अभी तक 07 फर्जी जन्म प्रमाणपत्र का मामला आया सामने, पुलिस को भी सौंपा गयामामलाअंबिकापुर। सरगुजा जिला में फर्जी तरीके से जन्म प्रमाणपत्र बनाने का काम धड़ल्ले से चलने संबंधित समाचार ‘छत्तीसगढ़ फ्रंटलाइनÓ ने 28 फरवरी को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। मामले को सरगुजा कलेक्टर विलास भोस्कर ने संज्ञान में लेते हुए जहां एक ओर लखनपुर विकासखंड के चुकनडांड निवासी कामेश्वर राजवाड़े के मामले में जांच करने के आदेश दिए हैं, वहीं मामले की जांच के लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सरगुजा ने 4 सदस्यीय टीम का गठन किया है। टीम तीन दिन के अंदर जांच प्रतिवेदन रिपोर्ट सीएमएचओ को सौंपेगी, सीएमएचओ के द्वारा जांच रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपा जाएगा। फर्जी जन्म प्रमाणपत्र का मामला सामने आने के बाद अभी तक छह और फर्जी जन्म प्रमाणपत्र जारी होने के मामले सामने आ चुके हैं, जो देखने में वास्तविक जन्म प्रमाणपत्र के समान हैं। मामले की गहन पड़ताल हो तो फर्जीवाड़े में लगे बड़े गिरोह की सक्रियता का पर्दाफास हो सकता है।

बता दें कि बीते 27 फरवरी, गुरूवार को जन्म प्रमाणपत्र लेकर आधार कार्ड सुधरवाने लोक स्वास्थ्य एवं यांत्रिकी विभाग में चौकीदार के पद पर पदस्थ शासकीय कर्मचारी कामेश्वर राजवाड़े ई-सेवा केन्द्र प्रभारी वैभाव सिंह के दफ्तर में पहुंचा था। अधिकारी को वह बताया कि आधार कार्ड में उसका जन्म तिथि 1950 अंकित है, जबकि पेन कार्ड व अन्य दस्तावेज में जन्मतिथि 1962 है। इस कारण उसे दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। सेवानिवृत्ति की स्थिति में उसे और भी कठिनाइयों से जूझना पड़ेगा। कक्षा 5वीं तक पढ़े चौकीदार ने सामने आ रही समस्या के निराकरण व आधार कार्ड में जन्म तिथि सुधरवाने की पहल की तो पता चला कि इसके लिए कक्षा 10वीं का अंकसूची होना जरूरी है। सेवानिवृति का समय नजदीक आते देखकर उसकी चिंता और बढ़ गई। इस समस्या से वह अपने भतीजे को अवगत कराया, तो वह लखनपुर में ऑनलाइन काम करने वाले एक युवक से संपर्क करके उसका जन्म प्रमाणपत्र किसी से फोन पर संपर्क करके बनवा दिया था, इसके एवज में चौकीदार ने 11 सौ रुपये दिए थे। ऑनलाइन जन्म प्रमाणपत्र कामेश्वर को मिला और वह इसे लेकर अपना आधार कार्ड सुधरवाने कलेक्टोरेट परिसर अंबिकापुर में स्थित ई-सेवा केन्द्र पहुंच गया। यहां ऑपरेटर ने उसके जन्म प्रमाणपत्र का क्यूआर कोड स्कैन किया तो उसका लिंक फर्जी निकला। फर्जीवाड़ा सामने आने पर ई-जिला प्रबंधक वैभव सिंह ने इसकी जानकारी सरगुजा कलेक्टर को दी थी, जिसके पंजीकरण की तारीख में 07.05.1965 उल्लेख किया गया है, जबकि उक्त तिथि को जिला अस्पताल अंबिकापुर में ऑनलाइन जन्म-मृत्यु पंजीयन जैसी सुविधा ही नहीं थी। इसे 16 जनवरी 2025 को छत्तीसगढ़ शासन, योजना और विकास विभाग, जिला अस्पताल अंबिकापुर से जारी करने का उल्लेख किया गया है। इसमें प्राधिकारी के हस्ताक्षर रजिस्ट्रार जन्म एवं मृत्यु, जिला अस्पताल अंबिकापुर का डिजिटल हस्ताक्षर हंै।
ऑनलाइन सेंटरों की होगी नियमित जांच
फर्जी जन्म प्रमाणपत्र का मामला सामने आने व ई-जिला प्रबंधक वैभव सिंह के द्वारा मामला संज्ञान में लाने के बाद सरगुजा कलेक्टर विलास भोस्कर ने विभिन्न माध्यमों से संचालित ऑनलाइन सेंटरों, च्वाइस सेंटरों के नियमित जांच हेतु टीम का गठन कर दिया है। इसका नोडल अधिकारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत को बनाया गया है। टीम में जिले के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के अलावा अन्य अधिकारी शामिल किए गए हैं। टीम के द्वारा हर तीन माह में की गई जांच संबंधित रिपोर्ट से कलेक्टर को अवगत कराया जाएगा।
