न्यूरोसर्जन के लिए लेबल-2 का ट्रामा यूनिट जरूरी, करना होगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अस्तित्व में आने का इंतजार
अंबिकापुर। शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय संबद्ध जिला अस्पताल में ट्रामा सेंटर की स्थापना के बाद न्यूरोसर्जन के उपलब्धता की उम्मीद खत्म हो गई है। इसके पीछे बड़ा कारण यहां शासन द्वारा स्वीकृत किए गए ट्रामा सेंटर का लेबल-3 का होना है, लेबल-2 के ट्रामा सेंटर में न्यूरोसर्जन का पोस्ट रहता है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अस्तित्व में आने के बाद ही लेबल-2 के ट्रामा सेंटर में न्यूरोसर्जन की सुविधा जरूरतमंदों, पीड़ितों को मिल पाएगी। वहीं पूर्व में यहां न्यूरो सर्जन सहित सर्व सुविधायुक्त ट्रामा सेंटर की बात कही गई थी। इसके बाद भी अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि लेवल-3 के ट्रामा सेंटर मेें बेहतर सुविधा मिल रही है। देखा जाए जो इस अस्पताल में ट्रामा सेंटर नाम का है, वास्तव में यह आर्थोपेडिक विभाग बनकर रह गया है।
बता दें कि वर्ष 2020 में ट्रामा सेंटर के लिए टेंडर जारी होने के बाद इंफ्रास्ट्रक्चर व उपकरण के लिए शासन द्वारा एक करोड़ रुपये की स्वीकृत दी गई थी, लेकिन नवंबर 2023 में केवल ग्राउंड लेवल का भवन ही तैयार हो पाया, जहां आज की स्थिति में आर्थोपेडिक विभाग संचालित हो रहा है। ट्रामा सेंटर की सोच मूर्तरूप नहीं हो पाई है। शासन द्वारा जारी राशि खर्च होने के बावजूद सरगुजा संभाग के गंभीर मरीजों को रायपुर रेफर करना मजबूरी बनी हुई है। देखा जाए तो ट्रामा सेंटर का सपना 4 साल बाद भी पूरा नहीं हो पाया है। अस्पताल परिसर में ट्रामा सेंटर लिखा हुआ भवन जरूर देखने को मिलेगा, पर यह ट्रामा यूनिट के अनुरूप दी जाने वाली सुविधाओं से अछूता है। यहां के लिए 80 प्रतिशत उपकरण शासन की ओर से उपलब्ध कराने की बातें सामने आ रही हैं, जो शो पीस बनकर धूल खा रहा है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि बगैर ट्रामा सेंटर के यहां मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही हैं।
कमियों को पूरा किए बिना करा दिया उद्घाटन
ट्रामा सेंटर के सफरनामा पर नजर डालें तो वर्ष 2023 में ट्रामा सेंटर का भवन तैयार हुआ, जो आज भी अपूर्ण है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि ट्रामा सेंटर के लिए फर्स्ट फ्लोर में निर्माण की आवश्यकता है। नवंबर 2023 में आधे-अधूरे भवन का उद्घाटन पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव के हाथों कमियों को दूर किए बिना करा दिया गया। इस दौरान बताया गया था कि बहुत जल्द ही उपकरण व विशेषज्ञ चिकित्सकों की सुविधा यहां मिलेगी, लेकिन ट्रामा सेंटर उद्घाटन के बाद ऑर्थोपेडिक विभाग बनकर रह गया है।
लेबल-3 के हिसाब से भी भवन पूर्ण नहीं
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि ट्रामा सेंटर का भवन उन्होंने अपने अधीन नहीं लिया है। शासन की इकाई सीजीएमएससी के द्वारा भवन का आधा-अधूरा निर्माण करने की जानकारी भी शासन को दी गई है। मेडिकल कॉलेज के अधिष्ठाता के द्वारा भी बैठक में लेबल-3 के हिसाब से ट्रामा सेंटर के भवन को पूर्ण कराने शासन का ध्यानाकर्षण कराया है। ट्रामा सेंटर में 10 बेड के वार्ड का प्रावधान है, इसकी कमी खल रही है। ऐसे में देखा जाए तो ट्रामा सेंटर लेबल-3 के हिसाब से भी पूर्ण नहीं माना जा सकता है।
बिना ट्रामा सेंटर के दे रहे बेहतर सुविधा-डॉ. आर्या
अस्पताल अधीक्षक डॉ. आरसी आर्या का कहना है कि ट्रामा सेंटर के लिए शासन से एक करोड़ रुपये भवन व उपकरण के लिए स्वीकृत हुआ था। इसका निर्माण कार्य सीजीएमएससी द्वारा किया गया है, अभी भी भवन आधा-अधूरा है। ग्राउंड फ्लोर के बाद फर्स्ट फ्लोर का निर्माण होना है, इसके लिए शासन से पत्राचार किया गया है। ट्रामा सेंटर के लिए ओटी व वार्ड का निर्माण नहीं हो सका है। न्यूरोसर्जन के उपलब्धता के सवाल पर उन्होंने कहा कि यहां शासन द्वारा लेवल-3 के ट्रामा सेंटर की स्वीकृति दी गई है, जिस कारण यहां न्यूरो सर्जन की सुविधा नहीं मिलेगी। डॉ. आर्या का कहना है कि लेवल-3 के ट्रामा सेंटर से बेहतर सुविधा हम लोग बिना ट्रामा सेंटर के ही दे रहे हैं।

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