पहले जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ा विभाग, फिर राजस्व अमले के साथ आया हरकत में
अंबिकापुर। वन विभाग एवं राजस्व अमले की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए बिना अनुमति लिए 20 ट्रक से अधिक काटे गए नीलगिरी की लकड़ी को जप्त किया है, जिसकी तस्करी दिगर प्रांतों में की जा रही है। सरगुजा के अलग-अलग इलाकों में इसका गोरखधंधा चलने की बातें सामने आ रही हैं। मामला सामने आने के बाद हरकत में आए राजस्व व वन अमले ने संयुक्त कार्रवाई की है। वहीं प्रशासन की ओर से जारी किए गए सार्वजनिक सूचना में आगाह कराया गया है कि कई गांवों में निजी राजस्व भूमि पर लगाए गए यूकेलिप्टस, नीलगिरी के पेड़ों को किसान काटकर निजी व्यक्तियों को बेच रहे हैं, जो नियम विरूद्ध है। इसके लिए एसडीएम राजस्व की पूर्व अनुमति आवश्यक है, इसके बाद ही वन विभाग एनओसी जारी करेगा।
सरगुजा जिले के लखनपुर, उदयपुर वनपरिक्षेत्र में प्राकृतिक सौंदर्यता को नष्ट करने का काम यूं तो लंबे समय से चल रहा है। एक तरफ अडानी को कोयले की आपूर्ति के लिए हजारों पेड़ों की कटाई स्वयं पुलिस और प्रशासन का अमला कराते नजर आया, जिसमें राजनीतिक रोटी सेंकने का काम सत्ता पक्ष करते रहा। कुछ प्रकृति प्रेमी एनजीओ कथित रूप से विरोध में खड़े नजर आते रहे, दूसरी तरफ लखनपुर वनपरिक्षेत्र में हजारों की संख्या में नीलगिरी की लकड़ी को हजारों की संख्या में काटकर लखनपुर के जय दुर्गा राइस मिल के बगल में, गौरव पथ के ब्रिक्स मोड में, देवगढ़ जाने वाले रास्ते में, अंधला राइस मिल के बगल व गोरता में डंप किया गया है। इसका परिवहन बिना बीट पास के उत्तर प्रदेश होते हुए हरियाणा करने की बातें सामने आ रही है, जो जिम्मेदारों के मिलीभगत बिना होना संभव नहीं है। नियम पर नजर डालें तो कोई भी प्राइवेट भूमि पर लकड़ी की कटाई करता है तो उसकी अनुमति अनुविभागीय अधिकारी एवं वन विभाग से प्राप्त करता है, लेकिन इसकी कोई अनुमति लकड़ी तस्करों के द्वारा प्राप्त नहीं की गई है। लकड़ी तस्करों के द्वारा कटे हुए पेड़ों के डगाल को जलाकर कोयला बनाया और विक्रय किया जा रहा है। लकड़ी जलाने के लिए अलग से 10-15 स्थान पर बड़े-बड़े ईंट के चिमनी बनेे हैं जहां रात-दिन लकड़ी जलाकर इसका कोयला निकाला जा रहा है। इस संबंध में अधिवक्ता डॉक्टर डीके सोनी ने व्हाट्सएप के माध्यम से डीएफओ अंबिकापुर से शिकायत की तो वे पल्ला झाड़ते हुए इसे राजस्व का मामला बताने लगे और राजस्व विभाग के पास शिकायत करने पर वे वन विभाग पर ठीकरा फोड़ दिए। इस तरह दोनों विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी मढ़ते रहे। इसके बाद अचानक राजस्व व वन विभाग के द्वारा दी गई संयुक्त दबिश व कार्रवाई की बात सामने आई है। यही नहीं, इनके द्वारा बकायदा प्रशासन के माध्यम से इस बात को सामने लाने का भी प्रयास किया गया है कि बिना एसडीएम की अनुमति के नीलगिरी के पेड़ों को नहीं काटा जा सकता है, वह चाहे किसी की निजी भूमि में ही क्यों न हो।
डीएफओ ने कहा-एसडीएम राजस्व से अनुमति जरूरी
डीएफओ तेजस शेखर का कहना है कि नियमों के अनुसार राजस्व क्षेत्र की निजी भूमि पर ऐसे पेड़ों की कटाई के लिए उपमंडल दंडाधिकारी, एसडीएम राजस्व की पूर्व अनुमति आवश्यक है। इस अनुमति के आधार पर वन विभाग द्वारा ऑनलाइन एनटीपीएस प्रणाली के माध्यम से परिवहन हेतु अनापत्ति प्रमाण पत्र एनओसी जारी किया जाता है। वन विभाग द्वारा यह जानकारी समय-समय पर टिम्बर एसोसिएशन एवं अन्य सार्वजनिक मंचों के माध्यम से व्यापक रूप से प्रसारित की गई है। उन्होंने जनहित में एनओसी से संबंधित जानकारी के लिए संबंधित रेंज कार्यालय से संपर्क करने कहा है।

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