कलेक्टोरेट पहुंचे ग्रामीणों ने कहा-अतिक्रमण नहीं हटा तो वन समिति करेगी कार्रवाई

गिरिजा ठाकुर 

अंबिकापुर।प्रशासन जहां एक ओर अतिक्रमित भूमि से कब्जा हटाने में लगा है, वहीं शिकायत के बाद भी वन भूमि से अतिक्रमण नहीं हटने की स्थिति में ग्रामीण कलेक्टर के पास गुहार लगाने मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में उन्होंने वन भूमि पर अतिक्रमण के लिए किए जा रहे वनों के सफाया की शिकायत जिला प्रशासन के अलावा वन अधिकारियों से की है, लेकिन कब्जे को हटाने सुध नहीं ली जा रही है। मैनपाट प्रखंड से तीन पिकअप वाहन में सवार होकर पहुंचे सौ से अधिक ग्रामीणों ने कहा कि जिस वन भूमि की संपदा का उपयोग हक दिया गया है, उस भूमि पर कब्जा करने वनोपज को नष्ट कर दिया जा रहा है। इससे उनकी आजीविका से जुड़े स्त्रोत खत्म हो रहे हंै। आरोप है कि अभी तक लगभग 30-35 एकड़ भूमि पर कब्जा करके दूसरे गांव के आधा दर्जन से अधिक लोग झोपड़ी, मचान बना चुके हैं, जोताई कर खेती कर रहे हैं। ऐसा लगता है कि इन्हें कब्जा करने की जिम्मेदारों ने छूट दे दी है।  

जानकारी के मुताबिक मैनपाट वन परिक्षेत्र के ग्राम पंचायत असकरा, वन कम्पार्टमेंट पीएफ 2469, पीएफ 2470, पीएफ 2471 में ग्राम पंचायत गोविंदपुर, करदना के लोग वन संपदा को नष्ट करके अतिक्रमित भूमि पर घर और जमीन की जोताई करके खेती करने में लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि असकरा के ग्रामीणों ने इस वन भूमि का सामुदायिक वन संसाधनों के लिए हक विधिवत प्रदान किया गया है, इसका लाभ अनुसूचित जनजाति व अन्य परम्परागत वन निवासी दोनों वर्ग ले सकते हैं। सामुदायिक वन संसाधन रूढ़िजन्य सीमा, प्रमुख सीमा चिन्ह तथा कम्पार्टमेंट संख्या में भीतर 584.54 हेक्टेयर में फैला हुआ है, इसकी पुष्टि शासन की ओर से कलेक्टर जिला सरगुजा, वन मंडलाधिकारी व सहायक आयुक्त आदिवासी विकास अभिकरण सरगुजा ने सामुदायिक वन संसाधनों के लिए दिए गए हक के उपबंध-4 प्रपत्र में की है। इसके बावजूद उक्त भूमि पर अक्रिमण धड़ल्ले से किया जा रहा है। इसकी जानकारी विधायक सीतापुर राम कुमार टोप्पो, एसडीएम सीतापुर, तहसीलदार मैनपाट को भी दी गई है। बहरहाल कलेक्टर के जनदर्शन में आवेदन देने के बाद ग्रामीणों को उम्मीद है कि वन भूमि से कब्जा हटाने की पहल प्रशासन करेगा। ग्रामीणों ने कहा है कि अतिक्रमण प्रशासन के द्वारा नहीं हटाए जाने की स्थिति में ग्राम पंचायत असकरा वन समिति के द्वारा कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति बनने पर इसका जिम्मेदार प्रशासन होगा।

सीमा चिन्हांकन के बाद बाहरी लोग दिखा रहे दबंगई
ग्राम पंचायत असकरा के सरपंच नरेश मिंज, सुरेश, अजय पैकरा, जोसेफ मिंज, सुरेन्द्र टोप्पो, प्रेमसाय, बैजनाथ, चिरलू, मुकेश एक्का, पकल मांझी, लूरसाय मांझी, मोहरसाय पहाड़ी कोरवा, मानसाय पहाड़ी कोरवा, चनीराम पहाड़ी कोरवा सहित अन्य का कहना है कि उनके गांव की रूढ़िजन्य सीमा पूर्व में सामर लोट, सोमार ढोढा, कुमडी सिलार, मनराख, पश्चिम में मुर्ताडांड, नदी ढाब, सिवान सरई, असकरा ढाब, उत्तर में मुसाखोल, बाघ ढोड़गा, सेमर ढाब, मड़वा सरई, दक्षिण में झुरई बधान, टंगराडिहारी, बजराबारी, बीहीडांड़ है। प्रमुख सीमा चिन्ह से लगे गांव कुनिया, कलजीवा, करदना, गोविन्दपुर, मालतीपुर हैं। वन भूमि के कम्पार्टमेंट सीमा पीएफ 2469, पीएफ 2470, पीएफ 2471 के भीतर 588.54 हे. भूमि पर ग्रामसभा को सामुदायिक वन संसाधनों के संरक्षा, पुनरूज्जीवित करने, परिरक्षित करने तथा प्रबंध करने का अधिकार प्राप्त है। इसी क्रम में सामुदायिक वन संसाधन का उपयोग अधिनियम की धारा 3 (1)(झ) के अनुसार संधार्य, उपयोग के लिए पारंपरिक रूप से संरक्षण और परिरक्षण करते रहे हैं। चिन्हांकित भूमि के अंदर अतिक्रमण से ग्रामीणों में आक्रोश है।

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