सरगुजा । गांधी जयंती के राष्ट्रीय अवकाश के दिन स्कूल में लगभग 200 बच्चों को बुलाकर एक कथित धार्मिक सभा आयोजित किए जाने के मामले में कार्मेल स्कूल प्रबंधन पर प्रशासनिक शिकंजा कसता जा रहा है। कलेक्टर विलास भोस्कर द्वारा स्कूल प्रबंधन को इस संबंध में जारी किए गए नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया है, जिससे मामला और गंभीर हो गया है। कलेक्टर ने इस घटना के साथ-साथ स्कूल में हुई पिछली कानून-व्यवस्था संबंधी घटनाओं का हवाला देते हुए स्कूल की मान्यता रद्द करने की सिफारिश कर दी है।

गांधी जयंती के दिन स्कूल में कथित धर्म सभा का आयोजन
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब गांधी जयंती, जो कि एक राष्ट्रीय अवकाश का दिन है, पर सरगुजा के कार्मेल मिशनरी स्कूल में 200 बच्चों को बुलाकर एक कथित कैथोलिक बाल धर्म सभा का आयोजन किया गया। इस सभा में अन्य धर्मों के बच्चों को भी शामिल किए जाने का आरोप लगाया गया, जिससे शहर के अभिभावकों में आक्रोश फैल गया। घटना की जानकारी मिलते ही कई अभिभावक स्कूल पहुंचे और हंगामा करने लगे।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने तुरंत एसडीएम, जिला शिक्षा अधिकारी और पुलिस की टीम को मौके पर भेजा। जांच के दौरान प्रशासन को कई तथ्य मिले, जिनसे यह संकेत मिला कि स्कूल में नियमों का उल्लंघन हुआ है। मामले के तूल पकड़ने के बाद स्कूल प्रबंधन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था।

स्कूल प्रबंधन का जवाब असंतोषजनक
प्रशासन द्वारा जारी नोटिस के जवाब में कार्मेल स्कूल प्रबंधन ने दावा किया कि उन्होंने किसी प्रकार की धर्म सभा का आयोजन नहीं किया था। इसके विपरीत, उनका कहना था कि यह एक कैथोलिक बाल धर्म सभा थी जिसमें केवल कैथोलिक समुदाय के बच्चों को बुलाया गया था। हालांकि, इस जवाब से प्रशासन संतुष्ट नहीं हुआ, क्योंकि किसी भी स्कूल में किसी भी प्रकार की धार्मिक सभा का आयोजन करना शैक्षणिक नियमों और संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।

कलेक्टर ने अपने नोटिस में यह भी स्पष्ट किया कि संविधान के अनुसार स्कूलों में धर्मनिरपेक्षता बनाए रखना अनिवार्य है और किसी भी विशेष धर्म की शिक्षा देना या प्रचार करना संविधान के 42वें संशोधन और सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ है।

कलेक्टर की सख्त टिप्पणी
कलेक्टर विलास भोस्कर ने स्पष्ट रूप से कहा कि स्कूल की जिम्मेदारी होती है कि वह बच्चों को एक सुरक्षित, धर्मनिरपेक्ष और समावेशी वातावरण प्रदान करे। उन्होंने कहा कि अगर बच्चों को विशेष धर्म की शिक्षा दी जाएगी, तो उनमें धर्मनिरपेक्ष दृष्टिकोण कैसे विकसित होगा?

उन्होंने यह भी कहा कि पिछले एक वर्ष में कार्मेल स्कूल में कानून व्यवस्था बिगड़ने की कई घटनाएं सामने आई हैं, और इन घटनाओं के लिए स्कूल प्रबंधन को ही जिम्मेदार ठहराया गया है। इसके साथ ही, कलेक्टर ने कहा कि यदि स्कूल प्रशासन अपने उत्तरदायित्वों का सही ढंग से पालन नहीं करता है, तो स्कूल की मान्यता रद्द करना आवश्यक हो जाता है।

आदिवासी समाज और विश्व हिंदू परिषद की प्रतिक्रियाएं
इस घटना को लेकर दो अलग-अलग सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। आदिवासी ईसाई महासभा ने स्कूल के समर्थन में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा, जबकि विश्व हिंदू परिषद ने स्कूल में धर्मांतरण के आरोप लगाते हुए कलेक्टर से स्कूल की मान्यता रद्द करने की मांग की।

कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि स्कूल की गलतियों को छिपाने के लिए किसी भी सामाजिक संगठन का समर्थन करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह अपने परिसर में स्वच्छ और समावेशी वातावरण बनाए रखे, न कि बाहरी लोगों की मदद से अपने कर्तव्यों से पल्ला झाड़े।
कलेक्टर द्वारा जारी नोटिस का विवरण

कलेक्टर द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है:
भारत के संविधान की आत्मा धर्मनिरपेक्षता है और 42वें संशोधन के तहत संविधान की इस मूल संरचना में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने भी स्पष्ट रूप से कहा है कि संविधान की मूल संरचना में कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता।

स्कूलों का उद्देश्य बच्चों में एक समावेशी दृष्टिकोण विकसित करना है, न कि किसी विशेष धर्म की शिक्षा देकर उन्हें अन्य धर्मों के प्रति भेदभावपूर्ण बनाना।
कार्मेल स्कूल द्वारा विशेष धर्म के बच्चों को धार्मिक शिक्षा देने से संविधान की भावना का उल्लंघन हो रहा है। इससे बच्चों के मन में धर्मनिरपेक्षता की भावना विकसित नहीं हो पाएगी।

कलेक्टर ने इस नोटिस के आधार पर जिला शिक्षा अधिकारी को स्कूल की मान्यता रद्द करने की सिफारिश की है, साथ ही केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) को भी इस मामले में कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

कार्मेल स्कूल में हुए इस विवाद ने शहर में शिक्षा और धार्मिक गतिविधियों के बीच संतुलन के मुद्दे को उभारा है। प्रशासन इस मामले में सख्त है और स्कूल की मान्यता को लेकर कड़ा निर्णय लेने की तैयारी में है। स्कूल प्रबंधन से अब तक मिले जवाब असंतोषजनक पाए गए हैं, और अगर आगे की जांच में भी स्कूल दोषी पाया गया, तो उनकी मान्यता रद्द होने की पूरी संभावना है।

 

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