गांव के जागरूक युवक की पहल पर पीड़ित को एंबुलेंस से भेजा गया अस्पताल
अंबिकापुर। सरगुजा जिले के मैनपाट विकासखंड अंतर्गत ग्राम सुपलगा में बीते मंगलवार को आकाशीय बिजली की चपेट में आने से गंभीर रूप से घायल हुए युवक को गोबर से भरे गड्ढे में डुबो दिया गया। ऐसा करने वालों का मानना था कि ऐसा करने से आकाशीय बिजली के चपेट में आए व्यक्ति को राहत मिलेगी। इसे अंधविश्वास की पराकाष्ठा मानकर गांव के ही एक जागरूक व्यक्ति ने पीड़ित को संजीवनी 108 एंबुलेंस बुलाकर अस्पताल भेजा। इलाज के बाद हालत में सुधार होने पर पीड़ित को बुधवार को अस्पताल से डिस्चार्ज करके घर भेज दिया गया है।
जानकारी के मुताबिक मैनपाट विकासखंड अंतर्गत ग्राम सुपलगा निवासी बनवारी बैगा मंगलवार को दोपहर में मवेशी चरा रहा था। इसी बीच अचानक बारिश के साथ आकाशीय बिजली कौंधने लगी। इसकी चपेट में आने से बनवारी गंभीर रूप से घायल हो गया। इसकी जानकारी स्वजनों को मिली और वे युवक को आननफानन में कथित रूप से राहत दिलाने के लिए घंटों गोबर के गड्ढे में डालकर रखे थे। पीड़ित का सिर्फ सिर बाहर था, पूरा शरीर गोबर में डूबा हुआ था। बताया जा रहा है कि उक्त पीड़ित ग्रामीण घण्टों गोबर के बीच रहा, उसे होश नहीं आया था। इसी बीच गांव के ही एक शख्स ने युवक की गंभीर हालत को देखते हुए संजीवनी 108 एंबुलेंस के लिए फोन किया और आकाशीय बिजली की चपेट में ग्रामीण के आने की जानकारी दी। इसके बाद मौके पर एंबुलेंस के साथ पायलट और ईएमटी पहुंचे और गोबर में डुबोकर रखे गए युवक को तत्काल अस्पताल ले जाने के लिए प्रेरित किया। समय रहते अस्पताल में मिली इलाज की सुविधा के कारण वह सही सलामत बच गया। एंबुलेंस के कर्मचारियों की मदद से भर्ती किए गए ग्रामीण के स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है।
अंधनिष्ठा से जुड़े ऐसे कई मामले आ चुके हैं सामने
आकाशीय बिजली की चपेट में आने से बनने वाली गंभीर स्थिति के बाद ग्रामीण क्षेत्र में लोग आज भी गोबर का लेप करने या गोबर में पीड़ित को डुबो देने को रामबाण इलाज मानते हैं। ऐसे कई मामले सरगुजा जिला व संभाग में सामने आ चुके हैं। इसे भले ही लोग अंधमान्यता कहें लेकिन ग्रामीण इसे शर्तिया इलाज मानते हैं, जिस कारण पीड़ित को अस्पताल ले जाने में विलंब की स्थिति बनती है और कभी-कभी पीड़ित की स्थिति खतरे में भी पड़ जाती है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि आकाशीय बिजली जिस वेग से गिरती है और इसके बाद संबंधित पीड़ित को जो मनोदशा रहती है, उसे देखते हुए बिना विलंब किए चिकित्सा सुविधा दिलाने के लिए उसे अस्पताल ले जाना चाहिए।

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