0 गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान पार्क परिक्षेत्र रेंज महुली का मामला
0 जंगल के रक्षकों पर लग रहे गंभीर आरोप
सूरजपुर।  जिले के वनांचल क्षेत्र गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान पार्क रेंज महुली के अन्तर्गत ग्राम पंचायत छतरंग बहरा  सीमा कोल्हुआ सेमर झूला जंगल के बीच में तालाब निर्माण कराने के लिए रेंजर, डिप्टी रेंजर व  बीट गार्ड द्वारा धड़ल्ले से जेसीबी मशीन लगा कर बड़ी संख्या में साल व तेंदू इत्यादि के पेड़ों को कटवाया दिया गया है।
गौरतलब हो कि पार्क परिक्षेत्र में लगातार तालाब निर्माण व अन्य कार्य जोरों पर चल रहे हैं जिनमें विभागीय अधिकारी कर्मचारी संलिप्त हो कर पैसा कमाने के उद्देश्य से जंगल उजाड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। विभाग में बड़े अधिकारी भी आंख बंद कर सिर्फ फाइल में हस्ताक्षर का किराया लेकर मस्त है।
0 तालाब निर्माण में जेसीबी
 जंगल में पशु पक्षियों के पानी पिने के उद्देश्य से निर्माण कराये जा रहे तालाब निर्माण कार्य में अधिकारियों द्वारा जल्दबाजी  के चक्कर में धड़ल्ले से जेसीबी मशीन उपयोग कर कार्य कराया जा रहा है जो कि शासन के नियमानुसार गलत है।
निर्माण कार्यों में वास्तव में मजदूरों का अगर उपयोग किया जाता तो सायद जंगल की बरबादी नहीं होती।
जंगल में होने वाले विभागीय कार्यो में लगातार  टैक्टर व जेसीबी मशीन मंगा कर कार्य करवाया जा रहा है इसकी खबर लगातार आ रही है जिसका स्थानीय स्तर पर वाहन मालिक भी विरोध कर रहे हैं। स्थानीय वाहन मालिकों के अनुसार पहले तो विभाग के अधिकारी कर्मचारी जंगल का दोहन पैसा कमाने के उद्देश्य से लगातार कर रहे हैं।
स्थानीय मजदूरों के पेट काट रहे हैं और स्थानीय टैक्टर व जेसीबी मशीन न लगा कर बाहर से अपना मशीन मंगा कर स्थानीय लोगों की रोजी रोटी पर पानी फेर रहे हैं जो स्थानीय ग्रामीणों के साथ अन्याय है।
0बड़े पैमाने पर पेड़ हुए नष्ट
रेहण्ड पार्क परिक्षेत्र महुली रेंज में छोटे व बड़े तालाब निर्माण कार्य में जेसीबी मशीन लगा कर रेंजर व अन्य जिम्मेदार मनमानी से बड़े पैमाने पर  पेड़ों की बलि चढ़ा रहे है। जिससे ग्रामीणों में खासी नाराजगी हैं। जंगल के रक्षक भक्षक क्यों बन बैठे हैं जो कमाई करने के उद्देश्य से जंगल खत्म कर रहे हैं। सूत्र तो यह भी बताते है कि इन जंगलों से पिछले सालों से लगातार कटाई करवा कर विभागीय अधिकारी व कर्मचारी संलिप्त हो इमारती लकड़ीयो की तस्करी करवा रहे हैं। ऐसे में यह विषय अधिकारीयों के लिए गंभीरता से विचार करने वाला है कि क्या तालाब निर्माण करने के उद्देश्य से भी विभागीय अधिकारी अपने संरक्षण में लकड़ी कटवा कर कहीं तस्करी तो नहीं करवा रहे।

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