बिश्रामपुर।थाने में पदस्थ कोट मोहर्रिर आरक्षक द्वारा मोटर व्हीकल एक्ट की समंश वसूली की राशि में लाखों रुपए की गड़बड़ी करके गबन किए जाने के मामले में पुलिस ने आरोपी आरक्षक को पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायालय पेश कर दिया है। जयनगर पुलिस ने बताया कि वर्तमान में बिश्रामपुर थाने में पदस्थ आरक्षक क्रमांक 537 दीपक सिंह पिता कामेश्वर सिंह निवासी माइनस कालोनी क्वार्टर नंबर 117 निवासी द्वारा वर्ष 2016 से 2022 तक जयनगर थाने में पदस्थ था। आरक्षक दीपक सिंह कोट मोहर्रिर का कार्य करता था। जयनगर थाने में पदस्थापना के दौरान मोटर व्हीकल एक्ट के तहत वसूली गई समंश राशि जिसे चालान के माध्यम से भारतीय स्टेट बैंक सूरजपुर शाखा से शासन के खाता क्रमांक 0041 में जमा किया जाना होता है, को कोर्ट मोहर्रीर का कार्य करने वाले आरक्षक दीपक सिंह को उक्त कार्य की जवाबदेही थाना प्रभारी द्वारा दी गई थी, जिसे थाने द्वारा दी गई राशि को चालान पत्र भरकर एसबीआई शाखा सूरजपुर में जमा किया जाना था, लेकिन आरक्षक दीपक सिंह ने शातिराना तरीके से कुल पचपन प्रकरणों की राशि सत्रह लाख चार हजार तीन सौ साठ रुपए बैंक खाते में जमा न करके चालान के प्रति में बैंक का सील मुहर लगाकर थाना व ट्रेजरी में जमा कर दिया गया था, उक्त कार्य आरक्षक द्वारा लंबे समय तक करने के बाद भी किसी को कानोंकान खबर तक नहीं लगी लेकिन पिछले दिनों आडिट के दौरान सूरजपुर पुलिस द्वारा जिला कोषालय में एसबीआई के चालान के माध्यम से जमा की गई राशि में भारी अंतर पाई गई। जिसके बाद अलग अलग थानों से जमा की गई राशि का बारीकी से मिलान किया गया, तब पता चला कि जयनगर थाने से जमा कराई गई राशि बैंक खाते में जमा ही नहीं हुई है, जिसके बाद हड़कंप मच गया। मामला आईजी व पुलिस अधीक्षक तक पहुंचते ही इसकी पड़ताल शुरू हुई तो पता चला कि कोर्ट मोहर्रीर का कार्य करने वाले आरक्षक दीपक सिंह ने थाने से भेजी गई राशि को उस तिथि में बैंक में जमा ही नहीं किया गया है और फर्जी पावती थाने में जमा करा दी गई है। गड़बड़ी प्रमाणित होते ही एसएसपी एमआर आहिरे के निर्देश पर जयनगर व बिश्रामपुर पुलिस ने आरक्षक को पूछताछ के लिए बुधवार की रात को ही तलब कर उससे पूछताछ शुरू की। पहले तो वह पुलिस को काफी गुमराह किया और कहता रहा कि उसने थाने से प्राप्त पूरी राशि को सूरजपुर एसबीआई शाखा में जमा कराया है और बकायदा पावती भी थाने में जमा करने दलील देता रहा लेकिन जब पुलिस ने कड़ाई बरती तब आरक्षक दीपक सिंह ने पूरी सच्चाई बयां करते हुए गबन की बात स्वीकार लिया। जिसके बाद पुलिस ने आरोपी आरक्षक दीपक सिंह के खिलाफ धारा 409, 420, 467, 468, 471 के तहत जुर्म दर्ज कर आज आरक्षक दीपक सिंह को न्यायालय में पेश कर दिया है। पुलिस ने बताया कि थाना जयनगर का समन शुल्क राशि जमा करने संबंधी जनवरी 2014 से जून 2017 तक का सत्यापन कराने प्रतिवेदन जिला कोषालय सूरजपुर को भेजा गया था, जिला कोषालय द्वारा माह जनवरी 2014 से 31 दिसम्बर 2023 तक सूची अनुसार ईकोष डाटा में मिलान करते हुए सत्यापन कर जानकारी प्रदाय किया गया। सत्यापन