बिश्रामपुर। एसईसीएल बिश्रामपुर के सिविल विभाग द्वारा निकाले गए निविदा में एक ठेकेदार द्वारा फर्जी बैंक गारंटी जमा करने मामले की जांच के लिए कंपनी की विजलेंस टीम अब कभी भी यहां पहुंच सकती है। गुरुवार को सुबह से ही विजलेंस टीम के यहां आने की खबर को लेकर एसईसीएल अधिकारियों व ठेकेदारों में हड़कंप मचा रहा। गौरतलब है कि दस दिन पुराने मामले में सिविल विभाग द्वारा अब तक संबंधित ठेकेदार के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज नहीं कराई है, वहीं बैंक प्रबंधन ने पुलिस थाने में लिखित रूप से शिकायत दर्ज कराई गई है। बिश्रामपुर टीआई ने बैंक प्रबंधन द्वारा भेजे गए पत्र को उसी संदेश वाहक से यह कहते हुए मैनेजर को वापस लौटा दिया गया है कि मामला फर्जीवाड़े का है, इसलिए शिकायत पत्र भेजकर पल्ला झाड़ने से काम नहीं चलेगा बल्कि मामले में बैंक प्रबंधन सबूत के साथ थाने आए और संबंधित व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराए तब पुलिस मामले की जांच करेगी।दूसरी ओर एसईसीएल के सिविल महकमें ने भी आज तक मामले को लेकर पुलिस तक क्यों नही पहुंची, इससे प्रबंधन की कार्यशैली पर कई सवाल उठ रहे हैं। जानकर तो यहां तक बता रहे हैं कि अगर सिविल विभाग पुलिस में जाएगी, तो पुलिस मामले के तह तक जाने पुराने टीडीआर जो कंपनी के पास जमा हैं, उन सभी का वेरिफेकेशन कराएगी और ऐसे में बड़ा गोलमाल उजागर हो सकता है। संभवत: इससे बचने सिविल विभाग ने ठेकेदार को नोटिस जारी कर अपने दामन को बचाने में जुटी है और वह पुलिस के चक्कर में नहीं पड़ना चाहती है। आज विजलेंस के इसी मामले की जांच में बिश्रामपुर पहुंचने को लेकर दिन भर चर्चा का दौर जारी रहा लेकिन शाम तक इस खबर की पुष्टि नहीं हो सकी है।
क्या है मामला
ज्ञात हो कि दस दिनों पूर्व एसईसीएल बिश्रामपुर द्वारा डे टुडे मेंटनेंस ऑफ सीआईएसफ कैम्प एंड मेन मैगजीन के कार्य का टेंडर निकला था, जिसमें ठेकेदार आदित्य कंस्ट्रक्शन को एलवन के आधार पर काम मिला था। वर्क आर्डर से पूर्व ठेकेदार को कम्पनी के पास दो लाख तीस हजार रुपए की अतिरिक्त सुरक्षा राशि जमा करनी थी। संबंधित ठेकेदार द्वारा उक्त राशि 2 लाख 30 हजार रुपए का एसबीआई बिश्रामपुर शाखा के सील मुहर लगी प्रिंटेड टर्म डिपाजिट रसीद विभाग में जमा करा दी गई थी। जब टीडीआर वित्त विभाग पहुंचा तो रसीद में कुछ शंका होने पर वित्त विभाग ने एसबीआई बिश्रामपुर को पत्र लिखकर इसके सत्यापन की मांग कर दी। बताया जा रहा है कि सत्यापन के दौरान उक्त टीडीआर का बैंक में कहीं उल्लेख नहीं होने और एकदम असली जैसा टीडीआर के प्रतीत होने पर बैंक कर्मी भी चकित रह गए और इसके फर्जी होने का जवाबी पत्र एसईसीएल के वित्त विभाग को भेज दिया। इधर वित्त विभाग ने उस टीडीआर और बैंक के पत्र को सिविल विभाग को लौटा दिया, जबकि इस धोखाधड़ी मामले को वित्त विभाग संज्ञान में ले इसकी जांच शुरू कर सकता था लेकिन वित्त विभाग के अधिकारी राजेश कुमार खुद मामले को दबाने में जुटे दिखे और उन्होंने ऐसी कोई जानकारी नहीं होने की बात कहकर मामले को दबाने का प्रयास किया। इस मामले में अब विजलेंस टीम की आने की खबर से क्षेत्र के अधिकारियों की नींद उड़ी हुई है। सूत्र बताते हैं कि कई ठेकेदारों ने फर्जी टीडीआर पूर्व में भी एसईसीएल के टेंडरों में जमा किया है। इसके अतिरिक्त फर्जी सीएमपीएफ और बोगस मास्टर रोल जमाकर मजदूरों का फर्जी भुगतान के तो कई मामले हैं, जिसकी जांच हो जाए तो कई अधिकारी व ठेकेदारों की सामत आ सकती है, और करोड़ों का घोटाला उजागर हो सकता है।

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