जिले के सीतापुर का एक च्वाइस सेंटर भी आया है सुर्खियों में
अंबिकापुर। सरगुजा जिले में परिवहन विभाग व च्वाइस सेंटर के माध्यम से दिव्यांगों का ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने का नया करनामा सामने आया है। सारे नियम को दरकिनार करके ऐसे दिव्यांग का लाइसेंस विभाग ने जारी कर दिया है, जो किसी भी परिस्थिति में लाइसेंस के पात्र नहीं हो सकते हैं। लर्निंग लाइसेंस बनाने विभाग ने किस तकनीकि से टेस्ट लिया, जिससे उन्हें लाइसेंस बनवाने वाले की दिव्यांगता का आभास तक नहीं हुआ, यह समझ से परे है।
बताया जा रहा है कि बजरंग लाल जायसवाल बलरामपुर जिले का रहने वाला है, जो वर्तमान में अंबिकापुर में ही रहता है। वह बोल और सुन नहीं सकता है। ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए वह अंबिकापुर परिवहन विभाग के कार्यालय में एजेंट के माध्यम से 19 जून 2024 को आवेदन किया था। इसके बाद सारे नियमों को ताक पर रखकर दिव्यांग व्यक्ति के नाम से ड्राइविंग लाइसेंस जारी कर दिया गया। जबकि लाइसेंसधारक के डिस्ट्रिक्ट मेडिकल बोर्ड के द्वारा डिसएबिलिटी सर्टिफिकेट जारी किया गया है। ऐसा ही एक मामला सीतापुर से भी सामने आया है, जिसमें च्वाइस सेंटर के द्वारा आंख से देखने की क्षमता कम होने के बाद भी लाइसेंस जारी कर दिया गया। प्रावधान के अनुरूप लाइसेंस धारक के आंखों से देखने की क्षमता कम से कम 600 मीटर होनी चाहिए। सूत्रों की मानें तो इसका पर्दाफास उस समय हुआ, जब लाइसेंस धारकों के द्वारा परमानेंट लाइसेंस के लिए आवेदन देकर जोर-आजमाइश शुरू की गई। मेडिकल बोर्ड का प्रमाणपत्र देखकर विभाग के टीआई ने हाथ खड़े कर लिए।
कलेक्टर ने कहा-आरटीओ से लेंगे जानकारी
कलेक्टर विलास भोस्कर ने दिव्यांगों का लाइसेंस जारी करने संबंधी ध्यानाकर्षण कराने पर कहा कि उनके पास लिखित में ऐसा कोई शिकायत नहीं आया है, फिर भी आरटीओ से वे इसकी जानकारी लेंगे। अगर गलत तरीके से लाइसेंस जारी किया गया है तो दोषी के विरूद्ध कार्रवाई भी की जाएगी।

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