अंबिकापुर। प्रतापपुर विकासखंड के उप स्वास्थ केन्द्र गोवर्धनपुर में आरएचओ के पद पर पदस्थ बैजनाथ दुबे, एलपीजी गैस एजेंसी के नाम पर 13 लाख 76 हजार 200 रुपये की ठगी का शिकार होग गया। पुत्र के नाम पर गैस एजेंसी खोलने के लिए आरएचओ ने स्वयं की पैतृक भूमि को भी बेच दिया। जब वह गैस एजेंसी का लाइसेंस, एनओसी सहित अन्य दस्तावेज प्राप्त करने मुंबई गया तो वहां बताए गए पते पर कोई कार्यालय नहीं मिला और न ही रुपये खाते में ट्रांसफर कराने वाले ने मोबाइल फोन रिसीव किया। रिपोर्ट पर गांधीनगर थाना अंबिकापुर में पुलिस ने ठगी का केस दर्ज किया है।


जानकारी के मुताबिक मूलत: बलरामपुर जिला के ग्राम ओदारी, थाना चलगली के बैजनाथ दुबे पिता स्व. रामकेत दुबे 44 वर्ष वर्तमान में सोनी कॉलोनी गांधीनगर अंबिकापुर में निवासी करते हैं। वे अपने लड़के के नाम पर गैस एजेंसी खोलने के लिए छह माह पूर्व गूगल पर सर्च कर एचपी गैस एजेंसी को एक मेल किए थे। इसके बाद 16 अप्रैल 2024 को एक अनजान मोबाइल नंबर से फोन आया कि आपको आपके क्षेत्र में एलपीजी गैस एजेंसी के लिए चयनित किया गया है, उन्हें एरिया पिन कोड भेजने के लिए कहा गया। 17 अप्रैल को मेल आईडी पर एक मेल आया और फोन करके कहा गया कि आपको एप्रूवल लेटर 24 घंटे में मिल जाएगा, फिर आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। 19 अप्रैल को मेल और फोन से जानकारी मिली कि उन्हें गैस एजेंसी मिल गई है। इसके बाद रजिस्ट्रेशन हेतु 25 हजार 500 रुपये आरटीजीएस से पंजाब नेशनल बैंक, ब्रांच अंधेरी बीकेसी कॉलोनी जी ब्लॉक के दिए गए खाता नंबर पर भेजने कहा गया। विश्वास में आकर उन्होंने 18 अप्रैल को 25 हजार 500 रुपये आटीजीएस कर दिया। 19 अप्रैल को पुन: फोन और एक मेल आया जिसमें एनओसी के लिए 70 हजार 800 रुपये आरटीजीएस से भेजने कहा गया, उक्त राशि को भी उन्होंने आरटीजीएस कर दिया। 21 अप्रैल को फोन व मेल के माध्यम से डीलर लाइसेंस के लिए एक लाख 47 हजार 200 रुपये जमा करने कहा गया, जिसे 29 अप्रैल को उन्होंने आरटीजीएस से भेज दिया। इसके बाद भी ठगी का अंत नहीं हुआ और 26 अप्रैल को फोन/मेल के माध्यम से 250 सिलिंडर खरीदने के लिए तीन लाख 54 हजार रुपये अंधेरी मुंबई हिंदुस्तान पट्रोलियम कार्पोरेशन के कथित खाता में जमा करने कहा गया। एजेंसी के चक्कर में उन्होंने उक्त राशि भी बताए गए खाता नंबर में 09 मई को भेज दी थी। पुन: 100 नग कामर्शियल सिलिंडर लेने के लिए दो लाख 29 हजार 700 रुपये आरटीजीएस और गूगल पे के माध्यम से मांगा गया, जिसे उन्होंने 09 मई को ही जमा करा दिया था। 10 मई को फोन व मेल के माध्यम से डीलर, ऑफिस गोदाम के इंश्योरेंस के लिए चार लाख 40 हजार 500 रुपये जमा करने कहा गया, इस रकम को भी आईडीबीआई बैंक के खाते में उन्होंने आरटीजीएस कर दिया। 24 मई को ब्रांच सिक्योरिटी के लिए दो लाख 99 हजार रुपये की मांग की गई। इस रकम की प्राप्ति के बाद 24 मई को फोन से सूचना दी गई कि फिल्ड विजिट पर अधिकारी नहीं जा पा रहे हैं और उन्हें मुंबई ऑफिस, मुख्य शाखा एलपीजी वितरक चयन, जी-ब्लॉक बीकेसी बांद्रा कुली कांप्लेक्स अंधेरी ईस्ट मुंबई महाराष्ट्र आकर डीलर लाइसेंस, एनओसी और एग्रीमेंट पेपर साइन करके ले जाने के लिए कहा गया। 31 मई को वे अंबिकापुर से मुंबई के लिए रवाना हुए। 01 जून को मुंबई पहुंचने के बाद उन्होंने लगातार संपर्क में रहे व्यक्ति को फोन किया, लेकिन उसने फोन रिसीव नहीं किया और न ही बताए गए कार्यालय का ही पता चला।  

हारकर पहुंचे अंधेरी मुंबई साइबर क्राइम ब्रांच
लाखों रुपये एलपीजी गैस एजेंसी के नाम पर गंवा चुके बैजनाथ दुबे का जब किसी से संपर्क नहीं हुआ तो वे इसकी जानकारी देने साइबर क्राइम ब्रांच बीकेसी जी-ब्लॉक अंधेरी मुंबई थाने में पहुंचे। इनकी बातों को सुनने के बाद साइबर क्राइम पुलिस ने उन्हें अपने राज्य में जाकर क्राइम ब्रांच में रिपोर्ट करने कहा गया, साथ ही आश्वस्त किया गया कि जरूरत पड़ने पर मुंबई क्राइम ब्रांच का उन्हें सहयोग मिलेगा। बहरहाल रिपोर्ट पर गांधीनगर थाना पुलिस धारा 420 का मामला दर्ज कर अग्रिम जांच कर रही है।

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