखनऊ पुलिस शिकायत पर नहीं की कार्रवाई
पुत्री के जन्म के बाद 16.10.2024 को पति शराब पीकर अपने दोस्तों के साथ अस्पताल पहुंचा और गाली देते हुए मारपीट पर आमादा हो गया। इस दौरान अस्पताल के कर्मचारियों व विवाहिता की मां ने बीच-बचाव करके पुलिस को बुलाया। कार्रवाई के बजाय पुलिस पारिवारिक मामला व अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद शिकायत पत्र देने की बात कहते हुए वापस चली गई। अस्पताल से छुट्टी मिलने पर 18.10.2024 को लखनऊ पुलिस को शिकायत पत्र देने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। ससुराल पक्ष के रवैये को देखकर बेटी के साथ मां को पास के होटल में इलाज के लिए रूकना पड़ा, जिसका पूरा खर्च उन्होंने स्वयं निर्वहन किया। इलाज के बाद 28.10.2024 को पुत्री को लेकर लाचार मां अंबिकापुर आ गई। साक्षी के पिता ने पति व ससुराल वालों से बात करके सुलह का प्रयास किया, परंतु वे उसे ले जाने के लिए तैयार नहीं हुए।

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