जानकारी में अवगत कराया गया कि 1 जनवरी 2014 से 30 मार्च 2016 तक कुल 72 पृथक-पृथक चालानों के माध्यम से उक्त अवधियों में विभिन्न तिथियों में जमा की गई समन शुल्क की कुल राशि 979400 रूपए का ईकोष में डाटा नहीं खुलने के कारण सत्यापन नहीं किया जाना लेख किया गया है। इसी प्रकार वर्ष 2016 से 2023 तक 56 चालानों के माध्यम से विभिन्न तिथियों में मोटर यान अधिनियम के तहत वसूल की गई समन शुल्क राशि कुल 1766860 रुपए को साईबर ट्रेजरी में जमा नहीं होना लेख कर दिया गया है। उक्त अवधि में अंकित राशियों को थाना जयनगर के रिकार्ड के अनुसार पूर्व में पदस्थ आरक्षक दीपक सिंह पिता कामेश्वर सिंह जिसे नियमित कोर्ट कार्य डाक वितरण एवं समन शुल्क की राशि बैंक में जमा करने हेतु लगाया गया था और जिसे उपरोक्त चालान दिनांक में उल्लेखित राशियों को जमा करने हेतु दिया गया था। आरक्षक द्वारा जमा करने हेतु दी गई राशियों का भारतीय स्टेट बैंक शाखा सूरजपुर का सील लगाकर एवं हस्ताक्षर किया हुआ चालान पावती लाकर थाना में प्रस्तुत किया गया था। आरक्षक द्वारा प्रस्तुत किए गए उक्त सभी चालान पावतियों में आरक्षक का नाम एवं हस्ताक्षर किया हुआ है तथा मुख्य शीर्ष 0041 वाहनों पर कर लघु शीर्ष 800 अन्य प्रति योजना क्रमांक 0766 तथा मुख्य शीर्ष 001, वाहनों पर कर लघु शीर्ष 800 अन्य प्रति योजना क्रमांक 766 पर समन शुल्क जमा होना लेख है। चालान पावती वर्षवार संधारित समन शुल्क रजिस्टर में चस्पा किया हुआ है, जिसका जिला कोषालय सूरजपुर द्वारा सत्यापन करने पर बैंक से उपरोक्त राशियों को कोषालय मेें जमा होना नहीं पाया गया। इस प्रकार थाना के रिकार्ड एवं जिला कोषालय अधिकारी सूरजपुर से प्राप्त सत्यापन रिपोर्ट पर से आरक्षक दीपक सिंह द्वारा थाना जयनगर में पदस्थ रहते हुए अपने शासकीय पदीय कर्तव्य के दौरान थाना जयनगर के मोटरयान अधिनियम के तहत वर्ष 2016 से वर्ष 2023 तक की अवधि में वसूल की गई शासकीय राशि कुल 1766860 रुपए को भारतीय स्टेट बैंक शाखा सूरजपुर बैंक की फर्जी स्टाम्प सील एवं हस्ताक्षर कर कुटरचित दस्तावेज तैयार कर शासकीय मद की राशि का धोखाधड़ी कर गबन करते हुए राशि को जमा नहीं किया गया है।

 

2016 से 2022 में की गई गड़बड़ी, अब खुला राज

बताया जा रहा है कि जयनगर थाने में वर्ष 2016 से 2022 के बीच मोटर व्हीकल एक्ट में की गई कार्यवाही के दौरान वसूली गई सम्मन शुल्क की राशि का आरक्षक दीपक सिंह द्वारा गबन का मामला आठ वर्ष बाद उजागर होना विभागीय लापरवाही को भी दर्शाता है। सवाल यह है कि क्या विभाग द्वारा हर साल आडिट नहीं कराया जाता। वर्ष 2016 का मामला अब जाकर आडिट में पकड़ा गया है, यदि सालाना आडिट कराया गया होता तो इतनी बड़ी राशि का गोलमाल नही हो पाता और समय रहते गड़बड़ी पकड़ी जाती। अब आठ वर्ष बाद गड़बड़ी उजागर होने के बाद तय हो गया है कि आरक्षक दीपक सिंह द्वारा अन्य थानों में भी पदस्थापना के दौरान गड़बड़ी तो नहीं की गई है। अब सभी थाना द्वारा जमा की गई राशि की पड़ताल एसएसपी ने किए जाने के निर्देश दिए हैं।

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