बिश्रामपुर। एसईसीएल बिश्रामपुर के रेहर भूमिगत खदान से गत वर्ष दो करोड़ रुपए के कोयला शार्टेज का मामला आज पर्यंत तक लंबित है। दो करोड़ से अधिक का कोयला शार्टेज का मामला सामने आने के बाद एसईसीएल प्रबंधन द्वारा मामले में प्रथम दृष्टया दोषी माने गए अधिकारियों का बिश्रामपुर क्षेत्र से दूसरे क्षेत्रों में तबादला करने के बाद मामले को ठंडे बस्ते में डालकर दोषी अधिकारियों को एसईसीएल प्रबंधन द्वारा बचाए जाने का आरोप असंगठित कामगार कांग्रेस के सूरजपुर जिलाध्यक्ष ने लगाया है।असंगठित कामगार कांग्रेस जिलाध्यक्ष संदीप शर्मा ने मामले में कोल इंडिया सीएमडी व कोयला मंत्रालय को पत्र लिखकर प्रकरण की स्वतंत्र एजेंसी से नए सिरे से जांच कराए जाने की मांग की है।
      ज्ञात हो कि गत वर्ष जुलाई माह में एसईसीएल की सतर्कता विभाग की टीम ने एक गोपनीय शिकायत पर एसईसीएल बिश्रामपुर के रेहर भूमिगत खदान में औचक जांच कार्रवाई के दौरान कोल स्टॉक में 2700 टन कोयला कम पाया था, जिसकी कीमत दो करोड़ रुपए से अधिक बताई गई थी। अलग-अलग चरणों में तीन राउंड हुए जांच के बाद रिपोर्ट को टीम ने मुख्यालय में जमा कर दिया था। जांच में गड़बड़ी प्रमाणित होने के बाद संबंधित अधिकारियों ने जांच से बचने वास्तविक कोयला उत्पादन की जगह अंडर रिपोर्टिंग का भी मामला तब सामने आया था। इस दौरान अधिकारियों ने स्टॉक में बड़ी मात्रा में सेल व मिट्टी मिला शार्टेज कम करने के प्रयास भी किए थे। मामला उजागर होने के बाद एसईसीएल बिलासपुर प्रबंधन ने प्रथम दृष्टिया दोषी माने गए खदान के मैनेजर फिरोज अहमद अंसारी, तत्कालीन डिप्टी जीएम एमके चौधरी, एरिया सर्वे ऑफिसर, खदान के सर्वेयर सहित अन्य का तबादला दूसरे क्षेत्रों में कर दिया था। बताया जा रहा है कि विजलेंस विभाग द्वारा अब तक प्रकरण की जांच को पूरा नहीं किया जा सका है। संबंधित अधिकारी भी जांच से बचने मामले को दबाने पैरवी में जुटे हैं। मामले में गड़बड़ी में शामिल कुछ अधिकारी रिटायर हो चुके हैं और कुछ आने वाले दिनों में रिटायर होने वाले हैं। ऐसे में जांच के नाम पर जानबूझकर लेट लतीफी कर विजलेंस विभाग दोषी अधिकारियों को बचाने में लगा है, ऐसा प्रतीत होता है। उन्होंने बताया कि दो करोड़ रुपए के कोयला अफरा तफरी का मामला डेढ़ साल पुराना है, बावजूद इसके मामले की जांच अब तक पूरी नहीं होने से कई प्रकार की शंका उत्पन्न हो रही है। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि प्रबंधन जान बूझकर मामले की जांच पूरी नहीं होने दे रहा ताकि अपना दामन बचाया जा सके।

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