जन्म प्रमाणपत्र की जांच के लिए टीम गठित
फर्जी प्रमाणपत्र शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय संबद्ध जिला अस्पताल से जारी हुआ है या नहीं, इसमें लगे सील, साइन सही हैं या फर्जी, इसकी पुष्टि के लिए कलेक्टर सरगुजा के कार्यालय से जारी पत्र 04 मार्च को सीएमएचओ कार्यालय पहुंच चुका है। सीएमएचओ ने इसके लिए जांच टीम का गठन भी कर दिया है, जिसमें डॉ. वाईके किण्डो, डॉ. संदीप त्रिपाठी, डॉ. सीमा तिग्गा व मुख्य लिपित विनोद शुक्ला शामिल किए गए हैं। इनके द्वारा जांच प्रतिवेदन 03 दिन के अंदर सीएमएचओ को प्रेषित किया जाएगा।
एमएस ने पुलिस को फर्जीवाड़े की दी जानकारी
जिला योजना सांख्यिकी अधिकारी एवं रजिस्ट्रार, जन्म-मृत्यु पंजीयन के द्वारा भी असंवैधानिक तरीके से ऑफ लाइन जन्म प्रमाणपत्रों को ऑनलाइन किए जाने व फर्जी प्रमाणपत्र बनाए जाने के मामले को गंभीरता से लेते हुए शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय संबद्ध जिला अस्पताल के अधीक्षक को पत्र प्रेषित किया है। इधर संयुक्त संचालक सह अधीक्षक ने कलेक्टर के निर्देश पर 05 मार्च को थाना प्रभारी मणिपुर को आवश्यक जांच, कार्रवाई के लिए पत्र प्रेषित करके फर्जी जन्म प्रमाणपत्र की जानकारी दी है, जिसमें अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक के फर्जी डिजिटल हस्ताक्षर भी हैं।
रिकार्ड रूम के कर्मचारियों तक भी पहुंचा मामला
अस्पताल के जन्म-मृत्यु शाखा में भी फर्जी तरीके से जन्म प्रमाणपत्र का सत्यापन कराने की कोशिश कुछ लोगों के द्वारा की जा चुकी है, पूछताछ में जब संदेह उत्पन्न होने की बारी आई तो कुछ तो अपना फर्जी ऑनलाइन प्रमाणपत्र छोड़कर ही रफूचक्कर हो लिए। ऐसे छह ऑनलाइन जैसे दिखने वाले जन्म प्रमाणपत्र इनके हाथ लगे हैं, जो सौ फीसदी फर्जी तरीके से बनाए गए हैं। इसका सत्यापन कराने के लिए पहुंचे लोगों के द्वारा यहां के कर्मचारियों से बहस और हुज्जत जैसी स्थिति भी निर्मित की गई थी, लेकिन उन्होंने संदेह होने पर इसका सत्यापन नहीं किया। इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को अस्पताल प्रबंधन की ओर से लिखित में दी गई है। इन मामलों को भी पुलिस को सौंपा जा रहा है ताकि फर्जीवाड़े में लगे गिरोह का पर्दाफास हो सके।
सत्यापन के लिए लेकर पहुंचे फर्जी जन्म प्रमाणपत्र
शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय संबद्ध जिला अस्पताल के जन्म-मृत्यु शाखा में अभी तक सीधे छह ऐसे प्रमाणपत्र पहुंचे हैं, जो गहन तहकीकात के बाद फर्जी साबित हुए हैं। इनमें सरगुजा जिला के प्रीति पैकरा पिता फुरसातन पैकरा निवासी ग्राम महिला गंवटियापारा, लमगांव बतौली जन्म दिनांक 08.08.2006, जन्म प्रमाणपत्र जारी दिनांक 15.02.2005, मनीष कुमार सिंह पिता विनोद सिंह निवासी ग्राम कवरपारा, कुसू पोस्ट तुरना जन्म दिनांक 15.06.2006, जारी दिनांक 15.11.2024, उर्मिला पिता भुखन राम निवासी ग्राम बिहारपुर, पोस्ट करवां जिला सूरजपुर, जन्म दिनांक 25.07.1970, जारी दिनांक 29.02.2024, अहमद खान पिता अकबर निवासी नवागढ़ अंबिकापुर, जन्म दिनांक 12.01.1984, जारी दिनांक 03.01.2025, रेशमा पैकरा पिता कृपाशंकर पैकरा जन्म दिनांक 17.03.2006, जारी दिनांक 20.01.2025 व करीना पैकरा पिता कृपाशंकर पैकरा जन्म दिनांक 11.01.2011, जारी दिनांक 05.02.2025 दोनों निवासी ग्राम गहिला गवटियापारा, लमगांव बतौली के जारी जन्म प्रमाणपत्र शामिल हैं। इसके अलावा एक फर्जी जन्म प्रमाणपत्र ई-जिला प्रबंधक वैभव सिंह के माध्यम से कामेश्वर राजवाड़े पिता जुगेश्वर राम निवासी ग्राम चुकनडांड लखनपुर का सामने लाया गया है।

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